‘भारत ने किसके आगे आत्मसमर्पण किया?’: गौरव गोगोई ने विपक्ष की ओर से किया सरकार पर प्रहार
लोकसभा में सोमवार को ऑपरेशन सिंदूर पर हुई बहस के दौरान विपक्ष ने, पहलगाम आतंकी हमले में सुरक्षा चूक, सभी हमलावरों का पकड़ा न जाना, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाक के बीच शांति स्थापित करने के दावे ..
नयी दिल्ली। लोकसभा में सोमवार को ऑपरेशन सिंदूर पर हुई बहस के दौरान विपक्ष ने, पहलगाम आतंकी हमले में सुरक्षा चूक, सभी हमलावरों का पकड़ा न जाना, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के भारत-पाक के बीच शांति स्थापित करने के दावे और वायुसेना द्वारा झेले गए कथित नुकसान जैसे कई गंभीर सवाल खड़े किए
विपक्ष की ओर से बहस की शुरुआत करते हुए कांग्रेस के लोकसभा में उपनेता गौरव गोगोई ने कहा कि केंद्र सरकार ने महत्वपूर्ण जानकारियाँ छिपाईं और पूछा कि आखिर 22 अप्रैल को आतंकियों ने हमला कैसे किया।
गोगोई ने कहा, “यह सूचना की लड़ाई है। (रक्षा मंत्री) राजनाथ सिंह ने कई विवरण दिए, लेकिन यह नहीं बता सके कि पाँच आतंकवादी पहलगाम तक कैसे पहुँचे। 26 निर्दोष लोग मारे गए और हमें आज भी नहीं पता कि उन्हें किसने मदद की या वे कैसे भागे… आपके पास पेगासस है, सैटेलाइट हैं, सीआरपीएफ, बीएसएफ, सीआईएसएफ हैं, फिर 100 दिन बाद भी कोई जवाब नहीं?”
उन्होंने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह को इस नरसंहार की "नैतिक जिम्मेदारी" लेनी चाहिए। “आप जम्मू-कश्मीर के एल-जी के पीछे नहीं छिप सकते। और इस सरकार ने, चूक मानने के बजाय, टूर ऑपरेटरों को दोषी ठहरा दिया!”
गोगोई ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की भी आलोचना की कि उन्होंने सऊदी अरब यात्रा को बीच में छोड़ने और वापस लौटने के बाद भी पहलगाम का दौरा नहीं किया, जबकि राहुल गांधी वहाँ पहुँचे। उन्होंने कहा, “हमारे नेता वहाँ गए। वह मारे गए लोगों को शहीद का दर्जा दिलाने की माँग कर रहे हैं।”
उन्होंने सरकार के उस दावे पर भी सवाल उठाया कि पाकिस्तान के भीतर आतंकवादी ढांचे को ध्वस्त कर दिया गया है। उन्होंने कहा, “हर आतंकी हमले के बाद आप यही दावा करते हैं चाहे 2016 का उरी हमला हो, 2019 का पुलवामा हमला हो, या अब। अगर ऑपरेशन सिंदूर अभी अधूरा है, तो आप इसे सफलता कैसे कह सकते हैं?”
गोगोई ने आरोप लगाया कि 10 मई को युद्धविराम की घोषणा कर भारत ने उस मौके को गवां दिया, जिससे क्षेत्रीय बढ़त मिल सकती थी। उन्होंने कहा, “आप कहते हैं कि युद्ध या भू-क्षेत्रीय लाभ हमारा उद्देश्य नहीं था। क्यों नहीं था? हम कब पीओके (पाक अधिकृत कश्मीर) लेंगे? अगर पाकिस्तान घुटनों पर था, तो आपने क्यों रोका? आपने किसके सामने आत्मसमर्पण किया?”
उन्होंने सेना के उप प्रमुख लेफ्टिनेंट जनरल राहुल आर सिंह के बयान का हवाला देते हुए कहा कि चीन ने इस संघर्ष के दौरान पाकिस्तान का समर्थन किया। “राजनाथ सिंह ने चीन का नाम तक क्यों नहीं लिया?” उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि सरकार ने 21 लक्ष्यों में से सिर्फ 9 पर हमले की मंजूरी दी और इसके पीछे राजनीतिक दबाव थे।
गोगोई ने पूछा, “अगर भारत ने राफेल विमान खोए हैं, तो यह गंभीर मामला है। ट्रंप ने दावा किया है कि पाँच या छह विमान गिर गए। हमने कितने खोए?”
