जयपुर में ब्लैक आउट अभ्यास के तहत लापरवाही दिखी..कुछ लोगों ने पूर्ण सफल नहीं होने दिया पूर्ण ब्लैक आउट
राजस्थान में राजधानी जयपुर सहित विभिन्न जिलों में युद्ध की आशंका के मद्देनजर मॉक ड्रिल (आपातकालीन अभ्यास) तय था। इसमें सरकार की ओर से तो नागरिक सुरक्षा की दृष्टि से सफलता पूर्वक अभ्यास किया गया लेकिन रात को ब्लैक आउट के मामले में जयपुर में स्व-अनुशासन बहुत ही कमी दिखी..
जयपुर। राजस्थान में राजधानी जयपुर सहित विभिन्न जिलों में युद्ध की आशंका के मद्देनजर मॉक ड्रिल (आपातकालीन अभ्यास) तय था। इसमें सरकार की ओर से तो नागरिक सुरक्षा की दृष्टि से सफलता पूर्वक अभ्यास किया गया लेकिन रात को ब्लैक आउट के मामले में जयपुर में स्व-अनुशासन बहुत ही कमी दिखी। रात करीब साढ़े आठ बजे सायरन ना सुनाई देने पर भी लोगों ने स्वतःस्पूर्त बत्तियां बुझा दीं। लेकिन, अनेक लोगों पर ब्लैक आउट के निर्देशों का कोई असर नहीं दिखा।
एक स्थान पर हल्की रोशनी भी घातक हो सकती है, इसकी परवाह किये बिना कुछ कॉलोनियों के मकानों पर बत्तियां चालू रहीं। हालांकि एक-दूसरे को लोगों ने ध्यान दिलाकर बत्तियां बुझवाईं लेकिन कई स्थानों पर लोग लापरवाह रहे। उन लोगों के तर्क थे मॉक ड्रिल ही तो है..क्या फर्क पड़ता है। कुछ लोगों ने सायरन ना बजने को बहाना बनाया तो कुछ ने कॉलोनी सड़कों पर जलती लाइटों को..। कुल मिलाकर अधिकतर लोगों ने लाइटें तो बंद कीं लेकिन कुछ ने पूर्ण ब्लैकआउट को पूर्ण सफल नहीं होने दिया।
जयपुर की सड़कों पर बत्ती जलाकर वाहनो की आवाजाही जारी रही तो कहीं-कहीं पर रेलगाड़ियों के आने-जाने की आवाजें सुनाई देती रहीं। इसके अलावा कहीं-कहीं पर तो पटाखों की आवाजें भी सुनाई देती रहीं। सड़कों पर बत्ती जलाकर दुपहिया-चौपहिया वाहनों की आवाजाही से सड़कों के रिफ्लेक्टर भी चमकते रहे। जहां पर मकान निर्माण कार्य हो रहे हैं, वहां मजदूरों ने मकानों में बत्तियां जलाये रखीं। जयपुर में मॉक ड्रिल के तहत ब्लैक आउट अभ्यास मजाक बनकर रह गया।
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