बांग्लादेश सेना में बड़ा फेरबदल: नए आर्मी चीफ की नियुक्ति, भारत-स्थित रक्षा सलाहकार की वापसी
बांग्लादेश सेना ने अपने शीर्ष नेतृत्व में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सेना में चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (CGS) की नई नियुक्ति की गई है और इसके साथ ही संचालन व खुफिया से जुड़े कई अहम पदों पर बदलाव किए..
बांग्लादेश सेना ने अपने शीर्ष नेतृत्व में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल किया है। स्थानीय मीडिया रिपोर्टों के अनुसार, सेना में चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (CGS) की नई नियुक्ति की गई है और इसके साथ ही संचालन व खुफिया से जुड़े कई अहम पदों पर बदलाव किए गए हैं।
यह फैसला सेना मुख्यालय द्वारा औपचारिक रूप से लागू किया गया है और यह ऐसे समय पर आया है जब प्रधानमंत्री तारिक़ रहमान की सरकार ने 17 फरवरी को कार्यभार संभाला है। 12 फरवरी को हुए आम चुनावों में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने दो-तिहाई बहुमत हासिल किया, जिससे मुहम्मद यूनुस के 18 महीनों के कार्यकाल का अंत हो गया।
लेफ्टिनेंट जनरल एम. मैनूर रहमान को नया चीफ ऑफ जनरल स्टाफ (CGS) नियुक्त किया गया है। इससे पहले वे आर्मी ट्रेनिंग एंड डॉक्ट्रिन कमांड (ARTDOC) के जनरल ऑफिसर कमांडिंग (GOC) के रूप में सेवाएं दे चुके हैं। यह जानकारी अख़बार प्रथम आलो ने रक्षा मंत्रालय के सूत्रों के हवाले से दी है।
एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव के तहत लेफ्टिनेंट जनरल एस. एम. कमरुल हसन को प्रिंसिपल स्टाफ ऑफिसर (PSO) के पद से हटाकर नव-पदोन्नत लेफ्टिनेंट जनरल मीर मुश्फिकुर रहमान को यह जिम्मेदारी सौंपी गई है। कमरुल हसन को विदेश मंत्रालय से संबद्ध किया गया है और उन्हें राजदूत के रूप में विदेश में तैनात किए जाने की संभावना है।
सैन्य खुफिया तंत्र में भी बड़ा बदलाव किया गया है। मेजर जनरल कैसर राशिद चौधरी को डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फोर्सेज इंटेलिजेंस (DGFI) का नया महानिदेशक नियुक्त किया गया है। वर्तमान में वे सेना मुख्यालय में ब्रिगेडियर जनरल के पद पर हैं और मेजर जनरल के रूप में पदोन्नति के बाद औपचारिक रूप से यह जिम्मेदारी संभालेंगे।
इसके अलावा, भारत स्थित बांग्लादेश उच्चायोग में रक्षा सलाहकार के रूप में कार्यरत ब्रिगेडियर जनरल एमडी हाफिजुर रहमान को वापस बुला लिया गया है। अब वे मेजर जनरल के पद के साथ एक इन्फैंट्री डिवीजन के GOC का कार्यभार संभालेंगे।
यह फेरबदल बांग्लादेश सेना की कई रणनीतिक कमानों और देश की प्रमुख सैन्य खुफिया एजेंसी को प्रभावित करता है, जिससे आने वाले समय में सैन्य और सुरक्षा नीतियों में बदलाव की संभावना जताई जा रही है।
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