तो चीन लाएगा दुनिया में विनाशकारी मंदी ! बर्बाद होता ड्रेगन है ज्यादा खतरनाक

<p><em>चीन आर्थिक संकट से जूझ रहा है और अब विशेषज्ञों ने उसकी आबादी को लेकर बड़ी चेतावनी दी है। चीन ने ऐलान किया है कि उसकी जनसंख्या में गिरावट आई है। संयुक्त राष्ट्र ने चेतावनी दी है कि साल 2050 तक चीन की आबादी में और ज्यादा गिरावट आ जाएगी।</em></p>

तो चीन लाएगा दुनिया में विनाशकारी मंदी ! बर्बाद होता ड्रेगन है ज्यादा खतरनाक
14-02-2024 - 11:16 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

दुनिया की फैक्ट्री कहा जाने वाला चीन इन दिनों कई तरह की चुनौतियों से जूझ रहा है और उसको लेकर एक बार फिर से दुनिया के विशेषज्ञों ने बड़ी चेतावनी दी है। चीन ने घोषणा की है कि 2023 में उसकी जनसंख्या में गिरावट आई है। यह 1.4118 अरब से घटकर 1.4097 अरब रह गई है। संयुक्त राष्ट्र के पूर्वानुमान से पता चलता है कि चीन की जनसंख्या 2050 तक घटकर 1.313 अरब हो जाएगी और फिर 2100 तक घटकर लगभग 80 करोड़ हो जाएगी।
चीन की सीमाओं से परे होगा बदलाव 
यह एक महत्वपूर्ण बदलाव है और इसका असर इसकी सीमाओं से परे भी होगा। दो रुझान हैं जो इस तरह के जनसांख्यिकीय बदलाव को रेखांकित करते हैं। सबसे पहले वृद्ध जनसंख्या है, जिसमें 60 वर्ष और उससे अधिक आयु वालों का प्रतिशत वर्तमान में कुल जनसंख्या का 20 फीसदी से अधिक है। दूसरा, जन्म दर में काफी गिरावट आई है, 2016 में एक करोड़ 78 लाख जन्म से 2023 में यह 90 लाख हो गई है।
विश्व स्तर पर आएगा असर
ऐसे बदलावों के कई परस्पर संबंधित आर्थिक परिणाम सामने आ सकते हैं जो अंततः मध्य से दीर्घावधि में चीन की आर्थिक भलाई को प्रभावित कर सकते हैं और विश्व स्तर पर प्रतिध्वनित हो सकते हैं। 2040 तक चीन की एक-चैथाई से अधिक आबादी 60 वर्ष से अधिक हो जाएगी और आर्थिक रूप से कम सक्रिय होगी (पुरुषों के लिए सेवानिवृत्ति की आयु 60 वर्ष है और महिलाओं के लिए यह 50-55 वर्ष है)। 
लेने पड़ेंगे बड़े आर्थिक निर्णय
इससे चीन की पेंशन और बुजुर्ग देखभाल प्रणालियों पर दबाव पड़ेगा, कुछ भविष्यवाणियों से संकेत मिलता है कि पेंशन प्रणाली 2035 तक दिवालिया हो सकती है। सार्वजनिक संसाधनों पर दबाव डालने वाले पेंशन संबंधी मुद्दों से बचने के लिए, संभावित परिदृश्यों में लोगों को लंबे समय तक काम करने के लिए सेवानिवृत्ति की आयु बढ़ाना, अतिरिक्त पेंशन आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए करों में वृद्धि और वर्तमान लाभों को कम करना शामिल है।
राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो सकती है 
जनसंख्या परिवर्तन से निपटने के लिए स्वास्थ्य देखभाल प्रणाली में बदलाव से कई लोग कम अच्छी स्थिति में महसूस कर सकते हैं या सेवाओं में कमी से नाखुश हो सकते हैं। इसके परिणामस्वरूप कुछ हद तक राजनीतिक अस्थिरता पैदा हो सकती है। इसके अलावा, जैसे-जैसे बुजुर्गों की अपने बच्चों पर निर्भरता बढ़ती है, घरेलू खपत, बचत और निवेश के स्तर में गिरावट आने की संभावना है, जो बदले में अर्थव्यवस्था के समग्र स्वास्थ्य पर नकारात्मक प्रभाव डालता है। 
