चिंतित विधायकों से जादूगर गहलोत बोले ‘डोंट वरी’
राजस्थान प्रदेश कांग्रेस में चल रहे घमासान के बीच कांग्रेस के कई विधायक और मंत्री असमंजस में पड़ हैं। असमंजस यह कि मंत्री शांति धारीवाल के कहने पर विधायक दल की बैठक में ना जाकर उन्होंने अलग बैठक की और अपने इस्तीफे विधानसा अध्यक्ष को सौंपने का कदम उन्होंने तो कदम उठा तो लिया लेकिन कहीं यह बैकफायर तो नहीं कर गया। इसी कश्मकश को लेकर आधा दर्जन मंत्रियों और एक दर्जन विधायकों ने मंगलवार, 27 सितंबर की शाम को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मुलाकात की। मुख्यमंत्री आवास पर जाकर करीब एक घंटे तक इस मामले पर चर्चा की।
प्रदेश कांग्रेस के वर्तमान हालात को लेकर गहलोत ने अपने मंत्रियों और विधायकों को चिंता छोड़ने की बात कही है। जैसे ही मुख्यमंत्री के सामने मंत्री और विधायकों ने ताजा हालात का जिक्र छेड़ा को उन्होंने इतना ही कहा कि ‘डोंट वरी'। गहलोत के मुंह से डोंट वरी सुनकर मंत्रियों और विधायकों में आत्मविश्वास और बढ गया। गहलोत ने कहा कि उन्हें किसी भी पद का मोह नहीं है। पार्टी में महत्वपूर्ण पदों पर वे काम कर चुके हैं। वे जनता के बीच रहकर लोगों की सेवा करते रहना चाहते हैं। सूत्रों के मुताबिक इस दौरान गहलोत ने कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद के लिए नामांकन के बारे में भी किसी किस्म का कोई जिक्र नहीं किया।
गहलोत ने कहा कि अलग से बैठक के लिए मैंने नहीं कहा था
मुख्यमंत्री से मुलाकात के बाद अधिकतर विधायकों और मंत्रियों ने मीडिया से दूरी बनाई। कुछ विधायकों का कहना था कि गहलोत ने स्पष्ट किया कि रविवार को विधायक दल की बैठक से पहले धारीवाल के बंगले पर हुई बैठक के बारे में उन्हें जानकारी नहीं थी। उन्होंने ऐसी बैठक करने के लिए नहीं कहा था। हालांकि बैठक का समय होने के दौरान पता चला कि कई विधायक वहां चले गए हैं। उन्होंने कहा कि विधायकों और मंत्रियों की भावनाएं हैं जो उन्होंने अपने सीनियर नेता के समक्ष प्रकट की। गहलोत बोले कि वे कांग्रेस हाईकमान के आदेश का इंतजार कर रहे हैं। जो भी आदेश आलाकमान से आएगा, वह हमें स्वीकार होगा।
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