21 तोपों की सलामी तो बहुत सुना है....पर ये सलामी किसको दी जाती है.. ?
<p>आपने भी कभी न कंही ये ज़रूर सोचा होगा कि गणतंत्र दिवस , स्वतंत्रता दिवस या किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष को इज्जत देने के लिए 21 तोपों की सलामी ही क्यों होती है ? आखिर इस परंपरा के पीछे का इतिहास क्या है ? इसे इतना सम्मानजनक क्यों माना जाता है ? </p>
इतिहास में 21 तोपों की सलामी से किसे नवाज़ा जाता था
भारत को 21 तोपों की सलामी की परंपरा ब्रिटिश साम्राज्य से विरासत में मिली है। आजादी से पहले सर्वोच्च सलामी 101 तोपों की सलामी थी जिसे शाही सलामी के रूप में भी जाना जाता था जो केवल भारत के सम्राट (ब्रिटिश क्राउन) को दी जाती थी। इसके बाद 31 तोपों की सलामी या शाही सलामी दी गई। यह महारानी और शाही परिवार के सदस्यों को पेश किया गया था। यह भारत के वायसराय और गवर्नर-जनरल को भी पेश किया गया था। 21 तोपों की सलामी राज्य के प्रमुख और विदेशी संप्रभु और उनके परिवारों के सदस्यों को पेश किया गया था।
अब भारत में इन्हे दी जाती है 21 तोपों की सलामी
भारत के राष्ट्रपति, सैन्य और वरिष्ठ नेताओं के अंतिम संस्कार के दौरान 21 तोपों की सलामी दी जाती है जबकि हाई रैंकिंग सेना अधिकारी (नेवल ऑपरेशंस के चीफ और आर्मी और एयरफोर्स के चीफ ऑफ स्टाफ) को 17 तोपों की सलामी दी जाती है।
राष्ट्रपति के रूप में गणराज्य भारत के राज्य प्रमुख को कई अवसरों पर 21 तोपों की सलामी से सम्मानित किया जाता है। शपथ ग्रहण समारोह के बाद हर नए राष्ट्रपति को इसी सलामी से सम्मानित किया जाता है। भारतीय राष्ट्रीय ध्वज और राष्ट्रपति, दोनों को स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस के दौरान 21 तोपों की सलामी से सम्मानित किया जाता है। अभी हाल ही में देश की 15वीं राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने शपथ ली और उन्हें भी 21 तोपों की सलामी भी दी गई थी।
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अंतिम संस्कार के दौरान प्रोटोकॉल का पालन किया जाता है। लेकिन, वह कौन सा प्रोटोकॉल है जो यह तय करता है कि राजकीय अंतिम संस्कार किसे मिलेगा और कैसे? आमतौर पर राजकीय सम्मान अंतिम संस्कार वर्तमान और पूर्व राष्ट्रपतियों, प्रधानमंत्रियों, केंद्रीय मंत्रियों और राज्य के मुख्यमंत्रियों को दिए जाते हैं। एक राजकीय अंतिम संस्कार की कुछ मुख्य विशेषताओं में, बंदूक की सलामी और आधे मस्तूल पर झंडों के अलावा, राज्य या राष्ट्रीय शोक दिवस की घोषणा, एक सार्वजनिक अवकाश और शव के ताबूत को राष्ट्रीय ध्वज के साथ लपेटा जाना शामिल है।
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हाल के दिनों में नियम बदले गए हैं ताकि राज्य सरकारें तय कर सकें कि व्यक्ति के कद,पद और देश की सेवा के आधार पर किसे राजकीय सम्मान अंतिम संस्कार दिया जा सकता है। भारत में मे सबसे पहली बार राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार की घोषणा महात्मा गांधी के लिए की गयी थी। तब तक अंतिम संस्कार के राजकीय सम्मान का प्रोटोकॉल और दिशा-निर्देश नहीं बने थे।
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