रोबोडॉग विवाद: AI समिट से बाहर हुई गलगोटियास यूनिवर्सिटी
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मानवीय लापरवाही के टकराव ने AI इम्पैक्ट समिट के आयोजकों के लिए बड़ी शर्मिंदगी खड़ी कर दी। एक प्रदर्शक, नोएडा स्थित Galgotias University द्वारा विकसित बताए गए रोबोटिक डॉग और “ड्रोन सॉकर एरिना” को लेकर किए गए दावे उस समय झूठे साबित हो गए, जब सामने आया कि पहला उत्पाद चीन..
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मानवीय लापरवाही के टकराव ने AI इम्पैक्ट समिट के आयोजकों के लिए बड़ी शर्मिंदगी खड़ी कर दी। एक प्रदर्शक, नोएडा स्थित Galgotias University द्वारा विकसित बताए गए रोबोटिक डॉग और “ड्रोन सॉकर एरिना” को लेकर किए गए दावे उस समय झूठे साबित हो गए, जब सामने आया कि पहला उत्पाद चीन का है और दूसरा दक्षिण कोरिया का।
इस पर सरकार ने सख्त कदम उठाते हुए बुधवार को गलगोटियास यूनिवर्सिटी से पहले स्पष्टीकरण मांगा और फिर उसे एक्सपो से अपना स्टॉल खाली करने को मजबूर किया।
आईटी मंत्रालय के सचिव एस कृष्णन ने बुधवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा, “हम एक्सपो में केवल वास्तविक और प्रामाणिक प्रदर्शक चाहते हैं। यहां किसी तरह का विवाद नहीं चाहते। साहित्यिक चोरी (प्लेज़रिज़्म) और गलत जानकारी को बढ़ावा नहीं दिया जा सकता। इससे अन्य प्रतिभागियों की शानदार प्रदर्शनी पर असर नहीं पड़ना चाहिए।”
इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) के अतिरिक्त सचिव और इंडिया AI मिशन के सीईओ अभिषेक सिंह ने कहा, “मुख्य समस्या यह है कि गलगोटियास ने खुद को कुछ और बताया। उन्होंने लोगों को गुमराह किया। यहां पूरी दुनिया मौजूद है।”
यह सम्मेलन आईटी मंत्रालय द्वारा आयोजित किया गया है। सरकार के Press Information Bureau (PIB) के एक अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा कि गलगोटियास से स्टॉल खाली करवाने का कारण यह था कि उसका आचरण ‘राष्ट्रीय स्तर की शर्मिंदगी’ बन गया था।
विवाद की जड़
हालांकि स्टॉल पर मौजूद विश्वविद्यालय के शिक्षक पूरे दिन इसे गलतफहमी और गलत व्याख्या का नतीजा बताने की कोशिश करते रहे, लेकिन सच्चाई यह है कि मंगलवार को स्टॉल संभाल रहीं एक फैकल्टी सदस्य ने दावा किया था कि रोबोटिक डॉग (जिसे उन्होंने ओरियन नाम दिया—संभवतः ग्रीक शिकारी ओरियन और उसके कुत्ते सिरीयस के संदर्भ में) और ड्रोन सॉकर एरिना, दोनों गलगोटियास यूनिवर्सिटी द्वारा विकसित हैं।
मंगलवार को केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने X पर एक वीडियो पोस्ट किया था, जिसमें विवादित रोबोडॉग दिखाई दे रहा था। यह पोस्ट उन्होंने बुधवार सुबह हटा दी। बाद में उस पोस्ट पर कम्युनिटी नोट जोड़ा गया, जिसमें लिखा था, “यह रोबोट चीन से आयात किया गया है, जिसकी कीमत करीब 2,800 डॉलर है…”
यूनिवर्सिटी की सफाई और माफी
मंगलवार देर रात/बुधवार सुबह जारी बयान में गलगोटियास यूनिवर्सिटी ने कहा, “हम, गलगोटियास के शिक्षक और छात्र, विश्वविद्यालय के खिलाफ चलाए जा रहे प्रचार से बेहद आहत हैं। हम स्पष्ट करना चाहते हैं कि रोबोटिक प्रोग्रामिंग छात्रों को AI सीखाने और वास्तविक दुनिया के कौशल विकसित करने के लिए है, जिसमें वैश्विक स्तर पर उपलब्ध टूल्स और संसाधनों का उपयोग किया जाता है। AI प्रतिभा विकसित करना समय की जरूरत है। हमारी दृष्टि छात्र-केंद्रित सीख और नवाचार पर है।”
लेकिन, बुधवार को जब यह साफ हो गया कि यह सफाई स्वीकार नहीं की जाएगी, तो विश्वविद्यालय ने सबसे पुराना बचाव अपनाया, एक बलि का बकरा ढूंढना। विश्वविद्यालय ने उस फैकल्टी सदस्य को “अपर्याप्त जानकारी रखने वाली”, “कैमरे के सामने होने से प्रभावित” और “मीडिया से बात करने के लिए अधिकृत नहीं” बताया और औपचारिक माफी जारी की।
गलत वजह से सुर्खियां
पूरा दिन AI समिट से जुड़ी सबसे बड़ी खबर गलगोटियास यूनिवर्सिटी ही रही लेकिन उस तरह से नहीं, जैसे वह याद किया जाना चाहती थी।
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