भारत में नये अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल की नियुक्ति
केंद्र सरकार ने वरिष्ठ अधिवक्ता दविंदर पाल सिंह और कनकमेदला रवींद्र कुमार को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के लिए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) नियुक्त किया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इन नियुक्तियों को कैबिनेट की नियुक्ति समिति की मंजूरी प्राप्त हो चुकी है। दोनों की नियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्षों की अवधि के लिए..
नयी दिल्ली। केंद्र सरकार ने वरिष्ठ अधिवक्ता दविंदर पाल सिंह और कनकमेदला रवींद्र कुमार को भारत के सर्वोच्च न्यायालय के लिए अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) नियुक्त किया है। कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DoPT) द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार, इन नियुक्तियों को कैबिनेट की नियुक्ति समिति की मंजूरी प्राप्त हो चुकी है। दोनों की नियुक्ति पदभार ग्रहण करने की तिथि से तीन वर्षों की अवधि के लिए या अगले आदेश तक (जो भी पहले हो) प्रभावी रहेगी।
दविंदर पाल सिंह को वरिष्ठ अधिवक्ता के रूप में 35 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वह अब तक संवैधानिक, आपराधिक, नियामक और वाणिज्यिक कानून से जुड़े 20,000 से अधिक मामलों में पैरवी कर चुके हैं। उन्होंने केंद्र सरकार, विभिन्न जांच एजेंसियों, राज्य सरकारों, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, कॉरपोरेट संस्थानों और उच्च-निवल-मूल्य (हाई नेट वर्थ) व्यक्तियों का प्रतिनिधित्व कई अहम मामलों में किया है।
इससे पहले दविंदर पाल सिंह वर्ष 2001 से 2005 तक हरियाणा सरकार के लिए अतिरिक्त महाधिवक्ता (एडिशनल एडवोकेट जनरल) और 2005 से 2007 तक पंजाब सरकार के लिए इसी पद पर कार्य कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने भारत के सर्वोच्च न्यायालय और पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में संवेदनशील अभियोजन मामलों और संवैधानिक विवादों में प्रभावी रूप से पैरवी की।
उनकी विशेषज्ञता के क्षेत्र में भ्रष्टाचार से जुड़े मामले, राजनीतिक रूप से संवेदनशील अभियोजन, एनडीपीएस अधिनियम और किशोर न्याय अधिनियम से संबंधित चुनौतियां, बड़े भूमि अधिग्रहण विवाद तथा जन आंदोलनों से जुड़े मामले शामिल हैं।
दविंदर पाल सिंह केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) के लिए विशेष लोक अभियोजक और प्रवर्तन निदेशालय (ED) के लिए विशेष अधिवक्ता के रूप में भी काम कर चुके हैं। इस दौरान उन्होंने कई हाई-प्रोफाइल आर्थिक अपराध मामलों की पैरवी की, जिनमें अगस्ता वेस्टलैंड हेलीकॉप्टर मामला, दिल्ली आबकारी नीति मामला, किंगफिशर एयरलाइंस मामला, स्टर्लिंग बायोटेक मामला, विदेशी मुद्रा से जुड़े गंभीर आरोप और कोयला घोटाले से संबंधित महत्वपूर्ण मामले शामिल हैं।
केंद्र सरकार द्वारा की गई इन नियुक्तियों को सुप्रीम कोर्ट में केंद्र के कानूनी पक्ष को और मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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