कामकाजी उम्र के कम लोग होंगे 
श्रम बल में कटौती जैसे-जैसे वृद्ध कर्मचारी सेवानिवृत्त होंगे, कुल जनसंख्या में कामकाजी उम्र के कम लोग होंगे, और इसलिए काम करने के लिए उपलब्ध होंगे। उदाहरण के लिए, वृद्ध लोगों को लंबे समय तक काम करना जारी रखने में मदद करने के उपाय करना, दीर्घकालिक आर्थिक विकास और प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद के स्तर को बनाए रखने का आधार बन सकता है।
चीन आयात बढ़ाने के लिए होगा मजबूर
फिर भी, जैसा कि ऊपर बताया गया है, ऐसे उपाय राजनीतिक रूप से अलोकप्रिय हो सकते हैं। उत्पादकता लाभ (प्रति नियोजित व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद) कम कार्यबल और बढ़ती उम्र से भी प्रभावित हो सकता है। कुछ अध्ययनों में इस बात के प्रमाण मिले हैं कि श्रम उत्पादकता (प्रति कार्य घंटे का उत्पादन) उम्र के साथ बदलती रहती है। जैसे-जैसे कोई व्यक्ति श्रम बाजार में प्रवेश करता है, यह बढ़ने लगता है, फिर 30 और 40 के बीच स्थिर हो जाता है, और अंततः किसी व्यक्ति का कार्य जीवन समाप्त होने पर इसमें गिरावट आती है। 
जनसंख्या परिवर्तन से ‘‘विनाश का चक्र’’ 
जनसंख्या परिवर्तन से ‘‘विनाश का चक्र’’ पैदा हो सकता है, जहां एक आर्थिक स्थिति नकारात्मक प्रभाव पैदा करती है और फिर दूसरी और उससे अगली। जैसे ही कम उत्पादकता विशेष क्षेत्रों में उत्पादन को प्रभावित करने लगेगी, चीन उन उद्योगों में मांग को पूरा करने के लिए आयात बढ़ाने के लिए मजबूर हो सकता है। यह नवाचार और उद्यमिता को महत्वपूर्ण रूप से प्रभावित कर सकता है जिसके परिणामस्वरूप उत्पादकता में और कमी आ सकती है।
नए विचारों का दायरा संकीर्ण होगा
नए विचार, आर्थिक विकास को गति देते हैं। कार्यबल का आकार नवाचार को प्रभावित करता है क्योंकि जैसे-जैसे नियोजित व्यक्तियों की संख्या घटती है, नए विचारों का दायरा संकीर्ण होता जाता है। यदि जनसंख्या वृद्धि नकारात्मक हो जाती है या शून्य हो जाती है, तो उन विचारों के पीछे का ज्ञान स्थिर हो जाता है। इसके अलावा, इस बात के भी प्रमाण हैं कि किसी व्यक्ति की नवोन्वेषी गतिविधियों और वैज्ञानिक उत्पादन का शिखर लगभग 30 और 40 वर्ष की आयु में आता है। इसलिए वर्तमान जनसांख्यिकीय रुझान चीन में तकनीकी प्रगति और नवाचार को अवरुद्ध करने की संभावना है। 
नवाचार का अकाल पड़ जाएगा

जीवन स्तर को बनाए रखने और सुधारने के लिए नवाचार आवश्यक है, परिणामस्वरूप जनसंख्या कम होने से जीवन की गुणवत्ता के स्तर पर दबाव आ सकता है। साथ ही, अध्ययनों से पता चलता है कि जनसंख्या की उम्र बढ़ने से उद्यमशीलता नकारात्मक रूप से प्रभावित हो सकती है क्योंकि युवाओं का प्रतिशत उद्यमशीलता गतिविधियों से सकारात्मक रूप से जुड़ा हुआ है। इससे अर्थव्यवस्था की गतिशीलता बाधित होती है और धीमी आर्थिक वृद्धि में योगदान होता है।
