वैभव सूर्यवंशी ने हाथ मिलाने की जगह छुए एमएस धोनी के पैर, सीएसके कप्तान की प्रतिक्रिया ने जीता दिल
मंगलवार को दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के मैच के बाद जब 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने एमएस धोनी से हाथ मिलाने की बजाय उनके पैर छुए, तो यह भाव पूरी दुनिया के सामने स्पष्ट हो गया। कुछ साल पहले यशस्वी जायसवाल जो अब भारतीय टेस्ट टीम में अपनी जगह बना चुके हैं और सूर्यवंशी के सीनियर हैं ने भी..
नयी दिल्ली। जब एमएस धोनी ने अपना पहला आईपीएल खिताब जीता था, उस वक्त वैभव सूर्यवंशी का जन्म भी नहीं हुआ था। दो साल बाद, बिहार के समस्तीपुर में उनका जन्म हुआ जो धोनी के गृह नगर रांची से ज्यादा दूर नहीं है। उस समय रांची और समस्तीपुर दोनों बिहार राज्य का हिस्सा थे।
हालाँकि, किसी को धोनी को आदर्श मानने के लिए एक ही राज्य से होना जरूरी नहीं है। वैभव सूर्यवंशी, भारत के लाखों उभरते क्रिकेटरों की तरह, धोनी की कहानियाँ सुनकर और उन्हें खेलते देख कर बड़े हुए हैं (या यूँ कहें कि अब भी हो रहे हैं)। यह कहना गलत नहीं होगा कि धोनी सूर्यवंशी के लिए किसी पिता समान हैं।
मंगलवार को दिल्ली के अरुण जेटली स्टेडियम में चेन्नई सुपर किंग्स और राजस्थान रॉयल्स के मैच के बाद जब 14 वर्षीय वैभव सूर्यवंशी ने एमएस धोनी से हाथ मिलाने की बजाय उनके पैर छुए, तो यह भाव पूरी दुनिया के सामने स्पष्ट हो गया। कुछ साल पहले यशस्वी जायसवाल — जो अब भारतीय टेस्ट टीम में अपनी जगह बना चुके हैं और सूर्यवंशी के सीनियर हैं — ने भी धोनी को इसी तरह सम्मान दिया था। मंगलवार को यह दृश्य सूर्यवंशी ने दोहराया।
राजस्थान रॉयल्स ने अपने खराब सीजन का अंत शानदार जीत के साथ किया, उन्होंने चेन्नई सुपर किंग्स को छह विकेट से हराया। मैच के बाद जब खिलाड़ी एक-दूसरे से हाथ मिला रहे थे, तब सूर्यवंशी की बारी आई तो उन्होंने धोनी के एक हाथ को पकड़ा और दूसरे हाथ से उनके पैर छू लिए। धोनी ने भी मुस्कुराते हुए सूर्यवंशी के हाथ को थामा और यह पल सोशल मीडिया पर आग की तरह फैल गया।
Vaibhav Suryavanshi touched MS Dhoni feet
Best moment of this IPL
pic.twitter.com/beItX8O5TK — Shah (@Iamshah0000) May 20, 2025
यह क्षण इसलिए भी खास था क्योंकि उसी मैच में सूर्यवंशी ने 57 रनों की शानदार और परिपक्व पारी खेली, जिसने राजस्थान की जीत की नींव रखी। इस सीजन में रॉयल्स के लिए एकमात्र सुखद खोज बने सूर्यवंशी ने 33 गेंदों में यह पारी खेली, जिससे 188 रनों का लक्ष्य आसानी से हासिल किया गया।
यशस्वी जायसवाल ने तेज 36 रन बनाकर पारी की शुरुआत को मजबूती दी, और सूर्यवंशी ने उसे आगे बढ़ाया। जायसवाल ने खलील अहमद के एक ओवर में ही 18 रन जड़ दिए, लेकिन जल्द ही अंशुल काम्बोज की गेंद पर बोल्ड हो गए।
सूर्यवंशी ने शुरुआत में संभल कर खेला, लेकिन जैसे ही गेंद उनके ज़ोन में आई, उन्होंने उसे बख्शा नहीं। यहां तक कि अनुभवी रविंद्र जडेजा भी उन्हें रोक नहीं सके। सूर्यवंशी ने जडेजा की गेंदों को दो बार छक्के के लिए स्टैंड में भेजा और अपना अर्धशतक नूर अहमद की गेंद पर चौथा छक्का लगाकर पूरा किया।
कप्तान संजू सैमसन (41) के साथ मिलकर उन्होंने दूसरे विकेट के लिए 98 रनों की मैच जीताऊ साझेदारी की। सैमसन इस साझेदारी में युवा खिलाड़ी को पूरी तरह आगे रहने दिया।
यह इस सीजन में राजस्थान की केवल चौथी जीत थी, जिससे वे अंकतालिका में अंतिम स्थान से ऊपर जा सकते हैं। सैमसन के आउट होने के बाद सूर्यवंशी और रियान पराग (3) भी जल्दी पवेलियन लौट गए और एक समय लगा कि राजस्थान फिर से मैच गंवा सकता है।
उस समय 26 गेंदों में 30 रन की जरूरत थी, लेकिन ध्रुव जुरेल (31) और शिमरोन हेटमायर (12) ने टीम को जीत दिलाई।
इससे पहले, चेन्नई के युवा खिलाड़ी आयुष म्हात्रे ने 20 गेंदों में 43 रन बनाकर फिर यह साबित किया कि वह भविष्य के सितारे हैं। उनकी पारी की बदौलत सीएसके किसी तरह 187/8 के स्कोर तक पहुंच सकी।
What's Your Reaction?