भारत का एलीट क्लब में प्रवेश: SFDR तकनीक का परीक्षण एयर-टू-एयर मिसाइलों के लिए क्यों है गेम-चेंजर..!
एक बड़ी तकनीकी छलांग लगाते हुए भारत ने सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक का सफल परीक्षण किया है। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों के एलीट क्लब में शामिल हो गया है, जिनके पास यह उन्नत तकनीक मौजूद है। यह तकनीक लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों के विकास में अहम भूमिका निभाती..
एक बड़ी तकनीकी छलांग लगाते हुए भारत ने सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) तकनीक का सफल परीक्षण किया है। इस उपलब्धि के साथ भारत उन चुनिंदा देशों के एलीट क्लब में शामिल हो गया है, जिनके पास यह उन्नत तकनीक मौजूद है। यह तकनीक लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों के विकास में अहम भूमिका निभाती है और भारत को अपने विरोधियों पर रणनीतिक बढ़त प्रदान करती है।
DRDO ने SFDR का परीक्षण कैसे किया
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) के अनुसार, परीक्षण के दौरान सभी उप-प्रणालियों ने अपेक्षा के अनुरूप प्रदर्शन किया। इनमें नोज़ल-लेस बूस्टर, SFDR मोटर और फ्यूल फ्लो कंट्रोलर शामिल थे।
प्रणाली को पहले एक ग्राउंड बूस्टर मोटर के जरिए आवश्यक मैच (Mach) संख्या तक पहुँचाया गया। इसके बाद SFDR प्रणाली ने सफलतापूर्वक कार्य किया। इस पूरे परीक्षण की पुष्टि उड़ान के दौरान एकत्र किए गए डेटा से हुई, जिसे बंगाल की खाड़ी के तट पर स्थित चांदीपुर के ITR (इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज) द्वारा तैनात कई ट्रैकिंग उपकरणों के माध्यम से रिकॉर्ड किया गया।
इस लॉन्च और परीक्षण की निगरानी DRDO की विभिन्न प्रयोगशालाओं के वरिष्ठ वैज्ञानिकों ने की। इनमें डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लैबोरेटरी (DRDL), हाई एनर्जी मटीरियल्स रिसर्च लैबोरेटरी (HEMRL), रिसर्च सेंटर इमारत (RCI) और ITR के वैज्ञानिक शामिल थे।
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने DRDO की सराहना की
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने SFDR तकनीक के सफल प्रदर्शन पर DRDO और भारतीय उद्योग की सराहना की। रक्षा मंत्रालय की ओर से जारी बयान में कहा गया,
“SFDR तकनीक का सफल प्रदर्शन भारत को उन चुनिंदा देशों की एलीट श्रेणी में शामिल करता है, जिनके पास यह तकनीक है। यह तकनीक लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों के विकास में सक्षम बनाती है और देश को अपने विरोधियों के मुकाबले रणनीतिक बढ़त दिलाती है।”
इसके अलावा, रक्षा अनुसंधान एवं विकास विभाग के सचिव और DRDO के अध्यक्ष समीर वी. कामत ने भी इस सफल उड़ान परीक्षण में शामिल सभी टीमों को बधाई दी।
कुल मिलाकर, SFDR तकनीक का यह सफल परीक्षण भारत की मिसाइल क्षमता और रक्षा आत्मनिर्भरता की दिशा में एक अहम मील का पत्थर माना जा रहा है, जो भविष्य में भारतीय वायुसेना की मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा सकता है।
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