‘फांसी घर’ विवाद: केजरीवाल, सिसोदिया सहित चार आप नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश
दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने विधानसभा परिसर में कथित ‘फांसी घर’ (एक्जीक्यूशन रूम) की प्रामाणिकता से जुड़े मामले में समिति के समक्ष पेश न होने पर पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित चार आम आदमी पार्टी (आप) नेताओं के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की सिफारिश सदन से..
नयी दिल्ली। दिल्ली विधानसभा की विशेषाधिकार समिति ने विधानसभा परिसर में कथित ‘फांसी घर’ (एक्जीक्यूशन रूम) की प्रामाणिकता से जुड़े मामले में समिति के समक्ष पेश न होने पर पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल सहित चार आम आदमी पार्टी (आप) नेताओं के खिलाफ उचित कार्रवाई करने की सिफारिश सदन से की है।
समिति ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि अरविंद केजरीवाल, पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया, पूर्व विधानसभा अध्यक्ष राम निवास गोयल और पूर्व उपाध्यक्ष राखी बिड़ला ने इस मामले में समिति की कार्यवाही से “जानबूझकर” और “इच्छापूर्वक” दूरी बनाए रखी।
‘फांसी घर’ विवाद दिल्ली विधानसभा के एक नवीनीकृत हिस्से को लेकर आप और भाजपा के बीच चल रहा है। आप का दावा है कि यह ब्रिटिश काल का फांसी कक्ष (गैलोज़ चैंबर) है, जबकि भाजपा का कहना है कि वह केवल एक टिफिन रूम था। इस संरचना का नवीनीकरण वर्ष 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने मनीष सिसोदिया, राखी बिड़ला और राम निवास गोयल की मौजूदगी में ‘फांसी घर’ के रूप में उद्घाटन किया था।
इस वर्ष अगस्त में विधानसभा के मानसून सत्र के दौरान भाजपा ने एक बार फिर आरोप लगाया कि लोगों को यह विश्वास दिलाया गया कि ‘फांसी घर’ एक ऐतिहासिक स्मारक है, जबकि वास्तव में वह ब्रिटिश कालीन विधानसभा भवन का एक टिफिन रूम था।
इसके बाद यह मामला विशेषाधिकार समिति को सौंपा गया। समिति ने 9 सितंबर 2025 को चारों आप नेताओं को पत्र जारी कर ‘फांसी घर’ के अस्तित्व और उसकी प्रामाणिकता से संबंधित अपने लिखित जवाब देने को कहा था।
हालांकि, चारों आप नेताओं ने अपने जवाब में समिति के अधिकार क्षेत्र को ही चुनौती दी और कहा कि इस मामले में विशेषाधिकार हनन का कोई प्रश्न नहीं बनता। रिपोर्ट के अनुसार, बाद में अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया ने समिति के पत्र, नोटिस और समन को रद्द कराने के लिए दिल्ली हाईकोर्ट में रिट याचिका भी दायर की।
समिति की रिपोर्ट में कहा गया है कि चारों आप नेता 13 नवंबर और 20 नवंबर 2025 को भी समिति के समक्ष पेश नहीं हुए। समिति का कहना है कि विधानसभा के पूर्व सदस्य होने के नाते ये सभी नेता ‘फांसी घर’ के उद्घाटन से जुड़े घटनाक्रम से भली-भांति परिचित थे और उनका दायित्व था कि वे समिति के सामने उपस्थित होकर इस दावे की सत्यता की जांच में सहयोग करते।
रिपोर्ट में कहा गया है कि समिति के समक्ष उपस्थित न होने का उनका निर्णय सदन और उसकी समिति की अवमानना के समान है।
रिपोर्ट में कहा गया, “समिति यह सिफारिश करती है कि सदन 13 नवंबर और 20 नवंबर 2025 को निर्धारित बैठकों में बिना किसी उचित कारण या समिति की अनुमति के जानबूझकर अनुपस्थित रहने के लिए अरविंद केजरीवाल, राम निवास गोयल, मनीष सिसोदिया और राखी बिड़ला के खिलाफ उचित कार्रवाई करे।”
समिति ने यह भी स्पष्ट किया कि वह ‘फांसी घर’ की प्रामाणिकता से जुड़े मुख्य मुद्दे की जांच जारी रखेगी और आगामी सत्र में इस पर अलग से रिपोर्ट प्रस्तुत करेगी।
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