समाजवादी पार्टी के सांसद रामाशंकर राजभर ने कहा कि सरकार सीमा प्रबंधन में असफल रही है। उन्होंने कहा, “आकाश बाँधो, पाताल बाँधो, लेकिन अपनी तिजोरी तो बाँधो। अगर सीमा सील होती तो आतंकी अंदर नहीं आते।”
राजभर ने कहा कि सरकार की प्रतिक्रिया भी कमजोर रही। “देश को हमले के तीन दिन के भीतर ऑपरेशन तंदूर (आतंकी अड्डों का विनाश) चाहिए था, ना कि 17 दिन बाद ऑपरेशन सिंदूर।”
उन्होंने ट्रंप के दावों का जिक्र करते हुए कहा, “हमें गर्व था कि हमारे प्रधानमंत्री विश्वगुरु हैं। लेकिन अब लग रहा है कि विश्वगुरु अमेरिका में बैठे हैं।”
तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी ने कहा: “ऑपरेशन सिंदूर का श्रेय सिर्फ हमारे सैनिकों को जाता है। यह हैरानी की बात है कि चार आतंकी आए और 26 लोगों को मार डाला। बीएसएफ और सीआईएसएफ क्या कर रही थीं? गृह मंत्री क्या कर रहे थे?”
मोदी की ट्रंप के दावों पर “चुप्पी” पर सवाल उठाते हुए बनर्जी ने पूछा, “आप अमेरिकी राष्ट्रपति से इतने डरे हुए क्यों हैं?”
उन्होंने सरकार से यह भी पूछा कि “पीओके कब लिया जाएगा?”
शिवसेना (उद्धव ठाकरे गुट) के सांसद अरविंद सावंत ने कहा कि पहलगाम आतंकी हमले में सुरक्षा चूक की जांच होनी चाहिए। उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पूर्व राज्यपाल सत्यपाल मलिक के दावे का हवाला दिया कि सैनिकों के लिए फ्लाइट की माँग को नजरअंदाज किया गया, जिसके कारण 2019 में पुलवामा में 40 सीआरपीएफ जवानों की जान गई।
उन्होंने पूछा कि प्रधानमंत्री ने अब तक पहलगाम का दौरा क्यों नहीं किया, जैसा कि उन्होंने 2023 से मणिपुर संकट के दौरान भी नहीं किया।
सावंत ने सवाल किया, “अगर पाकिस्तान की संलिप्तता साफ है, तो भी कोई देश भारत के साथ क्यों नहीं खड़ा है? हम IMF से कहते रहे कि पाकिस्तान को फंड मत दो, क्योंकि वह आतंक पर खर्च करेगा फिर भी उसे पैसे मिल गए?” उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के साथ कोई भी क्रिकेट मैच रद्द किया जाना चाहिए।
कांग्रेस सांसद दीपेन्दर सिंह हुड्डा ने कहा कि युद्धविराम की समयबद्धता और कारणों पर सवाल हैं। “अगर पाकिस्तान घुटनों पर था, तो आपने रोक क्यों लगाई? किसने युद्धविराम कराया और किन शर्तों पर?” उन्होंने पूछा।
हुड्डा ने यह भी कहा कि केवल आतंक शिविरों को निशाना बनाना और सैन्य ठिकानों को छोड़ देना एक “रणनीतिक भूल” थी। “इससे तो पाकिस्तान की सेना को क्लीन चिट मिल गई।” उन्होंने यह भी पूछा कि अगर भारत की विदेश नीति इतनी मजबूत है, तो सरकार को दुनियाभर में समर्थन जुटाने के लिए सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल क्यों भेजना पड़ा?
कांग्रेस सांसद प्रणीति सुशीलकुमार शिंदे ने कहा कि आतंकवाद और चुनावों के बीच कुछ संबंध दिखता है। उन्होंने रोम के कोलोसियम का जिक्र किया, जिसे आम जनता को खेल और मनोरंजन में व्यस्त रखने के लिए बनाया गया था ताकि वे असली मुद्दों से भटक जाएं। उन्होंने आरोप लगाया, “हर बार चुनाव से पहले आतंकी हमला होता है, फिर सरकार की ओर से जवाबी कार्रवाई। न सरकार को पता होता है कि आतंकी कहाँ से आए, न कहाँ गए — लेकिन हम पड़ोसी देश पर हमला करना चाहते हैं और उसका राजनीतिक फायदा उठाते हैं।”
एनसीपी (शरद पवार गुट) की सांसद सुप्रिया सुले ने कहा: “जब तक आतंकियों को पकड़ा नहीं जाएगा, तब तक न्याय नहीं होगा। हम जश्न नहीं मना सकते।” उन्होंने कहा कि अमित शाह को एक मजबूत गृह मंत्री के रूप में देखा जाता है, इसलिए लोगों की उनसे उम्मीदें हैं।
उन्होंने सुझाव दिया कि जैसे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार ने करगिल युद्ध के बाद एक समिति गठित की थी, वैसे ही मोदी सरकार को भी ऑपरेशन सिंदूर पर एक रिपोर्ट तैयार कर उसे संसद में पेश करना चाहिए।
राजद सांसद अभय कुमार सिन्हा ने स्थानीय पुलिस की भूमिका पर सवाल उठाया: “क्या सरकार ने जाँच की कि हमले के वक्त पहलगाम में पुलिस सुरक्षा क्यों नहीं थी, और इसके लिए कौन जिम्मेदार था?”
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