सार्क निष्क्रिय, भारत को घेरने के लिए पाकिस्तान के साथ मिलकर नया क्षेत्रीय गुट बना रहा है चीन
चीन और पाकिस्तान एक नए क्षेत्रीय संगठन की स्थापना के लिए उन्नत स्तर की बातचीत कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य लंबे समय से निष्क्रिय दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (सार्क) को प्रतिस्थापित करना है। राजनयिकों और विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य को नया आकार देने ...
नयी दिल्ली। चीन और पाकिस्तान एक नए क्षेत्रीय संगठन की स्थापना के लिए उन्नत स्तर की बातचीत कर रहे हैं, जिसका उद्देश्य लंबे समय से निष्क्रिय दक्षिण एशियाई क्षेत्रीय सहयोग संघ (सार्क) को प्रतिस्थापित करना है। राजनयिकों और विश्लेषकों का मानना है कि यह पहल दक्षिण एशिया के भू-राजनीतिक परिदृश्य को नया आकार देने और क्षेत्र में भारत की केंद्रीय भूमिका को कम करने की रणनीतिक कोशिश है।
पाकिस्तान के अखबार 'एक्सप्रेस ट्रिब्यून' की एक रिपोर्ट के अनुसार, बीते कुछ महीनों में बीजिंग और इस्लामाबाद के बीच इस प्रस्ताव पर बातचीत में महत्वपूर्ण प्रगति हुई है। दोनों देशों का मानना है कि क्षेत्रीय एकीकरण, संपर्क और व्यापार को बढ़ावा देने के लिए एक नए मंच की आवश्यकता है, क्योंकि भारत-पाकिस्तान टकराव के चलते सार्क पूरी तरह से ठप पड़ा हुआ है।
क्या है यह प्रस्ताव?
एक्सप्रेस ट्रिब्यून ने सूत्रों के हवाले से बताया कि इस प्रस्ताव का मकसद एक वैकल्पिक क्षेत्रीय संगठन बनाना है, जिसमें सार्क के पूर्व सदस्य जैसे बांग्लादेश, श्रीलंका, मालदीव, नेपाल, भूटान और अफगानिस्तान को शामिल किया जाएगा, लेकिन इस बार नेतृत्व की भूमिका चीन निभाएगा और भारत को हाशिए पर धकेल दिया जाएगा।
हाल ही में चीन, पाकिस्तान और बांग्लादेश के बीच कुनमिंग में एक त्रिपक्षीय बैठक हुई, जिसे इस पहल की कूटनीतिक नींव माना जा रहा है। हालांकि बांग्लादेश ने सार्वजनिक रूप से किसी गठबंधन के बनने से इनकार किया और बैठक को “गैर-राजनीतिक” करार दिया, लेकिन नई दिल्ली और अन्य सार्क देशों में यह कदम संदेह का विषय बन गया है।
बांग्लादेश के विदेश मामलों के सलाहकार एम तौहीद हुसैन ने बैठक के बाद कहा, "हम कोई गठबंधन नहीं बना रहे हैं," लेकिन अखबार द्वारा उद्धृत कूटनीतिक सूत्रों की राय इससे अलग है।
इस प्रस्तावित गुट का उद्देश्य क्षेत्रीय व्यापार गलियारों, अवसंरचना संपर्क और आर्थिक सहयोग को बेहतर बनाना होगा — ये सभी विषय चीन की महत्वाकांक्षी बेल्ट ऐंड रोड इनिशिएटिव (BRI) से मेल खाते हैं, जिसमें पाकिस्तान चीन-पाकिस्तान आर्थिक गलियारे (CPEC) के माध्यम से प्रमुख भागीदार है।
अब क्यों उठाया गया यह कदम?
सार्क की स्थापना 1985 में हुई थी, लेकिन यह 2014 से लगभग निष्क्रिय पड़ा है। उस वर्ष काठमांडू में आखिरी शिखर सम्मेलन हुआ था। 2016 में इस्लामाबाद में प्रस्तावित शिखर सम्मेलन को भारत ने उरी हमले के बाद रद्द कर दिया था, जिसमें पाकिस्तान-आधारित आतंकवादियों को दोषी ठहराया गया था। इसके बाद बांग्लादेश, भूटान और अफगानिस्तान ने भी “वर्तमान परिस्थितियों” का हवाला देते हुए सम्मेलन में हिस्सा लेने से इनकार कर दिया, जिससे वह अधूरा रह गया।
तब से सार्क की प्रासंगिकता तेजी से घटी है। भारत ने अपनी पूर्वी पड़ोसी देशों से जुड़ाव के लिए बिम्सटेक (BIMSTEC) जैसे मंचों की ओर रुख किया है, जिसमें पाकिस्तान शामिल नहीं है। वहीं दूसरी ओर, चीन और पाकिस्तान ने भारत के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने के लिए द्विपक्षीय और बहुपक्षीय सहयोग को मजबूत किया है, खासकर इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की सक्रियता और क्वाड (Quad) जैसे समूहों में भूमिका को देखते हुए।
क्या भारत को आमंत्रित किया जाएगा?
एक्सप्रेस ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत को नए गुट में शामिल होने का औपचारिक निमंत्रण दिया जा सकता है। लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि यह महज एक कूटनीतिक औपचारिकता होगी, जिसका वास्तविक भागीदारी में तब्दील होना मुश्किल है, क्योंकि यह मंच मुख्य रूप से चीन और पाकिस्तान के रणनीतिक हितों से संचालित होगा।
श्रीलंका, मालदीव और अफगानिस्तान जैसे देशों के इस गुट में शामिल होने की संभावना ज्यादा मानी जा रही है, खासकर अगर उन्हें आर्थिक प्रोत्साहन या अवसंरचना सहायता मिलती है।
हालांकि अभी तक इस पहल की आधिकारिक घोषणा नहीं हुई है, लेकिन भारतीय अधिकारी इसे भारत के प्रभाव का मुकाबला करने के लिए चीन की अगुवाई में बनाए जा रहे एक नए शक्ति-गठजोड़ के रूप में देख सकते हैं — जो सार्क की उस मूल भावना के उलट है, जिसमें भारत की प्रमुख भूमिका थी।
दक्षिण एशियाई भू-राजनीति में नया मोड़
यह कदम ऐसे समय पर सामने आया है जब भारत इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में अपने रणनीतिक साझेदारी को बढ़ा रहा है और सीमा पर चीन के आक्रामक रुख का विरोध कर रहा है। ऐसे में यह नया प्रस्ताव दक्षिण एशिया की राजनीति को और जटिल बना सकता है।
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