जब एआर रहमान ने शाहरुख़ खान को ‘इस्लाम का ब्रांड एंबेसडर’ कहा, तो SRK ने जवाब दिया—“मैं किसी भी धर्म का मॉडल बनने के पूरी तरह खिलाफ हूं…”

ऐसा ही एक क्षण, जिसकी चर्चा आज भी होती है, तब सामने आया था जब संगीतकार एआर रहमान ने शाहरुख़ खान को कभी “इस्लाम का एंबेसडर” कहा था। इस लेबल को शाहरुख़ ने बेहद दृढ़ता और संवेदनशीलता के साथ खारिज कर दिया..

जब एआर रहमान ने शाहरुख़ खान को ‘इस्लाम का ब्रांड एंबेसडर’ कहा, तो SRK ने जवाब दिया—“मैं किसी भी धर्म का मॉडल बनने के पूरी तरह खिलाफ हूं…”
20-01-2026 - 08:28 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

शाहरुख़ खान को सिर्फ़ उनकी सुपरस्टारडम के लिए ही नहीं बल्कि पहचान, आस्था और सह-अस्तित्व जैसे विषयों पर उनकी स्पष्ट और संतुलित सोच के लिए भी लंबे समय से सराहा जाता रहा है। ऐसा ही एक क्षण, जिसकी चर्चा आज भी होती है, तब सामने आया था जब संगीतकार एआर रहमान ने शाहरुख़ खान को कभी “इस्लाम का एंबेसडर” कहा था। इस लेबल को शाहरुख़ ने बेहद दृढ़ता और संवेदनशीलता के साथ खारिज कर दिया था।

शाहरुख़ खान को उनके प्रशंसक सिर्फ़ एक अभिनेता से कहीं बढ़कर मानते हैं। दुनिया भर के करोड़ों लोगों के लिए वह गर्मजोशी, उम्मीद और भावनात्मक जुड़ाव का प्रतीक हैं। लेकिन, जब बात धर्म की आती है, तो रईस’ अभिनेता ने हमेशा व्यक्तिगत आस्था और सार्वजनिक प्रतीकवाद के बीच एक साफ़ रेखा खींची है। अपनी पृष्ठभूमि और पारिवारिक जीवन के बारे में खुले रहने के बावजूद, उन्होंने कभी खुद को किसी धर्म का प्रवक्ता या प्रतिनिधि नहीं माना।

जन्म से मुस्लिम शाहरुख़ खान की शादी गौरी खान से हुई है, जो हिंदू हैं। दोनों ने हमेशा यह कहा है कि वे अपने बच्चों की परवरिश निर्देश  के बजाय चयन की स्वतंत्रता के माहौल में करते हैं। शाहरुख़ कई बार यह दोहरा चुके हैं कि उनके घर में कई धर्मों का सम्मान किया जाता है और उनके बच्चे जिस रास्ते को चाहें, उसे अपनाने के लिए स्वतंत्र हैं। उनके लिए आस्था हमेशा एक गहराई से निजी विषय रही है, न कि सार्वजनिक प्रदर्शन।

2008 में ‘द इकोनॉमिक टाइम्स’ को दिए एक इंटरव्यू में जब शाहरुख़ खान से एआर रहमान द्वारा उन्हें “इस्लाम का एंबेसडर” कहे जाने पर सवाल किया गया, तो उन्होंने कहा था,“सबसे पहले तो किसी भी धर्म का मॉडल बनना सही बात नहीं है। मैं इसका पूरी तरह विरोध करता हूं। धर्म सिर्फ़ सच की तलाश की एक भाषा है। मेरी भाषा वही है जो मुझे सिखाई गई है और हर भाषा अपने आप में पूर्ण होती है। यह कहने की कोई ज़रूरत नहीं कि मेरी भाषा तुम्हारी भाषा से बेहतर तरीके से सच को बयान करती है।”

उन्होंने आगे समझाया कि धर्म को व्यक्तियों को आइकन बनाकर नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा,मैं इस बात को लेकर बिल्कुल साफ़ हूं कि युवाओं के लिए मेरा संदेश यही होगा कि ऐसा कोई धार्मिक आइकन नहीं है, जिसे तुम्हें फॉलो करना ही चाहिए। हमारे पास पवित्र किताबें हैं, हमारे पास सिद्धांत हैं। अगर हम उन्हें आधुनिक शिक्षा के संदर्भ में आत्मसात कर सकें, तो वही सबसे बेहतर तरीका है,”
उन्होंने यह भी जोड़ा कि आस्था और विश्वास प्रणालियों को समय के साथ बदलना चाहिए।
ज़ाहिर है, कुछ बदलाव ज़रूरी हैं क्योंकि आज की दुनिया अलग है। आज के दौर में चार शादियां करना ज़रूरी नहीं है, क्योंकि यह समय की मांग नहीं है।”

एक बेहद भावनात्मक उदाहरण देते हुए शाहरुख़ ने कहा कि आस्था पूरी तरह निजी होनी चाहिए।
किताबें पढ़िए, अगर चाहें तो अंग्रेज़ी में पढ़िए, बस इतना ज़रूरी है कि आप उन्हें समझ सकें और अपने दिल के क़रीब रखें क्योंकि ये बहुत निजी चीज़ें होती हैं। ये उतनी ही निजी होती हैं, जितनी आपके पिता का चश्मा, जो वह अपने पीछे छोड़ गए हों,” उन्होंने कहा, लेकिन मैं कभी यह नहीं कहूंगा कि मेरे पिता का चश्मा तुम्हारे पिता के चश्मे से बेहतर है।”

अपनी बात को बेहद सादगी और गहराई के साथ समेटते हुए शाहरुख़ खान ने कहा, ये भावनात्मक जुड़ाव होते हैं इसलिए इन्हें निजी ही रहने देना चाहिए। मेरे लिए धर्म उतना ही निजी है, जितनी मेरे माता-पिता की यादें और आप यादों की तुलना नहीं करते।”

अपने शब्दों के अनुरूप, शाहरुख़ खान आज भी सबसे ऊपर जिस भाषा में बात करते हैं, वह है इंसानियत, संवेदनशीलता और प्रेम की भाषा

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।