नागचंद्रेश्वर के दर्शन से ही व्यक्ति सर्प दोष से मुक्त हो जाता है, सिर्फ पंचमी को ही खुलते हैं मंदिर के पट
<p><em>आपने उज्जैन के महाकाल मंदिर के बारे में तो सुना ही होगा। इसी मंदिर की तीसरी मंजिल पर नागचंद्रेश्वर मंदिर बना है। यह मंदिर पूरे साल में सिर्फ 24 घंटे यानी एक दिन के लिए ही खुलता है। आइए जानते हैं इसके पीछे की क्या वजह है।</em></p>
नागपंचमी के दिन इस मंदिर में ढेर सारे श्रद्धालु पूजा-पाठ के लिए उमड़ते हैं। मान्यता है कि सर्प दोष से मुक्ति पाने के लिए नागपंचमी के दिन इस मंदिर में पूजा जरूर करनी चाहिए। इस मंदिर में विराजित प्रतिमा बहुत खास है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक नागचंद्रेश्वर मंदिर में राजा तक्षक ने भगवान शिव को मनाने के लिए घोर तपस्या की थी। बदले में भगवान शिव ने भी उन्हें अमरत्व का वरदान दिया था।
भगवान शिव के वरदान देने के बाद राजा तक्षक ने भोलेनाथ के साथ रहना शुरू कर दिया। किंतु महाकाल चाहते थे कि उनकी शांति भंग ना हो। यही कारण है कि इसके बाद से भगवान शिव नागपंचमी के दिन इस मंदिर में दर्शन देते हैं। नागपंचमी के अलावा पूरे साल उनके मंदिर के कपाट बंद रहते हैं।
मंदिर के खुलने का समय
उज्जैन स्थित नागचंद्रेश्वर का, जो की उज्जैन के प्रसिद्ध महाकाल मंदिर की तीसरी मंजिल पर स्थित है। इसकी खास बात यह है कि यह मंदिर साल में सिर्फ एक दिन नागपंचमी ( श्रावण शुक्ल पंचमी) पर ही दर्शनों के लिए खोला जाता है। इस वर्ष नाग पंचमी के अवसर पर 20 अगस्त की रात 12 बजे मंदिर के शीर्ष पर स्थित भगवान नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट खुलेंगे। मंदिर में दर्शन का सिलसिला 24 घंटों तक चलता रहेगा। भक्तगण 21 अगस्त की मध्यरात्रि 12 बजे तक इस मंदिर के दर्शन कर सकेंगे।
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मंदिर की खासियत ये है
ऐसी मान्यता है कि नागराज तक्षक स्वयं मंदिर में रहते हैं। नागचंद्रेश्वर मंदिर में 11वीं शताब्दी की एक अद्भुत प्रतिमा है, इसमें फन फैलाए नाग के आसन पर शिव-पार्वती बैठे हैं। कहते हैं यह प्रतिमा पूरी दुनिया में यह एकमात्र ऐसा मंदिर है, जिसमें विष्णु भगवान की जगह भगवान भोलेनाथ सर्प शय्या पर विराजमान हैं। नागपंचमी पर भगवान नागचंद्रेश्वर की त्रिकाल पूजा का विधान है।
नागराज पर विराजे शिवशंभु को देखने के लिए श्रद्धालु लंबी-लंबी कतारों में लगते हैं। इस मंदिर में स्थापित प्राचीन मूर्ति में भगवान शिव, गणेश जी और पार्वती के साथ दशमुखी सर्प में विराजित हैं। नागपंचमी के दिन इस मंदिर में लाखों की संख्या में भीड़ उमड़ती है।
20 अगस्त रात 12 बजे से 24 घंटे के लिए खुले पट
महानिवार्णी अखाड़े के महंत विनीत गिरिजी महाराज ने बताया कि वर्ष में एक बार खुलने वाले श्री नागचंद्रेश्वर मंदिर के पट 20 अगस्त 2023 रविवार की रात्रि 12 बजे शासकीय पूजा-अर्चना के बाद खोले जाएंगे। जो कि 21 अगस्त की रात 12 बजे तक 24 घंटे खुले रहेंगे।
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