चीनी उत्पादकता में भी कमी आने की संभावना 
चीन की आर्थिक वृद्धि उत्पादकता और रोजगार वृद्धि पर निर्भर करती है। आर्थिक विकास सेवाओं या उत्पादों को उत्पन्न करने के लिए श्रम और पूंजी (धन) के प्रभावी संयोजन से प्रेरित होता है। इसके लिए निरंतर या बढ़ते जनसंख्या आकार की आवश्यकता होती है। महत्वपूर्ण बात यह है कि अपनी जनसंख्या कम होने के साथ, चीन को आर्थिक विकास को बनाए रखने के लिए अपनी प्रति व्यक्ति उत्पादकता बढ़ाने की आवश्यकता होगी। जैसा कि हमने देखा है, जनसांख्यिकीय परिवर्तनों के परिणामस्वरूप चीनी उत्पादकता में भी कमी आने की संभावना है। इसलिए, यह उम्मीद की जाती है कि चीनी अर्थव्यवस्था धीमी आर्थिक वृद्धि का अनुभव करेगी, उदाहरण के लिए, दुकानदारों या उपभोक्ताओं की संख्या में कमी जो सीधे खुदरा व्यापार क्षेत्र को प्रभावित करेगी।
चीनी उपभोक्ता बाजार राजस्व का एक बड़ा स्रोत
इसके अलावा, कम मांग से संपत्ति क्षेत्र में चल रहे संकट के बढ़ने की संभावना है। संपत्ति खरीदने में सक्षम कम लोगों का मतलब कीमतों में गिरावट होगी। और चीन के बाहर कीमतें बढ़ जाएंगी चीन दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाजार है जो दुनिया की एक तिहाई से अधिक वृद्धि के लिए जिम्मेदार है और दूसरा सबसे बड़ा आयातक है, इसलिए किसी भी बदलाव का वैश्विक असर होगा। उदाहरण के लिए, ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका में, जो चीन के साथ महत्वपूर्ण व्यापारिक भागीदार हैं, जनसंख्या में इन बदलावों से उनके निर्यात की मांग कम हो सकती है। इसके परिणामस्वरूप उन देशों में रोजगार का स्तर कम हो सकता है क्योंकि निर्यातक कंपनियां परिचालन कम करने के लिए मजबूर होंगी।
उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं
जैसे-जैसे चीन में उत्पादकता घटेगी, उसके व्यापारिक साझेदार अन्य अर्थव्यवस्थाओं से उत्पाद आयात करने के लिए मजबूर हो सकते हैं, जिसके परिणामस्वरूप उनके उत्पादों की कीमतें बढ़ सकती हैं। इसके अलावा, थाईलैंड और वियतनाम जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाएं जो चीनी आउटबाउंड पर्यटन पर निर्भर हैं, परिवहन और आतिथ्य जैसे सभी पर्यटन-संबंधित क्षेत्रों में महत्वपूर्ण गिरावट का अनुभव करेंगी क्योंकि जनसंख्या परिवर्तन के प्रभाव से विदेश यात्रा करने में सक्षम लोगों की संख्या कम हो जाएगी। 
वैश्विक विकास को नीचे ले जाएगी 
बहुराष्ट्रीय निगमों को भी मांग में गिरावट महसूस होगी क्योंकि चीनी उपभोक्ता बाजार उनके राजस्व का एक बड़ा स्रोत है। इसका असर वैश्विक होने की संभावना है क्योंकि दुनिया भर में आपूर्तिकर्ताओं और श्रमिकों को नौकरियां गायब होती दिख रही हैं। संक्षेप में, जैसा कि हालिया ओईसीडी रिपोर्ट में कहा गया है, चीन में तीव्र आर्थिक मंदी वैश्विक विकास को नीचे ले जाएगी, जिसके प्रभाव विनाशकारी हो सकते हैं।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।