कैसे मारे गए सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी: लीबिया के पूर्व तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के बेटे की पूरी कहानी

लीबिया के दिवंगत शासक मुअम्मर गद्दाफी के सबसे चर्चित बेटे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की एक हमले में मौत हो गई है। सऊदी अरब के स्वामित्व वाले मीडिया संस्थान अल-अरबिया के मुताबिक, 53 वर्षीय सैफ अल-इस्लाम को चार हमलावरों ने निशाना..

कैसे मारे गए सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी: लीबिया के पूर्व तानाशाह मुअम्मर गद्दाफी के बेटे की पूरी कहानी
04-02-2026 - 12:12 PM

लीबिया के दिवंगत शासक मुअम्मर गद्दाफी के सबसे चर्चित बेटे सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी की एक हमले में मौत हो गई है। सऊदी अरब के स्वामित्व वाले मीडिया संस्थान अल-अरबिया के मुताबिक, 53 वर्षीय सैफ अल-इस्लाम को चार हमलावरों ने निशाना बनाया। यह घटना राजधानी त्रिपोली से करीब 136 किलोमीटर (85 मील) दक्षिण-पश्चिम स्थित जिंतान शहर में हुई।

रिपोर्ट के अनुसार, हमलावरों ने मंगलवार शाम सैफ अल-इस्लाम के आवास के बगीचे में गोली मार दी, जिसके बाद वे मौके से फरार हो गए। गद्दाफी परिवार के करीबी एक सूत्र ने बताया कि उनकी मौत स्थानीय समयानुसार रात करीब 2:30 बजे हुई।

घटना की परिस्थितियों को लेकर अभी पूरी जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन सैफ अल-गद्दाफी के एक करीबी सहयोगी ने इसे साफ तौर पर सुनियोजित हत्या (असैसिनेशन)” बताया है।

सैफ अल-इस्लाम की मौत की पुष्टि उनके राजनीतिक सलाहकार रहे अब्दुल्ला ओथमान ने भी फेसबुक पोस्ट के जरिए की। ओथमान 2020–2021 के दौरान सैफ गद्दाफी की राजनीतिक टीम के सदस्य थे। उन्होंने लिखा, “हम अल्लाह के हैं और उसी की ओर लौटकर जाना है। मुजाहिद सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी अब अल्लाह की पनाह में हैं।”

2011 में नाटो समर्थित विद्रोह के बाद उनके पिता मुअम्मर गद्दाफी की सत्ता गिरने के बावजूद, सैफ अल-इस्लाम लीबिया की राजनीति में एक प्रमुख और विवादास्पद चेहरा बने रहे।

सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी: जीवन और राजनीति का सफर

सैफ अल-इस्लाम गद्दाफी अपने कुख्यात पिता के उत्तराधिकारी माने जाते थे, लेकिन सत्ता के पतन के बाद उनका जीवन कैद, गुमनामी और संघर्ष से भरा रहा। एक समय वह तेल-समृद्ध उत्तरी अफ्रीकी देश लीबिया में अपने पिता मुअम्मर गद्दाफी (जिन्होंने चार दशकों से अधिक समय तक शासन किया) के बाद सबसे शक्तिशाली व्यक्ति माने जाते थे, भले ही उनके पास कोई आधिकारिक पद न हो।

उन्होंने नीतियों को आकार देने में अहम भूमिका निभाई और कई संवेदनशील व उच्च-स्तरीय कूटनीतिक मिशनों में मध्यस्थ की भूमिका निभाई। उन्होंने लीबिया द्वारा विनाशकारी हथियारों (WMD) को छोड़ने से जुड़ी बातचीत का नेतृत्व किया और 1988 में स्कॉटलैंड के लॉकरबी में हुए पैन एम फ्लाइट 103 बम धमाके में मारे गए लोगों के परिजनों को मुआवजा देने की वार्ता भी की।

