'FIR क्यों नहीं? असली बड़े मगरमच्छ कौन हैं?': जस्टिस वर्मा मामले पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की तीखी टिप्पणी

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को 'जज के घर में नकदी' विवाद को लेकर न्यायपालिका पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने लोकतंत्र में जवाबदेही की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि इस मामले में FIR दर्ज होना चाहिए

'FIR क्यों नहीं? असली बड़े मगरमच्छ कौन हैं?': जस्टिस वर्मा मामले पर उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ की तीखी टिप्पणी
20-05-2025 - 06:19 AM
22-04-2026 - 05:53 PM

नयी दिल्ली। उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने सोमवार को 'जज के घर में नकदी' विवाद को लेकर न्यायपालिका पर गंभीर सवाल उठाए। उन्होंने लोकतंत्र में जवाबदेही की जरूरत पर जोर देते हुए कहा कि इस मामले में FIR दर्ज होना चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके।

नयी दिल्ली में एक पुस्तक विमोचन कार्यक्रम में बोलते हुए उपराष्ट्रपति ने पूछा कि दिल्ली हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा के आवास पर जली हुई नकदी मिलने के बाद भी अब तक FIR क्यों दर्ज नहीं हुई?

उन्होंने कहा, "हमारे देश में क़ानून का शासन है और हमारी आपराधिक न्याय प्रणाली FIR की मांग करती है। क़ानून का शासन ही समाज की नींव है।"

धनखड़ ने यह भी कहा कि उन्होंने इस मुद्दे पर जानबूझकर सार्वजनिक रूप से अपनी बात रखी है क्योंकि "देश का हर नागरिक इंतज़ार कर रहा है… वे सिर्फ सच्चाई जानना चाहते हैं।"

उन्होंने तीन सदस्यीय जांच समिति की वैधता पर भी सवाल उठाया जो इस मामले की आंतरिक जांच कर रही है।
उन्होंने कहा कि यह समिति संविधान या किसी विधि के अंतर्गत स्थापित नहीं है। धनखड़ ने पूछा, "क्या इस समिति ने लोगों से इलेक्ट्रॉनिक सबूत इकट्ठा किए? सबको लग रहा है कि यह मामला धीरे-धीरे दबा दिया जाएगा, लेकिन असली बड़े मगरमच्छ कौन हैं? क्या यह मामला वक्त के साथ फीका पड़ जाएगा?"

उपराष्ट्रपति ने न्यायपालिका पर व्यापक रूप से निशाना साधते हुए कहा, "एक सप्ताह तक देश के 1.4 अरब लोगों को इस बारे में कोई जानकारी नहीं थी। सोचिए, ऐसे कितने और मामलों पर पर्दा पड़ा होगा?"

निर्दोष साबित होने तक व्यक्ति को निर्दोष मानने के अधिकार पर बोलते हुए उन्होंने कहा, "मैं किसी पर आरोप नहीं लगा रहा, लेकिन मेरा सिर्फ इतना कहना है कि जब बात राष्ट्रीय हित की हो, तब हम 'इनसाइडर' और 'आउटसाइडर' जैसे खांचों में नहीं बँट सकते।"

मामला क्या है?

दिल्ली हाईकोर्ट के तत्कालीन न्यायाधीश जस्टिस यशवंत वर्मा उस समय विवादों में आ गए थे जब 14-15 मार्च की रात उनके आवास पर आग लगने की घटना के दौरान वहां से जली हुई नकदी मिलने का दावा किया गया।

इस घटना के बाद सुप्रीम कोर्ट ने एक आंतरिक जांच (in-house probe) का आदेश दिया था। शीर्ष अदालत के अनुसार, तीन सदस्यीय समिति ने 3 मई 2025 को अपनी रिपोर्ट मुख्य न्यायाधीश को सौंप दी है।
इस समिति में शामिल थे:

  • न्यायमूर्ति शील नागू, पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
  • न्यायमूर्ति जी.एस. संधावालिया, हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश
  • न्यायमूर्ति अनु शिवरामन, कर्नाटक हाईकोर्ट की न्यायाधीश

यह रिपोर्ट 4 मई 2025 को भारत के मुख्य न्यायाधीश को सौंप दी गई।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।