धोखाधड़ी मामले में shaadi.com के संस्थापक को सुप्रीम कोर्ट से दो हफ्ते की गिरफ्तारी से राहत
सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मैट्रिमोनियल वेबसाइट shaadi.com के संस्थापक अनुपम मित्तल और दो अन्य को कथित धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में दो सप्ताह के लिए गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान..
नयी दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मैट्रिमोनियल वेबसाइट shaadi.com के संस्थापक अनुपम मित्तल और दो अन्य को कथित धोखाधड़ी से जुड़े एक मामले में दो सप्ताह के लिए गिरफ्तारी से संरक्षण प्रदान किया।
न्यायमूर्ति प्रशांत कुमार मिश्रा और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने तेलंगाना हाईकोर्ट के उस आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें अनुपम मित्तल के खिलाफ कार्यवाही रद्द (क्वैश) करने से इनकार किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने मामले को नए सिरे से विचार के लिए हाईकोर्ट को वापस भेज दिया और मित्तल को अंतरिम जमानत के लिए हाईकोर्ट का रुख करने का निर्देश भी दिया।
यह मामला हैदराबाद की एक महिला की शिकायत से जुड़ा है, जिसमें आरोप लगाया गया है कि shaadi.com पर बनाए गए एक फर्जी प्रोफाइल के जरिए एक व्यक्ति ने उससे 11 लाख रुपये की ठगी की। शिकायतकर्ता का यह भी आरोप है कि मैट्रिमोनियल प्लेटफॉर्म ने उपयोगकर्ताओं के विवरण का सही तरीके से सत्यापन नहीं किया।
सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में कहा, “चूंकि क्वैशिंग याचिका का निपटारा गुण-दोष (मेरिट) के आधार पर नहीं किया गया है, इसलिए हम विवादित आदेश को निरस्त करते हैं और मामले को हाईकोर्ट को मेरिट पर विचार के लिए वापस भेजते हैं। इसके अनुसार आपराधिक मामलों को उनकी मूल फाइल में बहाल किया जाता है। हाईकोर्ट इन मामलों पर अपने स्तर पर गुण-दोष के आधार पर निर्णय करेगा। इस अदालत ने मामले के मेरिट पर कोई राय व्यक्त नहीं की है।”
अदालत ने आगे कहा, “इस बीच, याचिकाकर्ता हाईकोर्ट के समक्ष अंतरिम राहत के लिए प्रार्थना करेगा। आज से आठ सप्ताह की अवधि तक याचिकाकर्ता के खिलाफ कोई दमनकारी कार्रवाई (coercive steps) नहीं की जाएगी।”
अनुपम मित्तल की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता आत्माराम नाडकर्णी ने दलील दी कि उनके मुवक्किल केवल एक मैट्रिमोनियल वेबसाइट चला रहे हैं, जो मूल रूप से एक मैचमेकिंग प्लेटफॉर्म है।
नाडकर्णी ने कहा, “मैं सिर्फ लोगों का मेल-मिलाप कराने की सुविधा देता हूं। हम जांच में सहयोग कर रहे हैं, लेकिन फिर भी मुझे आरोपी क्यों बनाया गया है?”
इससे पहले, 26 जून को सुप्रीम कोर्ट ने तेलंगाना सरकार को नोटिस जारी करते हुए मामले की सभी कार्यवाहियों पर रोक लगा दी थी।
गौरतलब है कि तेलंगाना हाईकोर्ट ने पिछले साल अनुपम मित्तल और दो अन्य—विग्नेश और सतीश—के खिलाफ दर्ज एफआईआर को रद्द करने से इनकार कर दिया था, जिन्हें इस मामले में आरोपी बनाया गया है।
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