नंदन नीलेकणि : डिजिटल भारत के सूत्रधार
<p>पहली तिमाही में GDP ग्रोथ रेट 7.8% के साथ दुनिया में सबसे तीव्र गति से बढ़ी भारत की इकॉनमी का क्रेडिट डिजिटलीकरण को दें तो कुछ गलत नहीं होगा। आज भारत डेवलपिंग इकोनॉमी से शाइनिंग इकोनॉमी की तरफ बढ़ रहा है। डेवलपिंग से शाइनिंग इकोनॉमी तक भारत को ले जाने में डिजिटलीकरण ने एक बड़ी भूमिका निभाई है। ये डिजिटल इंडिया का दौर में भारत में कई स्टार्टअप्स शुरू हो रहे हैं। इन स्टार्टअप्स ने रोजगार के नए रास्तों को खोला है। ऐसे में इसे कहना जरा भी गलत नहीं होगा कि डिजिटल इंडिया के प्रभाव में हमारी अर्थव्यवस्था एक नया आकार ले रही है,जिसका प्रभाव अब सामने आ रहा है।</p>
डिजिटल भारत की सेवाएं
डिजिटल इंडिया को गति देने में आधार कार्ड ने एक बड़ी भूमिका निभाई है। आज आधार कार्ड हमारे देश का काफी जरूरी दस्तावेज बन गया है। देश की कुल आबादी में तकरीबन 135 करोड़ लोगों के पास आधार है। इंस्टेंट बैंक अकाउंट या डीमैट अकाउंट खुलवाना हो, डिजी लॉकर, ओटीपी सिक्योरिटी, सरकार द्वारा लोगों को डायरेक्ट बैंक ट्रांसफर द्वारा दी जा रही सब्सिडी आदि कई जरूरी सेवाओं को सरकार आधार कार्ड की मदद से ही लोगों तक पहुंचा पा रही है। आधार कार्ड आने के बाद सरकारी सिस्टम में एक पारदर्शिता आई है। इसी कड़ी में आज हम आपको एक ऐसे शख्स के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्होंने देश को आधार कार्ड, यूपीआई, फास्टेग, जीएसटी जैसी टेक्नोलॉजी देकर डिजिटल इंडिया की बुनियाद रखी है। ये शख्स जिन्हे साल 2003 में फॉरचून मैग्जीन ने एशिया के बिजनेसमैन ऑफ द ईयर के सम्मान से नवाज़ा।वहीं साल 2005 में इन्हें भारत सरकार ने पद्म भूषण से सम्मानित किया। साल 2022 में टाइम मैगजीन नें नंदन नीलेकणि को 100 Most Influential People Of the Year में जगह दी है। इसी कड़ी में आइए जानते हैं डिजिटल इंडिया का फाउंडर कहे जाने वाले नंदन नीलेकणि की कहानी।
नंदन नीलेकणि का जन्म और पढ़ाई
नंदन नीलेकणि का जन्म देश के आईटी हब कहे जाने वाले बेंगलुरु शहर में 2 जून, 1955 को हुआ था। इनकी शुरुआती पढ़ाई बिशप कॉटन बॉय स्कूल में हुई। वहीं इन्होंने अपने हाई स्कूल की पढ़ाई सेंट जॉसेफ हाई स्कूल से पूरी की। उसके बाद नंदन नीलेकणि ने अपने इलेक्ट्रिक इंजीनियरिंग की पढ़ाई आईआईटी बॉम्बे से पूरी की। खास बात यह है कि उन्होंने बिना किसी कोचिंग के दम पर आईआईटी बॉम्बे में दाखिला पाया था।
नारायण मूर्ति के साथ मिलकर की इंफोसिस की शुरुआत
साल 1978 में उनकी मुलाकात नारायण मूर्ति से होती है। इन दोनों की मुलाकात के बाद ही इंफोसिस की शुरुआत हुई। ये 80 का दशक था। उस दौरान आज के मुकाबले भारतीय अर्थव्यवस्था का स्वरूप काफी अलग था। इस दौर में किसी स्टार्टअप का ग्रो करना काफी मुश्किल काम था। करीब 10 सालों तक इंफोसिस काफी मुश्किल हालातों में चलती रही। वहीं साल 1991 में भारतीय अर्थव्यवस्था में हुए मेजर रिफॉर्म ने मानों इंफोसिस को एक नया रास्ता दे दिया हो।
