जिबूती में ड्रेगन का जहाज, अफ्रीका के रास्ते भारत को घेर रहा चीन
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चीन ने अफ्रीका के जिबूती में अपने नौसैनिक अड्डे को ऑपरेशनल कर दिया है। सेटेलाइट तस्वीरों से पता चला है कि जिबूती में चीन के नौसैनिक अड्डे पर हमेशा कोई न कोई युद्धपोत तैनात रहता है। मैक्सार की तस्वीरों में इस नौसैनिक अड्डे पर चीन का युझाओ-क्लास लैंडिंग जहाज तैनात नजर आ रहा है। इसे पोर्ट पर एक एप्रन के पास स्थित 320 मीटर लंबे बर्थिंग क्षेत्र के साथ डॉक किया गया है। इसी साल मार्च में पहली बार चीनी नौसेना का एक अन्य युद्धपोत भी जिबूती पहुंचा था। जिबूती में चीन का नौसैनिक अड्डा बहुत वर्षों से मौजूद है लेकिन मार्च 2022 से पहले यहां किसी युद्धपोत की तैनाती नहीं की गई थी। अदन की खाड़ी के पास मौजूद जिबूती महत्वपूर्ण व्यापारिक रूट पर स्थित है। ऐसे में चीन यहां अपनी नौसैनिक उपस्थिति दर्ज करवाकर रणनीतिक बढ़त हासिल करने की तैयारी में है। एशिया में चीन को सबसे बड़ा खतरा भारत से है। यही कारण है कि चीन ने भारत को घेरने के लिए हिंद महासागर में अपनी गतिविधियों को बढ़ा दिया है।
जिबूती में मौजूद है चीन का विदेशी सैन्य अड्डा
जिबूती में चीनी नौसेना का बेस स्टेशन ड्रैगन का पहला विदेशी सैन्य अड्डा है। इसे 590 मिलियन डॉलर की लागत से बनाया गया है। चीन ने जिबूती में अपने सैन्य अड्डे को बनाने की शुरुआत साल 2016 से की थी।
जिबूती में अमेरिका, फ्रांस का भी सैन्य अड्डा
जिबूती में अमेरिका, फ्रांस और स्पेन ने भी अपने सैन्य अड्डे बनाये हुए हैं। यह अफ्रीका में अमेरिका का एक मात्र स्थायी सैन्य अड्डा है। जापान, इटली और स्पेन ने भी जिबूती में अपने सैन्य अड्डे स्थापित किए हैं। सऊदी अरब अपना बेस बनाने की सोच रहा है। फ्रांस की मौजूदगी 1894 से है क्योंकि अभी का जिबूती कभी फ्रेंच सोमालीलैंड कहलाता था जो कि 1977 तक फ्रांस का उपनिवेश था।
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