आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति ने 5-1 से रेपो रेट में 50 बेसिस अंक की कटौती को दी मंजूरी
भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने जून की शुरुआत में हुई बैठक में रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट (bps) यानी 0.50% की कटौती का निर्णय 5-1 के बहुमत से लिया..
नयी दिल्ली। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने जून की शुरुआत में हुई बैठक में रेपो रेट में 50 बेसिस पॉइंट (bps) यानी 0.50% की कटौती का निर्णय 5-1 के बहुमत से लिया।
आरबीआई की ओर से शुक्रवार को जारी मीटिंग की कार्यवृत्त के अनुसार:
“एमपीसी ने नीतिगत रेपो दर को 50 बेसिस अंक घटाकर 5.50 प्रतिशत करने के पक्ष में मतदान किया। डॉ. नागेश कुमार, प्रोफेसर राम सिंह, डॉ. राजीव रंजन, डॉ. पूनम गुप्ता और गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 50 बीपीएस की कटौती का समर्थन किया। जबकि सौंगत भट्टाचार्य ने केवल 25 बीपीएस की कटौती के पक्ष में वोट किया।”
भट्टाचार्य ने अपने तर्क में कहा, “इस समय मौद्रिक ढील की दिशा में संयमित और सतर्क रुख अधिक उपयुक्त है।”
गवर्नर संजय मल्होत्रा ने समिति में कहा कि वर्तमान व्यापक आर्थिक परिस्थितियों और भविष्य के दृष्टिकोण को देखते हुए, मौद्रिक नीति को आर्थिक वृद्धि को समर्थन देना चाहिए, जबकि मूल्य स्थिरता के लक्ष्य के साथ संतुलन बनाए रखना भी जरूरी है।
सीआरआर में भी कटौती
छह सदस्यीय समिति ने कैश रिज़र्व रेशियो (CRR) में भी 100 बेसिस अंक की कटौती करते हुए उसे 3% कर दिया है।
आरबीआई ने इसके साथ 2025-26 के लिए मुद्रास्फीति का अनुमान 4% से घटाकर 3.7% कर दिया है।
रेपो रेट और सीआरआर क्या हैं?
- रेपो रेट वह दर होती है जिस पर बैंक आरबीआई से अल्पकालिक ऋण लेते हैं।
- सीआरआर (CRR) वह न्यूनतम नकदी राशि होती है, जो बैंकों को अपने कुल जमा का एक हिस्सा आरबीआई के पास अनिवार्य रूप से जमा रखना होता है।
आरबीआई ने इससे पहले कोविड-19 महामारी के दौरान वर्ष 2020 में भी सीआरआर में 100 बीपीएस की कटौती की थी, जब अर्थव्यवस्था को बड़े पैमाने पर प्रोत्साहन की आवश्यकता थी।
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