एयरफोर्स के बेड़े में शामिल होंगे स्वदेशी विमानः विदेश से फाइटर जेट बनाने की टेक्नोलॉजी लेकर, भारत में निर्माण होगा
<p><em><strong>इस डील में अनिवार्यता की स्वीकार्यता यानी एक्सपेंटेंस ऑफ नेसेसिटी पर रक्षा मंत्रालय की मुहर लगनी बाकी है। </strong></em></p>
भारतीय वायुसेना अब अपने लड़ाकू विमानों के बेड़े में विदेशों में बने जेट शामिल नहीं करेगी। वायुसेना इस वक्त 114 लड़ाकू विमान खरीदने की प्रक्रिया में है। वायु सेना सूत्रों के अनुसार इन विमानों को टेक्नोलाॅजी हस्तांतरण के जरिए भारत में ही बनाना होगा। इस डील में अनिवार्यता की स्वीकार्यता यानी एक्सपेंटेंस ऑफ नेसेसिटी पर रक्षा मंत्रालय की मुहर लगनी बाकी है। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह कई बार आत्मनिर्भरता को लेकर वायुसेना से आग्रह कर चुके हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए तय किया गया है कि आने वाले समय में भारत में ही बने फाइटर जेट्स का उपयोग किया जाएगा।
नौसेना स्वदेशी जेट्स इस्तेमाल करने का फैसला पहले ही कर चुकी
विदेशी सौदों के लिए मंत्रालय यह तय करता है कि ये प्लेटफॉर्म बाहर से मंगाना जरूरी है या नहीं। वायुसेना के सैद्धांतिक फैसले को देखते हुए अब अनुमति मिलने का रास्ता आसान हो गया है। नौसेना स्वदेशी जेट्स इस्तेमाल करने का फैसला पहले ही कर चुकी है, उसके जंगी पोत भी देश में ही बनाए जाएंगे।
सालाना 24 तेजस मार्क-2 बनाने की तैयारी
पिछले सप्ताह मिग-21 के दो स्क्वाड्रन सेवा से बाहर हो गए। इसके बाद वायुसेना ने बेड़े में तेजस मार्क-2 के 97 जेट शामिल करना तय किया। इस खरीदी के फैसले में स्पष्ट संकेत हैं कि वायुसेना आत्म निर्भरता के रास्ते पर बढ़ रही है। राफेल फाइटर के 2 स्क्वाड्रन के सौदे के बाद वायु सेना ने अपनी ही धरती पर बने फाइटर प्लेन उड़ाने का फैसला लिया है। वायु सेना ने 48 हजार करोड़ रुपए के सौदे के तहत 83 तेजस मार्क-1 खरीदने के फैसला किया था। भारतीय सेना के पास तेजस का एक एडवांस वर्जन मार्क-1 ए भी मौजूद है। यह एक फाइटर जेट है। जो 2205 किमी प्रति घंटे की स्पीड से उड़ता है और 6 तरह की मिसाइलों को ले जाने में सक्षम है।
भारत के पास फिलहाल 31 तेजस मार्क-1ए विमान, कुछ कश्मीर में तैनात
30 जुलाई को एयर फोर्स ने जम्मू-कश्मीर के अवंतीपोरा एयरबेस पर हल्के लड़ाकू विमान तेजस डज्ञ-1 को तैनात किया है। सेना का कहना है कि उसके पायलट्स घाटी में उड़ान की प्रैक्टिस कर रहे हैं। कश्मीर, पड़ोसी देशों चीन-पाकिस्तान के लिहाज से संवेदनशील है। तेजस मल्टीरोल हल्का लड़ाकू विमान है, जो वायु सेना को कश्मीर के जंगल और पहाड़ी इलाकों में और मजबूत करेगा।
बाकी फाइटर जेट से अलग है तेजस
तेजस अपनी कुछ खूबियों की वजह से बाकी के चारों फाइटर जेट से अलग और खास है।
पहला: इस विमान के 50 फीसदी कलपुर्जे यानी मशीनरी भारत में ही तैयार हुई है।
दूसरा: इसमें इजराइल के एईएसए-2052 रडार को लगाया गया है। इससे यह एक साथ 10 लक्ष्यों को ट्रैक कर उन पर निशाना साधने में सक्षम है।
तीसरा: बेहद कम जगह यानी 460 मीटर के रनवे पर टेकऑफ करने की क्षमता।
चौथा: यह फाइटर जेट सुखोई, राफेल, मिराज और मिग से हल्का है। इसका वजन 6500 किलो है।
एयरफोर्स को तेजस की जरूरत क्यों पड़ी?
पिछले पांच दशकों में 400 से ज्यादा मिग-21 विमानों के क्रैश होने की वजह से भारत सरकार इसे रिप्लेस करना चाह रही थी। तेजस इसी मिग-21 की जगह लेने में कामयाब हुआ है। इस विमान का वेट कम होने की वजह से यह समुद्री पोतों पर भी आसानी से लैंड और टेक ऑफ कर सकता है। यही नहीं, इसकी हथियार ले जाने की क्षमता मिग-21 से दोगुना है। तेजस की रफ्तार 2205 किलोमीटर प्रति घंटा है, जो कि राफेल से 300 किलोमीटर प्रति घंटा ज्यादा है।
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