सुप्रीम कोर्ट को मिले दो नये जज, 2019 के बाद 34 जजों के साथ क्षमता हुई पूरी
<p><em><strong>इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरविंद कुमार को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या क्षमता के तहत पूरी 34 हो गई है।</strong></em></p>
सुप्रीम कोर्ट को दो और जज मिल गए हैं। गुरूवार को राष्ट्रपति ने सुप्रीम कोर्ट कॉलेजियम की सिफारिश पर मुहर लगाई है। इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरविंद कुमार को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त किया गया है। इसी के साथ सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या क्षमता के तहत पूरी 34 हो गई है। 31 जनवरी को कॉलेजियम ने सुप्रीम कोर्ट में दो जजों की नियुक्ति की सिफारिश भेजी थी। इलाहाबाद हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस राजेश बिंदल और गुजरात हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस अरविंद कुमार को सुप्रीम कोर्ट में जज नियुक्त करने की सिफारिश की थी।
इससे पहले जब रंजन गोगोई भारत के मुख्य न्यायाधीश थे तब सुप्रीम कोर्ट में जजों के सभी पद भरे हुए थे। पिछले महीने सुप्रीम कोर्ट ने खुफिया एजेंसियों के इनपुट के आधार पर सरकार की लगाई गई, आपत्तियों का खंडन करते हुए केंद्र को लिखे गए अपने पत्र अपनी वेबसाइट पर अपलोड किए थे। एडवोकेट सौरभ किरपाल को दिल्ली हाईकोर्ट, सोमशेखर सुंदरसन को बॉम्बे हाईकोर्ट और आर जॉन सत्यन को मद्रास हाईकोर्ट में पदोन्नत करने की सिफारिश की गई थी।
किरपाल के मामले में न्यायालय ने दोनों कारणों का हवाला देते हुए यह खारिज कर दिया था कि उम्मीदवार खुले तौर पर समलैंगिक है और उसका साथी स्विस नागरिक है। अदालत ने कहा था कि इन आधारों पर उसे खारिज करना स्पष्ट रूप से संवैधानिक सिद्धांतों के विपरीत होगा। बॉम्बे हाईकोर्ट के सोमशेखर सुंदरेसन की पदोन्नति सोशल मीडिया पोस्ट के आधार पर खारिज कर दी गई थी। सूत्रों ने कहा कि उन्होंने नागरिकता संशोधन अधिनियम पर आलोचनात्मक ट्वीट किए थे। सुप्रीम कोर्ट ने कहा था, ‘सभी नागरिकों को अभिव्यक्ति की आजादी का अधिकार है।’
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