दुनिया के बड़े-बड़े खगोलविद नहीं देख सके ... लखनऊ के दो युवाओं ने ब्रह्मांड में तलाशा ‘राम’
<p>लखनऊ के दो युवाओं ने अनंत गगन में एक नए नेबुला की खोज की है। उन्होंने इसका नाम ‘राम’ दिया है। यह नेबुला पृथ्वी से करीब 3650 प्रकाश वर्ष दूर है। कैसिओपिया तारामंडल में स्थित इस नेबुला को खोजने में शहर के युवा खगोलविदों ने कामयाबी हासिल की। उनकी उपलब्धि की हर तरफ सराहना हो रही है।</p>
उत्तर प्रदेश के लखनऊ के दो युवाओं ने ब्रह्मांड में एक नए नेबुला की खोज की है। उन्होंने इसे ‘राम’ नाम दिया है। यह नेबुला कैसिओपिया तारामंडल में स्थित है, जो पृथ्वी से करीब 3650 प्रकाश वर्ष दूर है। वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी सुमित श्रीवास्तव ने बताया कि नेबुला अंतरिक्ष में मौजूद धूल और गैस का एक विशाल बादल होता है। ‘राम’ नेबुला तो आसानी से दिखाई भी नहीं देता था। इस कारण दुनिया भर के खगोलविद इसे नहीं देख पाए, लेकिन शहर के युवा खगोलविद संकल्प एम. रस्तोगी और उत्कर्ष मिश्रा की नजरों ने इसे ढूंढ निकाला।
संकल्प रस्तोगी साइंटिफिक नॉलेज फॉर यूथ फाउंडेशन नाम से एनजीओ भी चलाते हैं। उनके साथी उत्कर्ष मिश्रा एमिटी विश्वविद्यालय के स्टूडेंट हैं। ये दोनों 12 साल से इंदिरा गांधी तारामंडल के सदस्य हैं और कई साल तक वरिष्ठ वैज्ञानिक अधिकारी सुमित श्रीवास्तव की देखरेख में काम किया है। ये दोनों साल 2020 में लॉकडाउन के दौरान नए नेबुला की खोज के लिए नक्षत्रशाला के निदेशक अनिल यादव की अगुआई में बनी टीम का हिस्सा बने। इसके बाद संकल्प और उत्कर्ष ने नए नेबुला की खोज में लगातार काम किया।
55 से अधिक नए नेबुला की पहचान
संकल्प और उत्कर्ष अब तक 55 से अधिक नए नेबुला की पहचान करने में कामयाब रहे हैं। दोनों की सबसे बड़ी खोज बबलगम नेबुला है। यह भी मोनोसेरोस तारामंडल में है। यह आकार में बहुत बड़ी है, लेकिन बिना दूरबीन के आसानी से दिखाई नहीं देती। इसी तरह कैसिओपिया तारामंडल में फैंटम ऑफ द ओपेरा नेबुला के पास मोमी-4 नेबुला की तलाश की। इसे सॉसरर्स स्टोन नेबुला भी कहते हैं।
दोनों की हालिया खोज मोनोसेरोस तारामंडल में राम नेबुला है। सुमित श्रीवास्तव ने बताया कि राम नेबुला की खोज खगोलिकी के क्षेत्र में मील का पत्थर साबित होगी। इसका इस्तेमाल साइंटिफिक रिसर्च में भी किया जा सकेगा।
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