लीबिया को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग (पैरिया स्टेट) की छवि से बाहर निकालने के इरादे से सैफ अल-इस्लाम ने पश्चिमी देशों से संवाद बढ़ाया और खुद को एक सुधारक के रूप में पेश किया। उन्होंने संविधान, मानवाधिकारों के सम्मान और सुधारों की बात की।
लंदन स्कूल ऑफ इकोनॉमिक्स से शिक्षित और धाराप्रवाह अंग्रेज़ी बोलने वाले सैफ अल-इस्लाम को एक समय कई पश्चिमी सरकारें लीबिया का स्वीकार्य और पश्चिम-समर्थक चेहरा” मानती थीं।

लेकिन 2011 में जब उनके पिता के लंबे शासन के खिलाफ विद्रोह भड़का, तो सैफ अल-इस्लाम ने अपने पश्चिमी संपर्कों को दरकिनार करते हुए परिवार और कबीलाई निष्ठा को चुना। वह विद्रोहियों के खिलाफ क्रूर दमन अभियान के प्रमुख योजनाकारों में शामिल हो गए और विद्रोहियों को “चूहे” तक कह डाला। उस समय उन्होंने कहा था, “हम लीबिया में ही लड़ेंगे और लीबिया में ही मरेंगे।”

गिरफ्तारी, कैद और मौत की सजा

जब विद्रोहियों ने राजधानी त्रिपोली पर कब्जा कर लिया, तो सैफ अल-इस्लाम ने बेदुईन जनजाति के सदस्य के वेश में पड़ोसी देश नाइजर भागने की कोशिश की। लेकिन उनके पिता की हत्या के करीब एक महीने बाद, अबू बक्र सादिक ब्रिगेड नामक मिलिशिया ने उन्हें रेगिस्तानी सड़क पर पकड़ लिया और पश्चिमी शहर जिंतान ले गई।

इसके बाद उन्होंने छह साल जिंतान में हिरासत में बिताए। यह जीवन उनके उस शाही अतीत से बिल्कुल अलग था, जब वह पालतू बाघ रखते थे, बाज़ से शिकार करते थे और लंदन यात्राओं के दौरान ब्रिटेन के हाई सोसाइटी में उठना-बैठना रखते थे।

ह्यूमन राइट्स वॉच ने जिंतान में उनसे मुलाकात की थी। उस समय उनके एक दांत गायब था और उन्होंने बताया था कि उन्हें दुनिया से अलग-थलग रखा गया है और उनसे मिलने कोई नहीं आता।

साल 2015 में त्रिपोली की एक अदालत ने उन्हें युद्ध अपराधों के मामले में फायरिंग स्क्वाड से मौत की सजा सुनाई।

राजनीति में वापसी की कोशिश और विवाद

2017 में एक माफी कानून के तहत मिलिशिया द्वारा रिहा किए जाने के बाद, सैफ अल-इस्लाम वर्षों तक हत्या के डर से भूमिगत रहे। साल 2021 में उन्होंने पारंपरिक लीबियाई चोगा और पगड़ी पहनकर दक्षिणी शहर सभा (Sabha) में राष्ट्रपति चुनाव के लिए नामांकन दाखिल कर राजनीतिक वापसी की कोशिश की।

उनसे उम्मीद की जा रही थी कि वह 2011 के नाटो समर्थित विद्रोह से पहले की सापेक्ष स्थिरता की यादों को भुनाने की कोशिश करेंगे, लेकिन उनकी उम्मीदवारी बेहद विवादास्पद रही। उनके पिता के शासन में पीड़ित रहे कई लोगों ने इसका कड़ा विरोध किया। 2011 के विद्रोह से उभरे शक्तिशाली सशस्त्र गुटों ने उनकी उम्मीदवारी को सिरे से खारिज कर दिया।

2021 के अंत में जब चुनाव प्रक्रिया नियमों पर सहमति न बनने के कारण उलझती चली गई, तो सैफ अल-इस्लाम की उम्मीदवारी सबसे बड़े विवादों में से एक बन गई। 2015 की सजा के चलते उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया गया। जब उन्होंने इस फैसले के खिलाफ अपील करने की कोशिश की, तो हथियारबंद लड़ाकों ने अदालत का रास्ता ही बंद कर दिया।

इन घटनाओं और टकरावों ने अंततः चुनाव प्रक्रिया को पटरी से उतार दिया और लीबिया एक बार फिर राजनीतिक गतिरोध और अस्थिरता में फंस गया।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।