शाम की कॉफी और 1 मसाला डोसा... चंद्रयान-3 के पीछे की मजेदार कहानी

<p><em><strong>एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, चंद्रयान-3 मिशन में इसरो के कैंटीन की शाम 5 बजे की मुफ्त की एक फिल्टर कॉफी और मसाला डोसा का काफी योगदान रहा है। इसकी वजह से मिशन में शामिल लोग उत्साह पूर्वक रुक कर समय देने लगे थे।</strong></em></p>

शाम की कॉफी और 1 मसाला डोसा... चंद्रयान-3 के पीछे की मजेदार कहानी
02-09-2023 - 11:36 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

चंद्रयान-3 चांद की सतह पर सॉफ्ट लैंडिंग करने के बाद सफलता की नई इबारत लिख रहा है। लेकिन हाल ही में पत्रकार बरखा दत्त की ‘द वॉशिंगटन पोस्ट’ में उनकी एक ओपिनियन लेख के बाद चंद्रयान-3 की चर्चा होने लगी है। लेख के अनुसार, इसरो ने बताया कि चंद्रयान-3 की सफलता में यहां की कैंटीन की शाम की 5 बजे की फिल्टर कॉफी और मसाला डोसा ने भी काफी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। 

चंद्रयान-3 मिशन के वैज्ञानिक वेंकटेश्वर शर्मा के हवाले से बताया गया है, ‘हमने हर शाम 5 बजे मुफ्त मसाला डोसा और फिल्टर कॉफी की पेशकश करके इस मिशन को पूरा किया। परिणाम काफी उल्लेखनीय रहा। लोगों ने स्वेच्छा से अतिरिक्त समय देना शुरू कर दिया। सभी अचानक लंबे समय तक रुकने से खुश थे। शर्मा ने बताया कि चंद्रयान-3 की लॉन्चिंग की चुनौतियों के बीच उन्हें अपना प्यार भी मिल गया। उन्होंने प्रोजेक्ट की महत्वपूर्ण वैज्ञानिक से शादी रचा ली।
जब बैलगाड़ी से गया था सैटेलाइट 
इसरो के पूर्व निदेशक सुरेंद्र पाल ने उस समय की याद दिलाई जब एक संचार उपग्रह को एक साधारण बैलगाड़ी पर ले जाया जाता था, इसमें मात्र 150 रुपये का खर्च आता था। इसरो के एक अन्य पूर्व प्रमुख माधवन नायर कहते हैं, ‘हम यहां केवल जरूरी चीजों पर खर्च करते है। हमारे वैज्ञानिक भारत या विदेश में किसी भी अन्य कंपनी के वैज्ञानिकों की तुलना में अधिक प्रयास करते हैं और इन्हें विदेश में वैज्ञानिकों की तुलना में सैलरी का मात्र 1/5वां मिलता है।’
14 दिन काम करने लायक
चंद्रयान-3 मिशन पर 600 करोड़ रुपए की लागत आई जबकि हॉलीवुड की फिल्म इंटरस्टेलर के बजट 165 मिलियन डॉलर की तुलना में मात्र 75 मिलियन डॉलर था। लगभग आधा। 14 जुलाई को इसे प्रक्षेपण यान ‘लॉन्च व्हीकल मार्क-3’ (एलवीएम-3) रॉकेट के जरिए प्रक्षेपित किया गया था। लैंडर और छह पहियों वाले रोवर (कुल वजन 1,752 किलोग्राम) को एक चंद्र दिवस की अवधि (धरती के लगभग 14 दिन के बराबर) तक काम करने के लिए डिजाइन किया गया है।
जहां कोई नहीं पहंुचा वहां की साॅफ्ट लैंडिंग
गौरतलब है कि 23 अगस्त को चंद्रमा के दक्षिणी घु्रव पर सफल ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ के बाद भारत वहां पहुंच गया है, जहां पहले कोई देश नहीं पहुंचा था। अंतरिक्ष अभियान में बड़ी छलांग लगाते हुए भारत का चंद्र मिशन ‘चंद्रयान-3’ बुधवार शाम 6.04 बजे चंद्रमा के दक्षिणी धु्रव पर उतरा, जिससे देश चांद के इस क्षेत्र में उतरने वाला दुनिया का पहला तथा चंद्र सतह पर सफल ‘सॉफ्ट लैंडिंग’ करने वाला दुनिया का चैथा देश बन गया है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।