5 साल पुराने बकाया कर्ज़ पर मौलाना तौकीर रज़ा की नई मुश्किलें, संपत्ति जब्ती की तैयारी
बरेली में हाल ही में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रज़ा की परेशानियाँ खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। गिरफ्तारी के लगभग दो हफ्ते बाद अब उनके खिलाफ 35 साल पुराने एक कृषि ऋण को लेकर नया विवाद सामने आया ..
बरेली। बरेली में हाल ही में सांप्रदायिक हिंसा भड़काने के आरोप में गिरफ्तार इत्तेहाद-ए-मिल्लत काउंसिल (IMC) के अध्यक्ष मौलाना तौकीर रज़ा की परेशानियाँ खत्म होने का नाम नहीं ले रही हैं। गिरफ्तारी के लगभग दो हफ्ते बाद अब उनके खिलाफ 35 साल पुराने एक कृषि ऋण को लेकर नया विवाद सामने आया है। ब्याज सहित यह राशि अब बढ़कर ₹28,000 से अधिक हो गई है।
बदायूं ज़िला सहकारी बैंक के सीईओ हरी बाबू भारती ने बताया कि गुरुवार को बैंक की वसूली टीम ने रज़ा के बरेली स्थित आवास पर वसूली नोटिस पहुंचाया है। उन्होंने कहा, “यदि तय समय में बकाया राशि जमा नहीं की जाती, तो उनकी संपत्ति कुर्क की जाएगी।” भारती ने यह भी जोड़ा कि बैंक सभी बकायेदारों के खिलाफ सख्त नीति अपना रहा है।
जांच में सामने आया है कि रज़ा ने वर्षों पहले बदायूं में स्थित अपनी अधिकांश संपत्तियाँ बेच दी थीं। इसी कारण बैंक ने अब उनकी बरेली और अन्य जिलों में मौजूद संपत्तियों पर ध्यान केंद्रित किया है। भारती ने कहा, “जहाँ भी हमें उनके नाम पर संपत्ति दर्ज मिलेगी, वहाँ कुर्की की कार्रवाई की जाएगी।”
अधिकारियों के अनुसार, यह मामला वर्ष 1990 का है, जब बदायूं ज़िले के कर्तौली गाँव निवासी रज़ा ने रसूलपुर कुट्टी साधन सहकारी समिति से खाद और बीज खरीदने के लिए ₹5,560 का कृषि ऋण लिया था। कई बार नोटिस भेजे जाने के बावजूद उन्होंने न तो मूलधन चुकाया और न ही ब्याज। अब बैंक ने यह मामला पुनः खोला है और औपचारिक वसूली प्रक्रिया शुरू कर दी है।
वर्ष 1996 में राज्य सरकार ने किसानों के लिए ऋण माफी योजना लागू की थी, लेकिन रज़ा का खाता उस योजना में शामिल नहीं था। 1997 में हुई एक ऑडिट जांच में यह पाया गया कि उनका ऋण अब भी बकाया है। पिछले कई वर्षों में बैंक ने उन्हें कई बार वसूली नोटिस भेजे, परन्तु रज़ा की राजनीतिक पहुँच और प्रभाव के कारण भुगतान नहीं हुआ।
हाल ही में बरेली में हुई हिंसा और रज़ा की गिरफ्तारी के बाद ज़िला सहकारी बैंक ने कई पुराने ऋण मामलों को फिर से खोला है, जिनमें उनका मामला भी शामिल है। नवीनतम ऑडिट रिपोर्ट के अनुसार, ₹5,560 के मूलधन पर ₹21,940 का ब्याज जुड़ गया है, जिससे कुल बकाया राशि ₹28,386 हो गई है। बैंक अब इस बकाया पर अतिरिक्त 2% दंडात्मक ब्याज लगाने पर भी विचार कर रहा है।
बैंक की वसूली टीम ने पुराने रिकॉर्ड्स की दोबारा जांच कर रिपोर्ट राज्य सहकारी विभाग मुख्यालय को भेज दी है। एक वरिष्ठ अधिकारी ने पुष्टि की कि रज़ा का मामला अब सरकार के स्तर तक पहुँच गया है और बरेली व बदायूं के अधिकारियों को बैंक के साथ समन्वय कर आवश्यक कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं।
What's Your Reaction?