2002 में नंदन नीलेकणि कंपनी के सीईओ बने
साल 1992 में इस कंपनी ने अपना आईपीओ स्टॉक मार्केट में लॉन्च किया। इसके बाद दुनिया भर में कई बड़ी कंपनियां इंफोसिस द्वारा बनाए सॉफ्टवेयर का उपयोग करने लगीं। यही नहीं इस दौरान कंपनी का मार्केट कैपिटलाइजेशन भी काफी तेजी से बढ़ने लगा था। साल 1999 में इंफोसिस NASDAQ पर लिस्ट होने वाली भारत की पहली कंपनी बनी। लिस्ट होने के तुरंत बाद इस कंपनी की मार्केट कैपिटलाइजेशन 1 बिलियन डॉलर के बैंचमार्क को क्रॉस कर दिया। साल 2002 में नंदन नीलेकणि को कंपनी का सीईओ बनाया गया।
तत्कालीन पीएम मनमोहन सिंह ने यूआईडीएआई प्रोजेक्ट का चेयरमेन बनाया
नंदन नीलेकणि की इसी काबिलियत को देखते हुए साल 2009 में तत्कालीन भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उन्हें यूआईडीएआई प्रोजेक्ट का चेयरमेन बनने के लिए आमंत्रित किया। नंदन ने इस प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया। डिजिटल इंडिया को आकार देने में यूआईडीएआई एक महत्वपूर्ण कदम माना जाता है। आज दुनियाभर में आधार को सबसे बड़े बायोमीट्रिक सिस्टम के रूप में जाना जाता है। यूआईडीएआई हमारे बायोमेट्रिक डाटा को इकट्ठा करके इन्हें सेंट्रलाइज डाटा बेस में रखता है। आधार कार्ड आने के बाद आज कई सरकारी सेवाओं को बेहद ही कम समय में लोगों तक पहुंचाना संभव हो पाया है। आधार की मदद से आप ऑनलाइन पेमेंट, पेंशन आदि कई सेवाओं को बेहद ही कम समय में एक्सेस कर सकते हैं।
कांग्रेस से लोकसभा चुनाव लड़े
साल 2014 में नंदन नीलेकणि इंडियन नेशनल कांग्रेस की तरफ से लोकसभा चुनाव भी लड़े। हालांकि, इस चुनाव में वो भाजपा के कैंडिडेट अनंत कुमार से हार गए।
डिजिटल पेमेंटिंग सिस्टम में क्रांति
इसके बाद नंदन नीलेकणि ने भारत की डिजिटल पेमेंटिंग सिस्टम में क्रांति लाने के बारे में सोचा। आपको शायद ही पता होगा कि आज जिस यूपीआई सिस्टम से हम लोग ऑनलाइन भुगतान करते हैं। वह नंदन नीलेकणि द्वारा ही डिजाइन किया गया है। यही नहीं स्टैंडर्डाइजिंग इलेक्ट्रॉनिक टोल सिस्टम को डिजाइन करने का काम भी नंदन नीलेकणि और उनकी टीम ने किया। ऐसे में ये कहना बिल्कुल भी गलत नहीं होगा कि भारत में आधार, जीएसटी, यूपीआई, फास्टेग जैसे सिस्टम को भारत में लाकर उन्होंने डिजिटल इंडिया के सपने को साकार किया है।
ओएनडीसी प्रोजेक्ट पर कर रहे हैं काम
आज भी नंदन नीलेकणि देश को एक नया आकार देने के लिए कई काम कर रहे हैं। आज वो भारत सरकार के साथ मिलकर देश में फ्री एक्सिसेबल ऑनलाइन सिस्टम को डिजाइन कर रहे हैं, जहां पर व्यापारी और ग्राहक एक छोटी चीज से लेकर बड़ी-बड़ी चीजों को खरीद सकेंगे। इस प्रोजेक्ट का नाम ओएनडीसी (ONDC Open Network For Digital Commerce) है। विशेषज्ञों के मुताबिक अगर ये प्रोजेक्ट सफल साबित होता है। इस स्थिति में अमेजन और फ्लिपकार्ट जैसी कंपनियों का एकाधिकार देश में खत्म हो सकता है।
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