‘टीपू की देह से मिली अंगूठी पर राम लिखा था’, महाराष्ट्र विवाद के बीच ओवैसी का बयान
महाराष्ट्र में एक नया राजनीतिक विवाद उस समय खड़ा हो गया जब महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से कर दी। इस टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “शर्मनाक” करार दिया। अब इस बहस में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी कूद पड़े हैं और उन्होंने टीपू सुल्तान का जोरदार बचाव..
महाराष्ट्र में एक नया राजनीतिक विवाद उस समय खड़ा हो गया जब महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष हर्षवर्धन सपकाल ने टीपू सुल्तान की तुलना छत्रपति शिवाजी महाराज से कर दी। इस टिप्पणी पर भारतीय जनता पार्टी ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए इसे “शर्मनाक” करार दिया। अब इस बहस में एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी भी कूद पड़े हैं और उन्होंने टीपू सुल्तान का जोरदार बचाव करते हुए उन्हें अंग्रेज़ों से लड़ते हुए शहीद बताया है। इस बयानबाज़ी के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में ऐतिहासिक विरासत, राष्ट्रवाद और अतीत की व्याख्या को लेकर तनाव और तेज़ हो गया है।
ओवैसी बोले— टीपू सुल्तान शहीद थे
आलोचनाओं का जवाब देते हुए ओवैसी ने कहा कि टीपू सुल्तान अंग्रेज़ों से लड़ते हुए शहीद हुए और उन्होंने कभी उनसे रहम की भीख नहीं मांगी। एक तीखे हमले में ओवैसी ने टीपू के प्रतिरोध की तुलना विनायक दामोदर सावरकर से करते हुए आरोप लगाया कि सावरकर ने अंग्रेज़ों को दया याचिकाएं लिखी थीं। ओवैसी का कहना था कि टीपू सुल्तान ने न तो कभी माफी मांगी और न ही औपनिवेशिक सत्ता के सामने झुके, बल्कि तलवार हाथ में लेकर आख़िरी सांस तक लड़ते रहे।
ओवैसी ने यह भी दावा किया कि अंग्रेज़ टीपू सुल्तान से इतने भयभीत थे कि उनकी मृत्यु के बाद करीब 90 मिनट तक उनका शव यूं ही पड़ा रहा। उन्होंने यह उल्लेख भी किया कि टीपू सुल्तान के शव से जो अंगूठी बरामद हुई थी, उस पर “राम” लिखा हुआ था। ओवैसी के मुताबिक, यह तथ्य उन्हें केवल सांप्रदायिक चश्मे से देखने की कोशिशों को चुनौती देता है।
कलाम और गांधी का हवाला
ओवैसी ने पूर्व राष्ट्रपति ए.पी.जे. अब्दुल कलाम का हवाला देते हुए कहा कि कलाम ने अपनी आत्मकथा विंग्स ऑफ फायर में लिखा है कि भारत की मिसाइल और रॉकेट क्षमता, एक तरह से, टीपू सुल्तान की शुरुआती सोच को ही आगे बढ़ा रही है।
इसके साथ ही उन्होंने महात्मा गांधी का ज़िक्र करते हुए दावा किया कि गांधी ने अपने लेखन में टीपू सुल्तान को हिंदू–मुस्लिम एकता का प्रतीक बताया था।
फडणवीस पर निशाना, मुख्यमंत्री ने तुलना खारिज की
अपने भाषण के दौरान ओवैसी ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को “इतिहास दुरुस्त करने” की सलाह दी। उन्होंने कहा कि राजनीतिक नेताओं को सोशल मीडिया की कहानियों के बजाय प्रामाणिक ऐतिहासिक दस्तावेज़ों पर भरोसा करना चाहिए।
ओवैसी ने भारत के संविधान की मूल प्रति का उल्लेख करते हुए कहा कि उसमें टीपू सुल्तान की तस्वीर मौजूद है, जिस पर जवाहरलाल नेहरू, सरदार पटेल और बी.आर. आंबेडकर जैसे नेताओं के हस्ताक्षर हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या आज के नेता खुद को उन हस्ताक्षरकर्ताओं से भी बड़ा मानते हैं।
इससे पहले देवेंद्र फडणवीस ने हर्षवर्धन सपकाल की टिप्पणी की आलोचना करते हुए कहा था कि छत्रपति शिवाजी महाराज ने मुग़ल शासन से लोगों को मुक्त कराया और स्वराज की स्थापना की। उन्होंने शिवाजी महाराज और टीपू सुल्तान के बीच किसी भी तरह की तुलना को न केवल आपत्तिजनक बल्कि ऐतिहासिक रूप से भी गलत बताया।
फिलहाल यह विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है और अलग–अलग राजनीतिक दलों के नेता अपने-अपने तर्कों के साथ आमने–सामने हैं।
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