न्यायिक प्रक्रिया को तेज और सुलभ बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के बड़े निर्देश

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को देशभर के हाई कोर्ट्स के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए, जिनका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और आम लोगों के लिए सुलभ बनाना..

न्यायिक प्रक्रिया को तेज और सुलभ बनाने के लिए सुप्रीम कोर्ट के बड़े निर्देश
29-05-2026 - 06:01 PM

सुप्रीम कोर्ट ऑफ इंडिया ने शुक्रवार को देशभर के हाई कोर्ट्स के लिए कई महत्वपूर्ण निर्देश जारी किए, जिनका उद्देश्य न्यायिक प्रक्रिया को अधिक तेज, पारदर्शी और आम लोगों के लिए सुलभ बनाना है।

मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली सुप्रीम कोर्ट की पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल करते हुए सभी हाई कोर्ट्स को बाध्यकारी निर्देश जारी किए। इन निर्देशों के तहत हाई कोर्ट्स को तीन महीने के भीतर फैसले सुनाने और जमानत आदेश उसी दिन या अधिकतम अगले दिन जारी करने का आदेश दिया गया है।

भारतीय संविधान का अनुच्छेद 142 सुप्रीम कोर्ट को यह विशेष अधिकार देता है कि वह किसी भी लंबित मामले में “पूर्ण न्याय” सुनिश्चित करने के लिए लागू किए जा सकने वाले आदेश और निर्देश जारी कर सके।

रिपोर्ट के अनुसार, सुप्रीम कोर्ट के ये निर्देश उन मामलों की सुनवाई के दौरान दिए गए, जिनमें विभिन्न हाई कोर्ट्स द्वारा फैसले सुनाने में हो रही लंबी देरी पर चिंता जताई गई थी। खास तौर पर ऐसे आपराधिक अपील मामलों का मुद्दा उठाया गया, जिनमें उम्रकैद की सजा पाए कैदी वर्षों तक जेल में बंद रहे, जबकि सुनवाई पूरी होने के बावजूद फैसले सुरक्षित रखे गए थे।

इस पर प्रतिक्रिया देते हुए जस्टिस सूर्यकांत की अगुवाई वाली पीठ ने निर्देश दिया कि सभी हाई कोर्ट्स सुरक्षित रखे गए फैसलों को अधिकतम तीन महीने के भीतर सुनाएं।

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि जमानत याचिकाओं की सुनवाई सामान्यतः उसी दिन की जाए, फैसला उसी दिन सुनाया जाए और आदेश तुरंत अपलोड किया जाए। यदि किसी कारणवश आदेश सुरक्षित रखा जाता है, तो उसे अधिकतम अगले दिन सुनाना और तत्काल अपलोड करना अनिवार्य होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि हाई कोर्ट्स जमानत आदेशों की जानकारी तुरंत ट्रायल कोर्ट्स तक पहुंचाएं। साथ ही जिन अंडरट्रायल कैदियों को जमानत मिल चुकी है, उन्हें आवश्यक औपचारिकताएं पूरी होते ही उसी दिन रिहा किया जाए।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सभी फैसलों को सुनाए जाने के 24 घंटे के भीतर संबंधित हाई कोर्ट की वेबसाइट पर अपलोड करना अनिवार्य होगा।

जहां तत्काल राहत की आवश्यकता हो, वहां अदालतें पहले फैसले का ऑपरेटिव हिस्सा सुना सकती हैं। हालांकि पूरा निर्णय सात दिनों के भीतर अपलोड करना होगा और असाधारण परिस्थितियों में यह समय सीमा अधिकतम 15 दिन तक हो सकती है।

सुप्रीम कोर्ट ने हाई कोर्ट्स को यह व्यवस्था लागू करने का भी निर्देश दिया कि किसी मामले का फैसला वेबसाइट पर अपलोड होते ही संबंधित वकीलों को स्वचालित ईमेल और मैसेज भेजे जाएं, ताकि उन्हें तुरंत जानकारी मिल सके।

इन निर्देशों को न्यायिक व्यवस्था में लंबित मामलों को कम करने, कैदियों के अधिकारों की रक्षा करने और न्याय वितरण प्रणाली को अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।