‘उग्र यूनियनवाद’: शशि थरूर ने पूछा—भारत बंद क्यों बन जाता है ‘केरल बंद’?
10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा बुलाए गए 24 घंटे के देशव्यापी हड़ताल (भारत बंद) के कारण गुरुवार को केरल में सामान्य जनजीवन लगभग ठप हो..
10 केंद्रीय ट्रेड यूनियनों के संयुक्त मंच द्वारा बुलाए गए 24 घंटे के देशव्यापी हड़ताल (भारत बंद) के कारण गुरुवार को केरल में सामान्य जनजीवन लगभग ठप हो गया।
हालांकि लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष और वरिष्ठ कांग्रेस नेता राहुल गांधी ने भारत बंद का समर्थन किया, लेकिन कांग्रेस के ही वरिष्ठ नेता शशि थरूर और वी.डी. सतीशन ने जनजीवन को पंगु बना देने वाले बंद की कड़ी आलोचना की।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, बुधवार आधी रात से शुरू होकर गुरुवार आधी रात तक चलने वाली इस हड़ताल के कारण राज्य भर में दुकानें और व्यावसायिक प्रतिष्ठान बंद रहे। केंद्र और राज्य सरकार के दफ्तरों के साथ-साथ सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों का कामकाज भी प्रभावित हुआ। परिवहन सेवाएं बुरी तरह बाधित रहीं, क्योंकि ऑटो-रिक्शा, टैक्सी, बस और लॉरी चालक हड़ताल में शामिल हुए। रेलवे और हवाई अड्डों के कर्मचारी भी इस आंदोलन का हिस्सा बने।
माइक्रो-ब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म X पर प्रतिक्रिया देते हुए तिरुवनंतपुरम से कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने कहा,
“यह एक दुखद विडंबना है कि आज का ‘भारत बंद’ वास्तव में सिर्फ एक और ‘केरल बंद’ बनकर रह गया है। जहां भारत का बाकी हिस्सा ऐसे जबरन व्यवधानों से आगे बढ़ चुका है, वहीं केरल अब भी संगठित अल्पसंख्यक की इस ‘संगठित तानाशाही’ का बंधक बना हुआ है, जो असंगठित बहुसंख्यक पर थोप दी जाती है।”
उन्होंने आगे कहा, “हमने अपने उग्र यूनियनवाद से उद्योगों को यहां से भगा दिया। अब ‘मसल पावर’ जैसे पुराने तरीकों से चिपके रहकर नागरिकों को जबरन उनके घरों में कैद किया जा रहा है और दुकानदारों को शटर गिराने के लिए मजबूर किया जा रहा है। हड़ताल का अधिकार दूसरों पर बंद थोपने का अधिकार नहीं देता।”
थरूर ने कहा कि उग्र यूनियनवाद ने केरल की छवि को पहले ही काफी नुकसान पहुंचाया है, जो अब फैक्ट्रियों से निकलकर सड़कों और घरों तक फैल चुका है।
“अगर हम पुराने और अप्रासंगिक आंदोलन तरीकों से चिपके रहेंगे, जिन्हें दुनिया ही नहीं बल्कि भारत के बाकी हिस्से भी पीछे छोड़ चुके हैं, तो हम खुद को आधुनिक और निवेशकों के अनुकूल गंतव्य के रूप में स्थापित नहीं कर सकते।”
उन्होंने ‘असहमति के अधिकार’ के साथ-साथ ‘काम करने और यात्रा करने की स्वतंत्रता’ पर भी जोर दिया।
सतीशन ने कहा कि कांग्रेस ट्रेड यूनियनों की व्यापक मांगों का समर्थन करती है, लेकिन केरल में हड़ताल लागू करने का तरीका अब पुराना और अप्रासंगिक हो चुका है। उन्होंने पूछा,“पड़ोसी तमिलनाडु में शायद ही कोई महसूस करे कि हड़ताल चल रही है। कर्नाटक, महाराष्ट्र या यहां तक कि दिल्ली में भी जनजीवन ठप नहीं होता। फिर केवल केरल ही बंद जैसा माहौल क्यों बना लेता है?”
कांग्रेस नेता ने राष्ट्रीय हड़तालों के नाम पर पूर्ण बंद थोपने की परंपरा पर व्यापक सार्वजनिक बहस की जरूरत पर भी जोर दिया।
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