13 वर्षीय तेजस्वी कुमारी ने रचा इतिहास, राजस्थान के पूर्व राजघराने की पहली महिला उत्तराधिकारी बनीं

राजस्थान के पाली जिले में सदियों पुरानी परंपरा को नया आयाम देते हुए 13 वर्षीय बालिका को पूर्व राजघराने की औपचारिक उत्तराधिकारी घोषित किया गया है। यह पहली बार है जब परंपरागत रूप से केवल पुरुषों के लिए आरक्षित उत्तराधिकार की इस प्रथा में किसी लड़की को वारिस बनाया..

13 वर्षीय तेजस्वी कुमारी ने रचा इतिहास, राजस्थान के पूर्व राजघराने की पहली महिला उत्तराधिकारी बनीं
29-06-2026 - 09:23 AM

राजस्थान के पाली जिले में सदियों पुरानी परंपरा को नया आयाम देते हुए 13 वर्षीय बालिका को पूर्व राजघराने की औपचारिक उत्तराधिकारी घोषित किया गया है। यह पहली बार है जब परंपरागत रूप से केवल पुरुषों के लिए आरक्षित उत्तराधिकार की इस प्रथा में किसी लड़की को वारिस बनाया गया है। खेरवा गांव की तेजस्वी कुमारी जोधा को गुरुवार को पारंपरिक 'पाग का दस्तूर'  समारोह के तहत खेरवागढ़ राजवंश की उत्तराधिकारी के रूप में सम्मानित किया गया। यह सम्मान उन्हें उनके पिता हरीश चंद्र जोधा के निधन के बाद प्रदान किया गया।

यह ऐतिहासिक समारोह 17वीं शताब्दी में निर्मित माने जाने वाले ऐतिहासिक खेरवा किले में आयोजित हुआ, जिसमें सैकड़ों ग्रामीण शामिल हुए। क्षेत्र के इतिहास में यह पहला अवसर था जब इस पारंपरिक राजपूत उत्तराधिकार प्रथा के अंतर्गत किसी बेटी को औपचारिक रूप से उत्तराधिकारी के रूप में मान्यता दी गई।

 समारोह के दौरान वैदिक मंत्रोच्चार के बीच तेजस्वी कुमारी ने सभी धार्मिक अनुष्ठानों में भाग लिया। उनके सिर पर गुलाबी रंग की पारंपरिक पगड़ी बांधी गई, जो शोक की अवधि समाप्त होने और परिवार की जिम्मेदारियां संभालने का प्रतीक मानी जाती है। परंपरा के अनुसार यह पगड़ी जोधपुर-मारवाड़ के पूर्व राजघराने की ओर से भेजी गई थी।

समारोह के दौरान रीति-रिवाजों के अनुसार तेजस्वी के माथे पर तिलक भी लगाया गया। पाली जिले के उन इलाकों में, जो कभी जोधपुर रियासत का हिस्सा थे, 'पाग का दस्तूर' परिवार के मुखिया के निधन के बाद नेतृत्व और जिम्मेदारियों के हस्तांतरण का प्रतीक माना जाता है। हालांकि, अब तक यह परंपरा केवल पुरुष उत्तराधिकारियों तक ही सीमित रही थी।

समुदाय के बुजुर्गों ने बताया कि तेजस्वी को उत्तराधिकारी बनाने का निर्णय सामूहिक सहमति से लिया गया, क्योंकि उनके पिता का कोई पुत्र नहीं था। पुरुष उत्तराधिकारी के अभाव में पिछले लगभग 65 वर्षों से यह समारोह आयोजित नहीं किया गया था। ऐसे में तेजस्वी को उत्तराधिकारी घोषित किया जाना एक ऐतिहासिक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

स्थानीय लोगों ने इस निर्णय को प्रगतिशील बताते हुए कहा कि समाज ने परंपरा को बनाए रखते हुए उसे समय के अनुरूप समानता और महिला सशक्तिकरण के मूल्यों से जोड़ने का प्रयास किया है। सातवीं कक्षा में पढ़ने वाली तेजस्वी कुमारी ने कहा कि वह अपनी पढ़ाई जारी रखेंगी और साथ ही उन्हें सौंपी गई जिम्मेदारियों का भी पूरी निष्ठा से निर्वहन करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि वह अपने पिता के गांव के विकास संबंधी सपनों को साकार करने के लिए निरंतर प्रयास करेंगी।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।