'अगर हिंदी भाषी राज्यों को दो-तिहाई बहुमत मिल जाए तो क्या होगा?': शशि थरूर की सीमांकन पर चिंता
कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोमवार को आगामी सीमांकन (Delimitation) प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंता जताई और चेतावनी दी कि यह भारत के लोकतंत्र, राष्ट्रीय एकता और संघवाद (Federalism) पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने कहा, “जब 2026 या उसके बाद जनगणना होगी, तो उसके बाद होने वाला नया सीमांकन पिछले 50 वर्षों से लागू उस व्यवस्था को समाप्त कर सकता है, जिसमें संसदीय क्षेत्रों की संख्या को स्थिर रखा गया था।”
नयी दिल्ली। कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने सोमवार को आगामी सीमांकन (Delimitation) प्रक्रिया को लेकर गंभीर चिंता जताई और चेतावनी दी कि यह भारत के लोकतंत्र, राष्ट्रीय एकता और संघवाद (Federalism) पर गहरा प्रभाव डाल सकती है। उन्होंने कहा, “जब 2026 या उसके बाद जनगणना होगी, तो उसके बाद होने वाला नया सीमांकन पिछले 50 वर्षों से लागू उस व्यवस्था को समाप्त कर सकता है, जिसमें संसदीय क्षेत्रों की संख्या को स्थिर रखा गया था।”
उन्होंने ज़ोर दिया कि यह मुद्दा “बहुत गंभीर सवाल” खड़ा करता है। थरूर ने राजनीतिक ताकत में संभावित असंतुलन की ओर इशारा करते हुए पूछा, “अगर अचानक उत्तर भारत के हिंदी भाषी राज्यों को दो-तिहाई बहुमत मिल जाए और वे संविधान में संशोधन पारित करने लगें, तो क्या दक्षिण भारत अपने आप को अलग-थलग महसूस नहीं करेगा?”
उन्होंने यह भी आगाह किया कि अगर वर्तमान जनसंख्या आंकड़ों के आधार पर संसदीय सीटों का आवंटन किया गया, तो इसके दीर्घकालिक परिणाम अनिश्चित और गंभीर हो सकते हैं। थरूर ने कहा, “जनसंख्या लगातार बदलती रहती है — अब बढ़ रही है, लेकिन इस सदी के अंत तक घट भी सकती है। यदि हम आज की जनसंख्या को आधार बनाकर सीटें तय करते हैं, तो इसका हमारे लोकतंत्र, राष्ट्रीय एकता और संघीय ढांचे पर क्या दीर्घकालिक असर पड़ेगा? इन चिंताओं और संभावित समाधानों पर चर्चा ज़रूरी है।”
इस मुद्दे ने खास तौर पर तमिलनाडु में तीखी प्रतिक्रियाएं उत्पन्न की हैं, जहाँ मुख्यमंत्री एम. के. स्टालिन ने दक्षिणी राज्यों के सांसदों और दलों को साथ लाने के लिए एक संयुक्त कार्य समिति (Joint Action Committee) बनाने का प्रस्ताव दिया है। एक सर्वदलीय बैठक में स्टालिन ने सुझाव दिया कि अगर संसदीय सीटें बढ़ती हैं, तो उनका आधार 1971 की जनगणना होनी चाहिए। उन्होंने मांग की कि 2026 से अगली 30 वर्षों तक सीमांकन का आधार 1971 की जनगणना ही बने।
DMK, जो लंबे समय से सीमांकन का विरोध करती रही है, का कहना है कि यह प्रक्रिया तमिलनाडु की संसद में प्रतिनिधित्व क्षमता को कम कर सकती है। स्टालिन ने सवाल उठाया: “क्या तमिलनाडु को जनसंख्या नियंत्रण में सफलता के लिए सज़ा दी जा रही है?”
इस बैठक में AIADMK, कांग्रेस, वामपंथी दलों और अभिनेता-राजनीतिज्ञ थलपति विजय की पार्टी TVK ने भाग लिया, जबकि BJP, तमिल राष्ट्रवादी NTK और तमिल मानिला कांग्रेस (मूपनार) ने इसका बहिष्कार किया। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने इस पर सफाई देते हुए कहा कि तमिलनाडु की संसदीय सीटें सीमांकन के कारण कम नहीं होंगी।
स्टालिन के उस दावे पर कि राज्य की 8 लोकसभा सीटें घट सकती हैं, शाह ने कहा, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने लोकसभा में स्पष्ट किया है कि सीमांकन के बाद भी दक्षिण के किसी भी राज्य की सीटों में कटौती नहीं की जाएगी।”
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