गुडिपल्ली सिद्धार्थ रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद किया सरेंडर, प्रत्युषा मौत मामले में नया मोड़

प्रत्युषा की मौत से जुड़े बहुचर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सजा बरकरार रखने के लगभग एक महीने बाद आरोपी गुडिपल्ली सिद्धार्थ रेड्डी ने सोमवार को नामपल्ली कोर्ट में आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर..

गुडिपल्ली सिद्धार्थ रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद किया सरेंडर, प्रत्युषा मौत मामले में नया मोड़
18-03-2026 - 12:48 PM
22-04-2026 - 05:53 PM

हैदराबाद। प्रत्युषा की मौत से जुड़े बहुचर्चित मामले में सुप्रीम कोर्ट द्वारा सजा बरकरार रखने के लगभग एक महीने बाद आरोपी गुडिपल्ली सिद्धार्थ रेड्डी ने सोमवार को नामपल्ली कोर्ट में आत्मसमर्पण (सरेंडर) कर दिया।

2002 का मामला

यह मामला साल 2002 का है, जब प्रत्युषा और सिद्धार्थ रेड्डी रिश्ते में थे और शादी करने की योजना बना रहे थे। जांच के अनुसार, जहां अभिनेत्री की मां इस रिश्ते के पक्ष में थीं, वहीं सिद्धार्थ की मां इसका विरोध कर रही थीं।

इस विरोध के बाद दोनों ने कथित तौर पर आत्महत्या करने के इरादे से जहर खा लिया। अस्पताल में प्रत्युषा को मृत घोषित कर दिया गया, जबकि सिद्धार्थ रेड्डी इलाज के बाद बच गए।

CBI जांच और सजा

बाद में इस मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो को सौंप दी गई। CBI ने सिद्धार्थ रेड्डी पर आत्महत्या के लिए उकसाने (abetment of suicide) का आरोप लगाया। ट्रायल कोर्ट ने उन्हें दोषी ठहराते हुए 5 साल की सजा सुनाई थी।

हाई कोर्ट ने घटाई सजा

साल 2011 में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने सजा को घटाकर 2 साल कर दिया और 50,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया।

सुप्रीम कोर्ट का रुख

इसके बाद दोनों पक्ष सुप्रीम कोर्ट पहुंचे।

  • सिद्धार्थ रेड्डी ने बरी करने की मांग की
  • वहीं प्रत्युषा की मां ने सख्त सजा की मांग की

उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी बेटी के साथ दुष्कर्म और हत्या हुई थी, जिसमें प्रभावशाली लोगों का हाथ था।

हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने निचली अदालतों के तथ्यों को दोबारा खोलने से इनकार कर दिया और कहा कि इतने लंबे समय बाद बिना ठोस नए सबूत के मामले की फिर से जांच का कोई आधार नहीं है।

4 हफ्ते में सरेंडर का आदेश

सुप्रीम कोर्ट ने 17 फरवरी को सिद्धार्थ रेड्डी को 4 हफ्तों के भीतर सरेंडर करने का निर्देश दिया था, जिसके बाद उन्होंने अब अदालत में आत्मसमर्पण किया।

पहले भी हो चुकी थी गिरफ्तारी

मामले के रिकॉर्ड के अनुसार, सिद्धार्थ रेड्डी को 8 मार्च 2002 को गिरफ्तार किया गया था और वे 28 जून 2002 तक न्यायिक हिरासत में रहे। बाद में आंध्र प्रदेश हाई कोर्ट ने उन्हें जमानत दे दी थी।

मामला अभी भी चर्चा में

यह मामला लंबे समय से विवादों में रहा है और एक बार फिर सिद्धार्थ रेड्डी के सरेंडर के बाद सुर्खियों में आ गया है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।