जोर का झटका धीरे से... अनशन पर बैठने से पहले सचिन पायलट को आलाकमान ने दिया झटका
<p><em>गहलोत सरकार ने खिलाफ अनशन पर बैठने वाले नेता सचिन पायलट को एक दिन पहले यानि 10 अप्रैल के दिन ही तगड़ा झटका लगा है। आलाकमान के एक मौखिक आदेश ने सचिन पायलट की चिंता बढ़ा दी है। अब वे अपनी घोषणा और इज़्ज़त की भरपाई कैसे करेंगे, ये तो उनपे ही निर्भर करता है। क्या हुआ आज , किसने दिया और कैसे लगा सचिन को झटका , पूरी खबर आपको बताते हैं।</em></p>
बार बार विद्रोह के स्वर मुखर कर के अपनी ही सरकार के खिलाफ मोर्चा खोलने वाले सचिन पायलट ने इस बार तो बड़े आंदोलन की तैयारी कर ली है।कल रविवार को उन्होनेअपने घर पर प्रेस कॉन्फ्रेंस कर के अशोक गहलोत के खिलाफ मोईचा खोल दिया और उनपर भाजपा की वसुंधरा राजे के साथ सांठ गांठ का आरोप तक लगा दिया। साथ ही 11 अप्रेल को जयपुर के शहीद स्मारक पर अनशन पर बैठने की घोषणा तक कर दी। लेकिन दस अप्रेल यानि आज उनको तगड़ा झटका लगा है।
पायलट को दिया आलाकमान ने झटका
दरअसल पायलट के साथ उनके गुट के नेता,मंत्री और विधायक भी शामिल हैं, उनका भी अनशन पर बैठने का प्लान था , लेकिन आज तड़के ही आलाकमान ने एक मौखिक आदेश निकाल दिया कि जो भी नेता धरने में सचिन के साथ जाएगा, वह अंजाम भुगतेगा। इसी मौखिम धमकी के कारण सचिन के साथ कोई भी बड़ा नेता नहीं दिखेगा। इसलिए वे चिंतित नजर आ रहे हैं। हांलाकि इसे कवर करने के लिए सचिन यह भी कह रहे हैं कि उन्होनें ही सभी साथी नेताओं को आने से मना कर दिया, यह लड़ाई उनकी है
क्या है झगडे का मामला
सचिन पायलेट राजस्थान सरकार में डिप्टी सीएम रह चुके हैं। लेकिन इस दौरान अपने कुछ नेताओं को मंत्री नहीं बनाए जाने के विवाद में उन्होंने सीएम गहलोत के खिलाफ ऐसी जंग छेड़ दी जो चार साल तक बीत जाने के बाद भी अब तक जारी है। गहलोत से सीधी टक्कर लेने के मामले में उन्हें काफी नुकसान भी उठाना पड़ा और अपना पद गंवाना पड़ा। लेकिन मामला यहीं शांत नहीं हुआ। वे और सीएम लगातार एक दूसरे के खिलाफ बयानबाजी करते रहे। उसे बाद अब प्रदेश प्रभारी सुरजीत सिंह रंधावा को दोनो को शांत करने के लिए दिल्ली से भेजा गया।
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