नागपंचमीः श्रावण शुक्ल पंचमी को आस्तिक मुनि ने जनमेजय के नागयज्ञ में भस्म हो रहे नागों को रक्षा की थी, इसी दिन से मनाया जा रहा है यह पर्व..!
<p><em>आज 21 अगस्त को श्रावण (सावन) माह के शुक्ल पक्ष की पंचमी हैं और इस दिन देश भर में नाग पंचमी के त्योहार के तौर पर मनाया जा रहा है। आज के दिन शिव जी के साथ ही नाग देव की विशेष पूजा करने का महत्व माना गया है। </em></p>
नाग पंचमी मनाने के पीछे एक पौराणिक कथा प्रचलित है। कथा के मुताबिक, महाभारत युद्ध के बाद पांडवों ने अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित को राजा बना दिया और खुद स्वर्ग की यात्रा पर निकल गए थे। पांडवों के बाद धरती पर कलियुग का आगमन हो गया था। कहते हैं कि राजा परीक्षित की मृत्यु नाग देव के डंसने से हुई थी। राजा परीक्षित का पुत्र जनमेजय जब बड़ा हुआ तो उसने अपने पिता की मृत्यु का बदला लेने के लिए पृथ्वी के सभी नागों को मारने के लिए नाग दाह यज्ञ किया। इस यज्ञ में पूरी पृथ्वी के नाग आकर जलने लगे। जब ये बात आस्तिक मुनि को मालूम हुई तो वे तुरंत राजा जनमेजय के पास पहुंचे।
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आस्तिक मुनि ने राजा जनमेजय को समाझाया और ये यज्ञ रुकवाया। जिस दिन ये घटना घटी, उस दिन सावन शुक्ल पक्ष की पंचमी थी। उस दिन आस्तिक मुनि के कारण नागों की रक्षा हो गई। इसके बाद से नाग पंचमी पर्व को मनाने की शुरूआत हुई। यज्ञ की आग को ठंडा करने के लिए आस्तिक मुनि ने उसमें दूध डाल दिया था। इसके बाद से इस मान्यता प्रचलित हो गयी कि नाग पंचमी पर नाग देव को दूध चढ़ाना चाहिए। चूंकि भगवान शिव नागों को अपने गले में धारण करते हैं इसलिए जब भगवान शिव की पूजा की जाती है तो नागों की भी पूजा हो ही जाती है। लेकिन, आज सोमवार है और इसे शिवजी के वार के रूप में मनाते हैं। इसके साथ ही श्रावण माह के शुक्लपक्ष की पंचमी भी है। इस कारण आज के दिन शिवजी की विशेष पूजा के साथ नाग देवता की भी पूजा का महत्व बढ़ गया है।
नाग पंचमी पर नाग अनंत, वासुकी, शेष, पद्म, कंबल, शंखपाल, कालिया, तक्षक का ध्यान करते हुए नाग प्रतिमा की पूजा करनी चाहिए।अगर नागदेव की प्रतिमा न हो तो शिवलिंग पर स्थापित नागदेव की पूजा कर सकते हैं। नागदेव को जल, दूध चढ़ाने के बाद हल्दी, रोली, चावल और फूल चढ़ाएं। धूप-दीप जलाकर पूजा करें। फल-मिठाई का भोग लगाएं। नाग देवता की कथा पढ़ें-सुनें। इस दिन शिव जी की भी पूजा जरूर करें।
नागपंचमी का महत्व ओर नागों की पूजा?
श्रावण शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को नागों की पूजा का पर्व मनाया जाता है । इस तिथि को भगवान शिव के आभूषण नागों की पूजा की जाती है । नागों की पूजा करके आध्यात्मिक और अपार धन की प्राप्ति की जा सकती है ।कहा जाता है कि अगर कुंडली में राहु-केतु की स्थिति ठीक ना हो तो इस दिन विशेष पूजा का लाभ पाया जा सकता है। जिनको सांप के सपने आते हों या सर्प से डर लगता हो तो ऐसे लोगों को इस दिन नागों की पूजा विशेष रूप से करना चाहिए ।
पूजा का सही तरीका एवं विधि
घर के मुख्य द्वार पर गोबर, गेरू या मिट्टी से सर्प की आकृति बनाएं और इसकी पूजा करें । घर के मुख्य द्वार पर सर्प की आकृति बनाने से जहां आर्थिक लाभ होता है।वहीं घर पर आने वाली विपत्तियां भी टल जाती हैं । इसके बाद 'ऊं कुरु कुल्ले फट् स्वाहा' का जाप करते हुए घर में जल छिड़कें । अगर आप नागपंचमी के दिन आप सामान्य रूप से भी इस मंत्र का उच्चारण करते हैं तो आपको नागों का तो आर्शीवाद मिलेगा ही साथ ही आपको भगवान शंकर का भी आशीष मिलेगा।
बिना शिव जी की पूजा के कभी भी नागों की पूजा न करें क्योंकि, शिव की पूजा करके नागों की पूजा करेंगे तो वो कभी अनियंत्रित नहीं होंगे ।
।।श्री सर्प सूक्तम।।
ब्रह्मलोकेषु ये सर्पा शेषनाग परोगमा:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।1।।
इन्द्रलोकेषु ये सर्पा: वासुकि प्रमुखाद्य:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।2।।
कद्रवेयश्च ये सर्पा: मातृभक्ति परायणा।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।3।।
इन्द्रलोकेषु ये सर्पा: तक्षका प्रमुखाद्य।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।4।।
सत्यलोकेषु ये सर्पा: वासुकिना च रक्षिता।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।5।।
मलये चैव ये सर्पा: कर्कोटक प्रमुखाद्य।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।6।।
पृथिव्यां चैव ये सर्पा: ये साकेत वासिता।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।7।।
सर्वग्रामेषु ये सर्पा: वसंतिषु संच्छिता।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।8।।
ग्रामे वा यदि वारण्ये ये सर्पप्रचरन्ति।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।9।।
समुद्रतीरे ये सर्पाये सर्पा जंलवासिन:।
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्य: सुप्रीतो मम सर्वदा।।10।।
रसातलेषु ये सर्पा: अनंतादि महाबला:
नमोस्तुतेभ्य: सर्पेभ्यः सुप्रीतो मम सर्वदा ।।11।।
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