कोई नयी खनन लीज़ नहीं: केंद्र ने हरियाणा, राजस्थान और गुजरात से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने को कहा

अरावली पहाड़ियों और पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने बुधवार को राजस्थान, हरियाणा और गुजरात की राज्य सरकारों को पत्र लिखकर 20 नवंबर के सुप्रीम कोर्ट आदेश की पुनः याद दिलाई। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सस्टेनेबल माइनिंग (सतत खनन) के लिए प्रबंधन योजना (एमपीएसएम) के अंतिम रूप से तैयार होने तक..

कोई नयी खनन लीज़ नहीं: केंद्र ने हरियाणा, राजस्थान और गुजरात से सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने को कहा
25-12-2025 - 11:09 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

नयी दिल्ली। अरावली पहाड़ियों और पर्वतमाला के संरक्षण को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच, केंद्रीय पर्यावरण मंत्रालय ने बुधवार को राजस्थान, हरियाणा और गुजरात की राज्य सरकारों को पत्र लिखकर 20 नवंबर के सुप्रीम कोर्ट आदेश की पुनः याद दिलाई। मंत्रालय ने स्पष्ट किया कि सस्टेनेबल माइनिंग (सतत खनन) के लिए प्रबंधन योजना (एमपीएसएम) के अंतिम रूप से तैयार होने तक किसी भी नयी खनन लीज़ को मंजूरी न दी जाए।

मंत्रालय ने भारतीय वानिकी अनुसंधान एवं शिक्षा परिषद (ICFRE) को भी पत्र लिखकर निर्देश दिया है कि एमपीएसएम तैयार करते समय पूरे अरावली भू-दृश्य (लैंडस्केप) का अध्ययन किया जाए और ऐसे सभी भूमिरूप/क्षेत्रों की पहचान की जाए, जहां खनन पर प्रतिबंध आवश्यक है।

पत्र में कहा गया है कि यह कदम उन क्षेत्रों के अतिरिक्त होगा, जहां पहले से ही खनन प्रतिबंधित है—जैसे कोर/अपरिवर्तनीय (इनवायोलेट) क्षेत्र तथा पहाड़ियाँ और पर्वतमालाएंताकि उनका संरक्षण और सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

मंत्रालय ने 24 दिसंबर को राज्य सरकारों को भेजे पत्र में कहा, संबंधित राज्य सरकारों से अनुरोध है कि वे माननीय सुप्रीम कोर्ट के उपर्युक्त निर्देशों का अनुपालन सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक कार्रवाई करें और एमओईएफ़एंडसीसी द्वारा ICFRE के माध्यम से एमपीएसएम के अंतिम रूप दिए जाने तक कोई भी नई खनन लीज़ प्रदान न की जाए।”

केंद्र ने यह भी निर्देश दिया है कि पहले से संचालित खदानों के मामले में संबंधित राज्य सरकारें सभी पर्यावरणीय सुरक्षा उपायों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करें और सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के अनुरूप कार्रवाई करें। मंत्रालय के प्रेस नोट में कहा गया,
चल रही खनन गतिविधियों को अतिरिक्त प्रतिबंधों के साथ सख्ती से नियंत्रित किया जाए, ताकि पर्यावरण संरक्षण और सतत खनन प्रथाओं का पालन सुनिश्चित हो सके।”

सुप्रीम कोर्ट के निर्देश
20 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने अरावली पहाड़ियों की एक नई, समान परिभाषा को स्वीकार किया था—

  • पहाड़ी (Hill): स्थानीय भू-स्तर से 100 मीटर या उससे अधिक ऊंचाई वाला कोई भी भूमिरूप।
  • पर्वतमाला (Range): दो या अधिक पहाड़ियों के बीच 500 मीटर तक का विस्तार।

तत्कालीन मुख्य न्यायाधीश बी. आर. गवई की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया था कि एमपीएसएम के अंतिम रूप तक कोई नई खनन लीज़ न दी जाए।

अदालत ने यह भी कहा था कि सतत खनन योजना में अरावली क्षेत्र के भीतर खनन के लिए अनुमेय क्षेत्र, पारिस्थितिक रूप से संवेदनशील, संरक्षण-आवश्यक और पुनर्स्थापन प्राथमिकता वाले क्षेत्रों की पहचान की जाए—जहां खनन पूरी तरह प्रतिबंधित हो या केवल असाधारण और वैज्ञानिक रूप से उचित परिस्थितियों में ही अनुमति दी जाए।

यह योजना झारखंड के सारंडा वनों में लौह अयस्क खनन के लिए ICFRE द्वारा तैयार की गई योजना के तर्ज पर बनाई जानी है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।