नए साल के पहले ही दिन इसरो करेगा धमाका ! चांद-सूरज के बाद अब सुलझेगी अंतरिक्ष की गुत्थी
<p>भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) नए साल के पहले दिन ही बड़ा धमाका करने वाला है। इसरो अंतरिक्ष में एक्स-रे स्रोतों के तीव्र ध्रुवीकरण की जांच करने के लिए अपने पहले एक्स-रे पोलारिमीटर सैटेलाइट लॉन्च करने वाला है।</p>
भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन चांद-सूरज की गुत्थियां सुलझाने के बाद अपने नए मिशन पर लग गया है। दरअसल इसरो की नए साल 2024 में बड़ा धमाका करने की प्लानिंग है। इसरो चांद और सूरज के बाद अंतरिक्ष की गुत्थियां सुलझाने की तैयारी कर रहा है। इसरो अंतरिक्ष में एक्स-रे स्रोतों के तीव्र ध्रुवीकरण की जांच करने के लिए अपने पहले एक्स-रे पोलारिमीटर सैटेलाइट (ईपीएस) के लॉन्च के साथ नए साल की शुरुआत करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
सुबह 9ः10 बजे लॉन्च होगा
प्राप्त जानकारी के अनुसार ईपीएस 1 जनवरी, 2014 को लॉन्च होगा। यह भारत का पहला मर्पित पोलारिमेट्री मिशन है। इसरो ने घोषणा की है कि ईपीएस मिशन पोलर सैटेलाइट लॉन्च व्हीकल (पीएसएलवी) का उपयोग करके सुबह 9ः10 बजे लॉन्च होगा। यह भारत की अंतरिक्ष की यात्रा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होने वाला है।
दुनिया का दूसरा ऐसा मिशन
खगोलीय स्रोतों द्वारा एक्स-रे के पोलारिमेट्री ने खगोलविदों के बीच विशेष रूप से नासा के पोलारिमेट्री मिशन द्वारा किए गए हालिया खुलासे के मद्देनजर बहुत रुचि पैदा की है। सबसे बड़ी बात यह है कि यह मिशन न केवल भारत का पहला समर्पित पोलारिमेट्री मिशन है, बल्कि 2021 में लॉन्च किए गए नासा के इमेजिंग एक्स-रे पोलारिमेट्री एक्सप्लोरर के बाद दुनिया का दूसरा मिशन भी है।
पांच सालों के लिए डेटा देगा
एक बार लगभग 650 किलोमीटर की निचली पृथ्वी कक्षा में स्थापित होने के बाद, यह अगले पांच सालों के लिए डेटा प्रदान करेगा। सैटेलाइट में दो मुख्य पेलोड होंगे जो बेंगलुरु स्थित रमन रिसर्च इंस्टीट्यूट द्वारा विकसित किए गए हैं और दूसरा इसरो के यू आर राव सैटेलाइट सेंटर, इसरो द्वारा विकसित किया गया है।
क्यों है यह खास?
ऐसे मिशन ब्रह्मांड की सबसे दिलचस्प घटनाओं जैसे सुपरनोवा विस्फोटों के आसपास के रहस्यों को उजागर करने में भी सहायक होते हैं। वे खगोलविदों के लिए महत्वपूर्ण हैं जो इनमें से कुछ खगोलीय प्रक्रियाओं और उनके द्वारा उत्सर्जित एक्स-रे की जांच कर रहे हैं। पोलारिमेट्री मूलतः प्रकाश का गुण है। अंतरिक्ष में एक्स-रे पोलारिमेट्री कैसे काम करता है इसका अध्ययन करके, खगोलविद नए रहस्य को सुलझा सकते हैं कि प्रकाश कहां से आ रहा है और वह ऊर्जा स्रोत क्या है।
नासा के मिशन का जीवनकाल पूरा
बता दें कि नासा ने हाल ही में दिसंबर 2021 में अंतरिक्ष में एक्स-रे पोलारिमीटर का अध्ययन करने के लिए एक मिशन भी लॉन्च किया था। आईईपीई (इमेजिंग एक्स-रे पोलारिमेट्री एक्सप्लोरर) नामक मिशन ने पहले ही दो साल का अपना मिशन जीवन पूरा कर लिया है और इसे 2025 तक बढ़ा दिया गया था।
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