इंडिया की रेटिंग बीएए-3 बरकरार, मूडीज ने कहा- अगले 2 वर्षों में तेजी से बढ़ेगा भारत
<p><em><strong>रेटिंग एजेंसी मूडीज ने स्थिर परिदृश्य के साथ भारत की साख को बीएए-3 रेटिंग पर बरकरार रखा। मूडीज का अनुमान है कि घरेलू मांग के दम पर भारत की आर्थिक वृद्धि दर कम-से-कम अगले 2 साल तक जी-20 देशों की अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले ऊंचे स्तर पर बनी रहेगी।</strong></em></p>
रेटिंग एजेंसी मूडीज ने स्थिर नजरिये के साथ भारत की साख को बीएए-3 रेटिंग पर बरकरार रखी है। मूडीज ने कहा कि उच्च वृद्धि दर से आय स्तर में क्रमिक वृद्धि होगी जो आर्थिक स्थिति को मजबूती देगी। इसके साथ ही रेटिंग एजेंसी ने सरकारी लोकलुभावन नीतियां अपनाए जाने से जुड़े जोखिमों को लेकर आगाह भी किया। मूडीज का अनुमान है कि घरेलू मांग के दम पर भारत की आर्थिक वृद्धि दर कम-से-कम अगले 2 साल तक जी-20 देशों की अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले ऊंचे स्तर पर बनी रहेगी।
आर्थिक परिदृश्य स्थिर बना हुआ
अमेरिकी रेटिंग एजेंसी ने एक बयान में कहा, ‘‘मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने भारत सरकार की दीर्घकालिक स्थानीय और विदेशी मुद्रा जारीकर्ता रेटिंग और स्थानीय मुद्रा को लेकर बीएए-3 रेटिंग की पुष्टि की है। मूडीज ने भारत की अन्य अल्पकालिक स्थानीय-मुद्रा रेटिंग को भी पी-3 पर बरकरार रखा है। परिदृश्य स्थिर बना हुआ है।’’
कोरोना महामारी के बाद मजबूत वृद्धि दिखी
मूडीज ने कहा कि कोविड महामारी के बाद मजबूत वृद्धि संभावनाओं की बहाली, मुद्रास्फीति नियंत्रण की प्रभावी प्रतिबद्धता और वित्तीय प्रणाली के बेहतर होने से मौद्रिक एवं व्यापक आर्थिक नीतियों के प्रभावी होने के उसके विचार को समर्थन मिलता है। इसके साथ ही मूडीज ने कुछ आशंकाएं भी जताई हैं। एजेंसी ने अपनी टिप्पणी में कहा, ‘नागरिक समाज एवं राजनीतिक असहमति पर बंदिश के साथ संप्रदायों के बीच तनाव बढ़ने से राजनीतिक जोखिम और संस्थानों की गुणवत्ता के कमजोर आकलन को समर्थन मिलता है।’ मूडीज ने कहा, ‘क्षेत्रीय एवं स्थानीय सरकारों के स्तर पर लोकलुभावन नीतियां अपनाने का जोखिम नजर आता है। गरीबी और आय असमानता जैसे सामाजिक जोखिम पहले से ही मौजूद हैं।’
मूडीज ने जताया ये अनुमान
मूडीज को मिलाकर तीनों वैश्विक रेटिंग एजेंसियों ने भारत को स्थिर परिदृश्य के साथ सबसे कम निवेश-योग्य रेटिंग दी हुई है। इसके पहले फिच एवं एसएंडपी ने भी भारत को यही रेटिंग दी थी। किसी देश की रेटिंग उसकी साख को बताती है और यह कर्ज लेने की लागत को भी प्रभावित करती है। रेटिंग एजेंसी का मानना है कि पिछले सात-10 वर्षों में भारत की आर्थिक वृद्धि दर क्षमता के अनुकूल नहीं रही है, लेकिन भारतीय अर्थव्यवस्था के अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुसार इसके तेजी से बढ़ने की संभावना है।
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