विपक्ष के निशाने पर सरकार, संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में चीन के विरुद्ध भारत ने क्यों नहीं की वोटिंग
<p><em><strong>विपक्षी दलों ने कहा कि जो सच है, उस बारे में भारत को बोलना चाहिए और अपने पड़ोसी देश से डरना नहीं चाहिए।</strong></em></p>
चीन में उइगर मुसलमानों पर किए जाने वाले अत्याचारों के खिलाफ भारत ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद में वोटिंग नहीं की। भारत के इस कदम को लेकर विपक्ष ने केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। विपक्षी दलों ने कहा कि जो सच है, उस बारे में भारत को बोलना चाहिए और अपने पड़ोसी देश से डरना नहीं चाहिए। कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं लोकसभा सदस्य मनीष तिवारी ने हैरानी जताते हुए कहा कि 'चीन पर काफी झिझक' वाला रुख है। इन सबके बाद विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को भारत के इस फैसले पर स्पष्टीकरण दिया है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा कि हम ऐसे मुद्दों से निपटने के लिए बातचीत के पक्षधर है। भारत सभी मानवाधिकारों के लिए प्रतिबद्ध है
भारत ने क्यों नहीं की वोटिंग
चीन के अशांत क्षेत्र शिंजियांग मानवाधिकारों की स्थिति पर चर्चा के लिए UNHRC में एक मसौदा प्रस्ताव पेश हुआ था। इस मसौदे के खिलाफ 17 देशों ने पक्ष में वहीं 19 देशों ने मसौदे के खिलाफ मतदान किया था। जिसके चलते 47 सदस्यीय परिषद में यह मसौदा खारिज हो गया। इसमें भारत के अलावा यूक्रेन, ब्राजील समेत 11 देशों ने वोटिंग से परहेज किया था। भारत ने इस फैसले पर कहा कि यह विशिष्ट प्रस्ताव पर मतदान में हिस्सा नहीं लेने के उसके दीर्घकालिक चलन पर आधारित है।
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