अमेठी छीनी, अब रायबरेली के लिए तैयार है भाजपा का ब्लू प्रिंट
जहां विपक्षी दल गठबंधन बनाने पर जोर दे रहे हैं तो वहीं भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) का फोकस ‘स्पेशल 144’ पर है। ये लोकसभा की वो सीटें हैं, जहां हाल के चुनावों में बीजपी को हार मिली है और पार्टी का फोकस इन सीटों पर बढ़ गया है। इन सीटों के साथ ही बीजेपी की नजर विपक्ष की उन सीटों पर भी हैं, जो उनका गढ़ मानी जाती हैं। यूपी की रायबरेली, मैनपुरी, महाराष्ट्र की बारामती समेत कई और सीटें हैं, जिनके लिए पार्टी ने खास रणनीति तैयार की है। हाल ही में बीजेपी नेताओं की इसको लेकर एक बैठक भी हुई। बीजेपी उन 144 लोकसभा सीटों में से कम से कम आधी सीटें जीतने के लिए अलग-अलग योजना पर काम कर रही है, जो उसने हाल के चुनावों में नहीं जीती है।
इन सीटों पर है नजर
144 सीटों की योजना के पीछे विचार यह है कि यदि पार्टी कुछ सीटें हारती है, तो उसे कम से कम नई सीटें जीतकर उस कमी को पूरा किया जाए। बीजेपी के राष्ट्रीय संगठन महासचिव बीएल संतोष ने लोकसभा चुनाव के दो साल पहले पार्टी नेताओं के सामने एक प्रेजेंटेशन दिया जिसमें उत्तर प्रदेश में रायबरेली और मैनपुरी, महाराष्ट्र में बारामती, पश्चिम बंगाल में जादवपुर, तेलंगाना में महबूबनगर और मध्य प्रदेश में छिंदवाड़ा विपक्ष की इन मजबूत सीटों का जिक्र था। इन सीटों पर पार्टी को जीत दिलाने के लिए योजना बनाई गई है और इसकी जिम्मेदारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं को दी गई है।
18 महीनों का मास्टर प्लान तैयार
पार्टी की नजर जिन 144 सीटों पर है उसके लिए बीजेपी ने अगले 18 महीनों तक काम करने की एक योजना बनाई है। लगभग 40 केंद्रीय मंत्रियों को जिम्मेदारी दी गई है, जिसमें किसी के पास दो तो किसी के पास तीन लोकसभा सीटों की जिम्मेदारी है।
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