‘मुस्लिम छात्रों को प्रवेश’ विवाद के बीच जम्मू के मेडिकल कॉलेज की एमबीबीएस मान्यता रद्द, छात्रों को अन्य संस्थानों में किया जाएगा स्थानांतरित
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने न्यूनतम मानकों का पालन न करने के चलते जम्मू-कश्मीर के रियासी स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) को दी गई एमबीबीएस पाठ्यक्रम की अनुमति वापस..
नयी दिल्ली/जम्मू। नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) के मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (MARB) ने न्यूनतम मानकों का पालन न करने के चलते जम्मू-कश्मीर के रियासी स्थित श्री माता वैष्णो देवी इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल एक्सीलेंस (SMVDIME) को दी गई एमबीबीएस पाठ्यक्रम की अनुमति वापस ले ली है। कॉलेज में पढ़ रहे सभी मौजूदा एमबीबीएस छात्रों को अब केंद्र शासित प्रदेश के अन्य मान्यता प्राप्त मेडिकल कॉलेजों में स्थानांतरित किया जाएगा।
MARB के आदेश के अनुसार, 2025-26 शैक्षणिक सत्र की काउंसलिंग के दौरान कॉलेज में दाखिला लेने वाले सभी छात्रों को जम्मू-कश्मीर के अन्य मेडिकल संस्थानों में सुपरन्यूमेरेरी सीटों (अतिरिक्त सीटों) पर समायोजित किया जाएगा। इसका अर्थ यह है कि अनुमति रद्द होने के बावजूद किसी भी छात्र की एमबीबीएस सीट नहीं जाएगी।
प्रवेश को लेकर राजनीतिक विवाद
यह कॉलेज पिछले कुछ समय से अपने प्रवेश आंकड़ों को लेकर राजनीतिक विवाद में घिरा रहा है। 2025-26 सत्र के पहले बैच में 50 में से 42 छात्र मुस्लिम, जबकि एक छात्र सिख समुदाय से था। इसी संरचना को लेकर जम्मू में कई संगठनों द्वारा तीव्र विरोध प्रदर्शन किए गए थे।
भाजपा की प्रतिक्रिया
भारतीय जनता पार्टी ने NMC के फैसले का स्वागत किया है। भाजपा विधायक आरएस पठानिया ने कहा, “क्वालिटी ओवर क्वांटिटी—NMC ने आवश्यक मानकों को पूरा न करने के कारण SMVDIME में 50 एमबीबीएस सीटों की अनुमति रद्द की है। यह गुणवत्ता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाता है। प्रभावित सभी छात्रों को केंद्र शासित प्रदेश के अन्य कॉलेजों में सुपरन्यूमेरेरी सीटों पर बिना किसी बाधा के स्थानांतरित किया जाएगा।”
मुख्यमंत्री की चिंता
जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने भी परिसर के बढ़ते राजनीतिकरण के चलते छात्रों की सुरक्षा को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने केंद्र सरकार से संस्थान को बंद कर छात्रों को अन्यत्र स्थानांतरित करने का आग्रह किया था।
अचानक निरीक्षण में सामने आई खामियां
MARB द्वारा मंगलवार को जारी आदेश के अनुसार, यह गैर-अनुपालन अचानक निरीक्षण के दौरान सामने आया। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग अधिनियम, 2019 की धारा 28(7) के तहत, MARB को बिना पूर्व सूचना मेडिकल कॉलेजों का निरीक्षण करने का अधिकार है। इसी के तहत 2 जनवरी 2026 को कॉलेज का निरीक्षण किया गया।
निरीक्षण रिपोर्ट में कॉलेज में फैकल्टी की भारी कमी, क्लिनिकल सामग्री का अभाव और बुनियादी ढांचे से जुड़ी गंभीर खामियां पाई गईं। इन कमियों को नियमों के तहत गैर-अनुपालन की श्रेणी में रखा गया।
मूल्यांकन के बाद आयोग ने निष्कर्ष निकाला कि संस्थान UGMSR-2023 के तहत मेडिकल कॉलेज की स्थापना और संचालन के लिए निर्धारित न्यूनतम मानकों को पूरा करने में विफल रहा है। इसके बाद NMC अध्यक्ष की मंजूरी से MARB ने तत्काल प्रभाव से अनुमति पत्र वापस लेने का निर्णय लिया।
छात्रों का भविष्य सुरक्षित
आदेश में स्पष्ट किया गया है कि छात्रों के स्थानांतरण की प्रक्रिया जम्मू-कश्मीर प्रशासन की नामित स्वास्थ्य और काउंसलिंग प्राधिकरणों द्वारा लागू की जाएगी, जिन्हें इस निर्णय की औपचारिक सूचना दे दी गई है। छात्रों को अन्य मेडिकल कॉलेजों में नियमित स्वीकृत सीटों से अतिरिक्त सीटों पर समायोजित किया जाएगा।
क्या था पूरा विवाद?
पिछले कुछ समय से जम्मू में भाजपा नेताओं और स्थानीय व्यापारिक संगठनों ने प्रवेश सूची का विरोध किया था और इसे तत्काल रद्द करने की मांग की थी। इन समूहों का तर्क था कि चूंकि यह कॉलेज श्री माता वैष्णो देवी श्राइन बोर्ड द्वारा संचालित है इसलिए यहां प्राथमिकता हिंदू छात्रों को मिलनी चाहिए।
भाजपा ने इस संबंध में श्राइन बोर्ड के अध्यक्ष और जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा को ज्ञापन भी सौंपा था, जिसमें प्रवेश प्रक्रिया को रद्द करने की मांग की गई थी।
हालांकि, कॉलेज प्रशासन ने स्पष्ट किया था कि प्रवेश नेशनल एलिजिबिलिटी-कम-एंट्रेंस टेस्ट (NEET) और राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद के दिशानिर्देशों के अनुसार किए गए हैं। इसके बावजूद कुछ संगठनों ने केवल हिंदू छात्रों को ही प्रवेश देने की मांग उठाई थी।
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