वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने 48 वर्षों बाद वकालत छोड़ी और बोले, "अब बहुत हो गया, दूसरों के लिए रास्ता छोड़ना बेहतर.."
प्रसिद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने रविवार को अचानक घोषणा करते हुए कानूनी पेशे से संन्यास ले लिया। उन्होंने यह फैसला बार में अपने 48 वर्षों और अपने 70वें जन्मदिन के..
नयी दिल्ली। प्रसिद्ध वरिष्ठ अधिवक्ता दुष्यंत दवे ने रविवार को अचानक घोषणा करते हुए कानूनी पेशे से संन्यास ले लिया। उन्होंने यह फैसला बार में अपने 48 वर्षों और अपने 70वें जन्मदिन के तुरंत बाद लिया।
उन्होंने एक व्हाट्सएप संदेश के माध्यम से कहा, "बार में 48 शानदार वर्ष बिताने के बाद और हाल ही में 70वां सुंदर जन्मदिन मनाने के बाद, मैंने कानून के पेशे को छोड़ने का निर्णय लिया है।"
गुजरात से सुप्रीम कोर्ट तक का सफर
दवे ने 1978 में गुजरात से वकालत की शुरुआत की थी और 1980 के दशक के मध्य में दिल्ली आकर सुप्रीम कोर्ट में प्रैक्टिस शुरू की।
1998 में उन्हें सुप्रीम कोर्ट द्वारा वरिष्ठ अधिवक्ता (Senior Advocate) के रूप में नामित किया गया।
उन्होंने कहा, "मैंने वकालत की शुरुआत सिर्फ 250 रुपये प्रति माह से की थी। मेरा पहला निवास एक हाईकोर्ट के प्यून के साथ साझा किया गया था। अब लगता है कि काफी कुछ कर लिया है, और अब शिखर पर रहते हुए विदा लेना बेहतर है। मैं नहीं चाहता था कि 75 या 80 की उम्र में जब सुनाई ठीक से न दे, आंखें कमजोर हों और टांगें साथ न दें, तब मैं कोर्ट में खड़ा रहूं।"
तीन बार बार एसोसिएशन के अध्यक्ष
दवे तीन बार सुप्रीम कोर्ट बार एसोसिएशन के अध्यक्ष रह चुके हैं। उनके पिता न्यायमूर्ति अरविंद दवे, गुजरात हाईकोर्ट के न्यायाधीश थे।
अब समाज सेवा और परिवार को देंगे समय
उन्होंने कहा कि अब वे अपने जीवन के बचे हुए हिस्से को ग्रामीण लोगों की मदद, कृषि, शिक्षा, आवास, पढ़ाई, संगीत, गोल्फ, घूमने, और परिवार, खासकर अपने चार पोते-पोतियों के साथ बिताना चाहते हैं। दवे ने कहा, "पढ़ना मेरा बड़ा जुनून है, संगीत, गोल्फ और यात्रा भी। लेकिन सबसे जरूरी अब परिवार के साथ समय बिताना है।"
"अब नई पीढ़ी को जगह देनी चाहिए"
उन्होंने कहा कि इस फैसले में कोई उलझन नहीं थी। उन्होंने कहा,"जब आपको लगने लगे कि आपने पेशे में बहुत कुछ कर लिया है और अब देने के लिए कुछ नया नहीं बचा है, तो यह निर्णय लेना आसान हो जाता है।"
उन्होंने बताया कि उन्होंने लगभग 500 मुकदमे मुफ्त (pro bono) में लड़े और सभी वर्गों के लोगों की मदद की। दवे ने कहा, "अब एक नई पीढ़ी आ चुकी है। युवा सीनियर वकील काफी सक्षम हैं और मुझे यकीन है कि वे आगे भी लड़ाई जारी रखेंगे और ज़रूरतमंदों की मदद करेंगे।"
परिवार ने उन्हें सलाह दी कि वे 50 साल पूरे कर लें लेकिन उन्होंने कहा, "मैं कभी मील के पत्थर नहीं गिनता।"
अब न वकालत, न सलाह, न मध्यस्थता
दवे ने स्पष्ट किया कि वे अब न तो कोर्ट में पेश होंगे, न ही कोई कानूनी परामर्श (advisory work) देंगे और न ही मध्यस्थता (arbitration) का हिस्सा बनेंगे।
हालाँकि वे आगे अखबारों में लेख लिखना, कॉलेजों में पढ़ाना या किताब लिखना ज़रूर चाहेंगे।
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