केरल विश्वविद्यालय में ‘भारत माता’ की छवि पर बवाल, KU बना संघर्ष का मैदान
केरल विश्वविद्यालय (KU) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भगवा ध्वज थामे भारत माता की छवि प्रदर्शित किए जाने से बुधवार को भारी बवाल खड़ा हो गया। यह कार्यक्रम राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर की उपस्थिति में आयोजित किया गया था..
तिरुवनंतपुरम। केरल विश्वविद्यालय (KU) में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान भगवा ध्वज थामे भारत माता की छवि प्रदर्शित किए जाने से बुधवार को भारी बवाल खड़ा हो गया। यह कार्यक्रम राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर की उपस्थिति में आयोजित किया गया था, जिसमें SFI (स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया) और KSU (केरल स्टूडेंट्स यूनियन) के कार्यकर्ताओं ने जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। विश्वविद्यालय का सीनेट हाउस परिसर करीब दो घंटे तक भारी तनाव में रहा।
RSS से जुड़ी छवि देख शुरू हुआ विवाद
विवाद उस समय शुरू हुआ जब सीनेट हॉल में आयोजित कार्यक्रम में भारत माता की एक छवि दिखी, जिसमें वह भगवा झंडा लिए हुए थीं। आरोप है कि यह छवि आमतौर पर RSS के आयोजनों में प्रयोग की जाती है।
कार्यक्रम का आयोजन ‘आपातकाल के 50 साल’ पूरे होने के अवसर पर किया गया था, जिसे श्री पद्मनाभ सेवा समिति, एक दक्षिणपंथी विचारधारा से जुड़ा संगठन, आयोजित कर रहा था। इसमें भाजपा नेता, कार्यकर्ता और समर्थक मौजूद थे।
KU के रजिस्ट्रार के. एस. अनिल कुमार ने आयोजकों को सूचित किया कि विश्वविद्यालय परिसर में धार्मिक प्रतीकों का प्रयोग नहीं किया जा सकता। जब आयोजक कार्यक्रम रद्द करने को तैयार नहीं हुए, तो रजिस्ट्रार ने लिखित रूप से कार्यक्रम रद्द करने की घोषणा कर दी।
छात्र संगठनों का प्रदर्शन और झड़प
इसके बाद बड़ी संख्या में SFI कार्यकर्ता हॉल के बाहर इकट्ठा होकर नारेबाजी करने लगे। वामपंथी सिंडिकेट के सदस्य भी इस विरोध में शामिल हो गए। वहीं KSU के कार्यकर्ता भी विश्वविद्यालय पहुंचे और कुछ ने हॉल में घुसने की कोशिश की। इससे BJP समर्थकों के साथ बहस और फिर हाथापाई हो गई। स्थिति बिगड़ती देख पुलिस को हस्तक्षेप करना पड़ा।
गवर्नर ने कार्यक्रम में की शिरकत, दी प्रतिक्रिया
इस बीच, राज्यपाल राजेंद्र आर्लेकर ने रजिस्ट्रार को सूचित किया कि वह कार्यक्रम में शामिल होंगे। कड़ी सुरक्षा के बीच वह शाम 6:25 बजे पहुंचे और भारत माता की छवि के समक्ष फूल अर्पित किए।
विरोधों पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्यपाल ने सत्तारूढ़ वाम दलों पर परोक्ष हमला करते हुए कहा, “मैंने पहले ही कहा था कि मेरी प्रकृति टकराव की नहीं है, लेकिन इसका यह मतलब नहीं कि मैं समझौता करता हूं। यह भूमि असहिष्णुता की नहीं रही है। हमें बात करनी चाहिए, चर्चा करनी चाहिए।”
उन्होंने छात्र कार्यकर्ताओं द्वारा कार्यक्रम में बाधा डालने को “गैर-लोकतांत्रिक” बताया और कहा:
“राज्यपाल को हॉल में प्रवेश नहीं करने देना! क्या यही लोकतंत्र है? मैं किसी को निशाना नहीं बनाना चाहता, लेकिन इस तरह की आपातकाल जैसी स्थिति को सहन नहीं किया जा सकता।”
कार्यक्रम के बाद जब गवर्नर बाहर निकले तो छात्र अभी भी मुख्य गेट के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे, जिससे राज्यपाल के काफिले को वैकल्पिक रास्ते से बाहर निकालना पड़ा।
छात्र संगठनों की प्रतिक्रिया और ऐलान
SFI ने आरोप लगाया कि विश्वविद्यालयों को ‘संघ केंद्र’ में बदला जा रहा है। SFI के राज्य सचिव पी. एस. संजीव ने कहा, “अगर सार्वजनिक आयोजनों को RSS के कार्यक्रमों में बदलने की कोशिश की गई तो SFI उग्र प्रदर्शन करेगा।”
KSU ने आरोप लगाया कि उनके कार्यकर्ताओं पर RSS-युवा मोर्चा के लोगों ने हमला किया, जब वे विश्वविद्यालय में राज्यपाल के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे थे।
इस घटना के विरोध में KSU ने गुरुवार को राज्यव्यापी शैक्षणिक बंद (एजुकेशनल बंद) का आह्वान किया है।
यह घटना केरल की राजनीति में शिक्षा संस्थानों में विचारधारा की टकराव को एक बार फिर उजागर करती है और राज्यपाल की भूमिका, विश्वविद्यालय की स्वायत्तता तथा अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता जैसे मुद्दों पर गहरी बहस छेड़ रही है।
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