पूर्व सीजेआई बीएन कृपाल के पुत्र सौरभ कृपाल जो खुद को खुलकर ‘गे’ बताते हैं, सुप्रीम कोर्ट उन्हें हाई कोर्ट जज बनाने पर अड़ गया है..और फिर से की गई है उनके नाम की सिफारिश..!

<p><em>सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने एक बार फिर एडवोकेट सौरभ कृपाल को हाई कोर्ट का जज बनाने की सिफारिश की है। केंद्र सरकार एडवोकेट कृपाल के नाम पर अपनी मोहर लगाने को तैयार नहीं थी और इसीलिए उसने इस मामले में कॉलोजियम की सिफारिश को लंबित रख&nbsp;दिया था। लेकिन, सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि कृपाल को उनके सेक्सुअल रुझान के बारे में खुलकर बोलने के आधार पर केंद्र की तरफ से हाई कोर्ट के जस्टिस के तौर पर उनकी नियुक्ति के प्रस्ताव को वापस करना उचित नहीं है।&nbsp;</em></p>

पूर्व सीजेआई बीएन कृपाल के पुत्र सौरभ कृपाल जो खुद को खुलकर ‘गे’ बताते हैं, सुप्रीम कोर्ट उन्हें हाई कोर्ट जज बनाने पर अड़ गया है..और फिर से की गई है उनके नाम की सिफारिश..!
20-01-2023 - 11:43 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

कॉलेजियम ने एक बार फिर केंद्र सरकार के पास दिल्ली हाई कोर्ट के जस्टिस के तौर पर नियुक्ति के लिए कृपाल के नाम की सिफारिश भेजी है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सौरभ कृपाल का सेक्सुअल ओरिएंटेशन के बारे में बोलना उन्हें जजशिप के लिए अनुपयुक्त नहीं कर सकता है। उल्लेखनीय है कि केंद्र सरकार ने कहा था कि गे राइट्स के बारे में उनका जो रुझान है उसे देखते हुए सौरभ कृपाल के इस मामले में पूर्वाग्रह से ग्रसित होने से इनकार नहीं किया जा सकता है।
सर्वोच्च न्यायालय की कॉलेजियम ने कहा है कि मिस्टर सौरभ कृपाल अपने सेक्सुअल ओरिएंटेशन के बारे में खुलकर विचार रखते हैं। सुप्रीम कोर्ट की संवैधानिक पीठ का फैसला हर शख्स के सेक्सुअल रुझान और इसकी गरिमा को स्वीकार करता है। इस तरह देखा जाए तो इस आधार पर सौरभ कृपाल की हाई कोर्ट के जस्टिस के तौर पर उम्मीदवारी को खारिज करना सुप्रीम कोर्ट के जजमेंट के सिद्धांतों के खिलाफ होगा।
गे हैं सौरभ कृपाल, उनके साथी हैं स्विस नागरिक
सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने कहा कि सौरभ कृपाल का मामला पांच साल से लंबित है। वर्ष 2017 में 13 अक्टूबर को दिल्ली हाई कोर्ट कॉलेजियम ने उनका नाम प्रस्तावित किया था। फिर, 11 नवंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम ने उनका नाम सरकार को भेजा। कृपाल के पास योग्यता भी है, निष्ठा भी है और वह योग्य भी हैं। उनकी नियुक्ति से दिल्ली हाई कोर्ट की पीठ में वैल्यू एडिशन होगा और विविधता आएगी। केंद्र सरकार का यह कहना था कि उनका पार्टनर स्विस नागरिक है। इस तर्क को मानने का कोई कारण नहीं है। वर्तमान और भूतकाल में कई उच्च संवैधानिक पद पर बैठे व्यक्ति के पति या पत्नी विदेशी नागरिक रहे हैं। इस सिद्धांत के आधार पर कृपाल की उम्मीदवारी खारिज नहीं हो सकती है। ऐसे में हम सौरभ कृपाल की हाई कोर्ट के जस्टिस के तौर पर नियुक्ति के लिए उनके नाम दोबारा केंद्र सरकार को भेजते हैं।
पूर्व सीजेआई बीएन कृपाल के पुत्र हैं सौरभ कृपाल
सौरभ कृपाल देश के पूर्व प्रधान न्यायाधीश बी. एन. कृपाल के पुत्र हैं। केंद्र सरकार ने उनके समलैंगिक पार्टनर के विदेशी होने के आधार पर हाई कोर्ट के जज के तौर पर उनकी नियुक्ति के प्रस्ताव को लटकाया हुआ है। मार्च 2021 में तत्कालीन सीजेआई एसए बोबडे ने केंद्रीय कानून मंत्री को खत लिखकर कृपाल की नियुक्ति पर सरकार से अपनी आपत्तियों को स्पष्ट करने को कहा था। इसके जवाब में सरकार ने कहा कि उनके पार्टनर को लेकर परेशानी है। इस बीच मार्च 2021 में दिल्ली हाई कोर्ट ने कृपाल को सीनियर ऐडवोकेट का दर्जा दिया। हाई कोर्ट के सभी 31 जजों में इसे लेकर सर्वसम्मति थी।

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।