छत्तीसगढ़ मुठभेड़ में टॉप माओवादी नेता बसवराजु समेत 27 नक्सली ढेर
भारत के सबसे खतरनाक और वांछित माओवादियों में से एक, सीपीआई (माओवादी) प्रमुख नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजु को बुधवार को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में सुरक्षा बलों ने एक खुफिया-आधारित ऑपरेशन में मार गिराया..
नयी दिल्ली/रायपुर। भारत के सबसे खतरनाक और वांछित माओवादियों में से एक, सीपीआई (माओवादी) प्रमुख नंबाला केशव राव उर्फ बसवराजु को बुधवार को छत्तीसगढ़ के नारायणपुर जिले में सुरक्षा बलों ने एक खुफिया-आधारित ऑपरेशन में मार गिराया। इस ऑपरेशन को जिला रिजर्व गार्ड (DRG) ने अंजाम दिया। मुठभेड़ में बसवराजु सहित कुल 27 माओवादी मारे गए, जबकि DRG का एक जवान शहीद हुआ।
ऑपरेशन की प्रमुख बातें
- मुठभेड़ बोटेर गांव और लेकावाड़ा के जंगलों में हुई।
- सुरक्षा बलों ने भारी मात्रा में आधुनिक हथियार और विस्फोटक बरामद किए हैं।
- बसवराजु के शव के पास से एक AK-47 बरामद हुई, जो उसके 'ऑपरेशनल' कमांडर होने का प्रमाण है।
कौन था बसवराजु?
- 70 वर्षीय बसवराजु सीपीआई (माओवादी) का संस्थापक सदस्य था, जिसका गठन 2004 में पीपुल्स वार ग्रुप (PWG) और एमसीसी के विलय से हुआ था।
- वह संगठन की पोलित ब्यूरो, केंद्रीय समिति और सैन्य आयोग का हिस्सा था।
- एक प्रशिक्षित इंजीनियर और REC (अब NIT) वारंगल का छात्र रह चुका था।
- उस पर 10 करोड़ रुपये से अधिक का इनाम घोषित था, जो NIA और विभिन्न राज्य सरकारों द्वारा घोषित किया गया था।
बसवराजु की मौत का महत्व
केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने पुष्टि करते हुए कहा कि बसवराजु "नक्सल आंदोलन की रीढ़" था। उन्होंने इसे पिछले 25 वर्षों में माओवादियों पर सबसे बड़ी जीत करार दिया। शाह ने यह भी दोहराया कि मोदी सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद खत्म करने का संकल्प लिया है।
- शाह ने बताया कि हाल ही में 21 दिवसीय ऑपरेशन ब्लैक फॉरेस्ट (11 मई को पूर्ण) के तहत 54 नक्सलियों को गिरफ्तार किया गया और 84 ने आत्मसमर्पण किया है।
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी इस "महान सफलता" के लिए सुरक्षाबलों को बधाई दी और कहा,
"हमारी सरकार माओवाद के खतरे को खत्म कर लोगों को शांति और प्रगति से भरा जीवन देने के लिए प्रतिबद्ध है।"
ऑपरेशन की रणनीति:
- ऑपरेशन 72 घंटे तक चला, जिसकी 15 दिनों तक योजना बनाई गई थी।
- आंध्र प्रदेश पुलिस और आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व नक्सलियों से मिली खुफिया जानकारी के आधार पर बसवराजु की लोकेशन अबूझमाड़ के ओरछा क्षेत्र में चिन्हित की गई थी।
- DRG की टीमें नारायणपुर, दंतेवाड़ा, बीजापुर और कोंडागांव से रवाना हुईं और जंगल में मुठभेड़ शुरू हुई।
- सुरक्षा बलों ने कई अन्य वरिष्ठ माओवादी नेताओं को भी मार गिराया या गंभीर रूप से घायल किया, जिनकी पहचान लौटने के बाद होगी।
DRG की भूमिका
- DRG में अधिकतर सदस्य आत्मसमर्पण कर चुके पूर्व नक्सली हैं, जिन्हें अबूझमाड़ के दुर्गम इलाकों और माओवादियों की रणनीति की गहरी समझ है।
- छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने ऑपरेशन की सफलता पर कहा, "अब और आत्मसमर्पण होने तय हैं।"
बसवराजु की मौत माओवादी आंदोलन के लिए सबसे बड़ा झटका माना जा रहा है। एक ऐसा नेता जो दशकों तक भारत में हिंसक नक्सली गतिविधियों का संचालन करता रहा, अब खत्म हो गया है। यह ऑपरेशन
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