उत्तरकाशी टनल हादसा: 40 श्रमिकों को कब मिलेगी ‘नई जिंदगी’? रेस्क्यू मिशन हुआ मुश्किल
<p><em><strong>मजदूरों को सुरक्षित बाहर निकालने के लिए बचाव दल ने नया प्लान बनाया है। अब मलबे में बड़ी चौड़ाई वाले एमएस (माइल्ड स्टील) पाइप डाले जा रहे है। अधिकारियों के अनुसार सिलक्यारा सुरंग के धंसाव वाले हिस्से में ड्रिलिंग कर पाइप डाले जाएंगे, जिसके जरिए अंदर फंसे श्रमिक बाहर आ सकेंगे। </strong></em></p>
यमुनोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिलक्यारा-डंडालगांव सुरंग के एक हिस्से के ढहने से पिछले दो दिनों से उसके अंदर फंसे 40 श्रमिकों को बाहर निकालने के लिए बचावकर्मी मलबे में ‘माइल्ड स्टील’ पाइप डालने की कोशिश कर रहे थे लेकिन फिर से भूस्खलन होने से यह प्रक्रिया बाधित हो गई। मलबा गिरने से दो बचावकर्मी घायल हो गए, जिन्हें वहीं पर स्थापित अस्थायी अस्पताल में भेजा गया। सूत्रों ने बताया कि बचाव कार्य तब प्रभावित हुआ जब भूस्खलन के कारण ऊपर से और मलबा गिरने लगा जिससे भगदड़ जैसी स्थिति पैदा हो गई और दो मजदूर घायल हो गए।
युद्धस्तर पर बचाव एवं राहत अभियान जारी
उत्तराखंड में चार धाम राजमार्ग परियोजना पर एक निर्माणाधीन सुरंग के ढहने से उसके मलबे के भीतर 12 नवंबर से फंसे 40 श्रमिकों को बाहर निकलने की जद्दोजहद जारी है। सभी श्रमिकों को सुरक्षित निकालने के लिए सुरंग में पाइप से ‘एस्केप सुरंग’ बनाने के लिए खुदाई शुरू हो चुकी है और माना जा रहा है कि 40 श्रमिकों को बाहर निकालने में 24 घंटे से अधिक का समय लग सकता है। दरअसल, चारधाम ‘ऑल वेदर’ सड़क परियोजना के तहत निर्माणाधीन सिलक्यारा-डंडालगांव सुरंग का एक हिस्सा रविवार को भूस्खलन से ढह गया था और तब से श्रमिक उसके अंदर फंसे हुए हैं। उन्हें निकालने के लिए युद्धस्तर पर बचाव एवं राहत अभियान जारी है।
चार धाम ऑल वेदर रोड परियोजना का हिस्सा है सुरंग
बचाव एवं राहत कार्यों की निगरानी कर रहे उत्तरकाशी के जिलाधिकारी अभिषेक रूहेला ने बताया कि मिट्टी खुदाई करने वाली ऑगर मशीन और 900 मिलीमीटर व्यास के पाइप सुबह ही मौके पर पहुंचा दिए गए थे और सुरंग में ‘ड्रिलिंग’ (खुदाई) शुरू कर दी गई है। देहरादून से बोरिंग मशीनें और आठ विशेषज्ञों की एक टीम उस स्थान पर है, जहां यमुनोत्री-गंगोत्री राष्ट्रीय राजमार्ग पर सिल्क्यारा और बारकोट के बीच आगामी 4.5 किलोमीटर लंबी सुरंग का एक हिस्सा भूस्खलन के कारण ढह गया, जिससे मजदूर फंस गए। 853 करोड़ रुपये की सुरंग चार धाम ऑल वेदर रोड परियोजना का हिस्सा है। 12 नवंबर को सुबह करीब 5.30 बजे उस वक्त 100 मीटर लंबी छत गिर गई, जब मजदूर री-प्रोफाइलिंग का काम कर रहे थे।
‘एस्केप टनल’ बनाने के लिए ड्रिलिंग शुरू
उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अधिकारियों की मानें तो मलबे में एक पाइप डालने के लिए विशेष मशीनें तैनात की गई हैं ताकि फंसे हुए श्रमिकों को इसके माध्यम से निकाला जा सके, उन्होंने कहा कि घटनास्थल पर मिट्टी की स्थिति के कारण बचाव अभियान अपने आप में एक कठिन चुनौती है। यही एक रास्ता है। वहां की मिट्टी भुरभुरी है। बोरिंग बहुत सावधानी से करनी होगी, नहीं तो बचाव कार्य में लगी मशीनें भी ध्वस्त हो सकती हैं।
मलबे में कोई मजदूर नहीं दबा
भारत का सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय के तहत राष्ट्रीय राजमार्ग और बुनियादी ढांचा विकास निगम लिमिटेड यानी नेशनल हाईवे एंड इन्फ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (छभ्प्क्ब्स्) के अधिकारियों ने दावा किया कि फंसे हुए श्रमिकों के पास घूमने के लिए पर्याप्त जगह है और उन्हें भोजन उपलब्ध कराया गया है। उनका मानना है कि श्रमिक मलबे के नीचे दबे हुए हैं, यह सच नहीं है। छत बीच में ही ढह गई।
सुरंग में आराम से घूम रहे मजदूर
उनके घूमने-फिरने के लिए सुरंग के अंदर की ओर लगभग 2 किमी की खुली जगह है। अधिकारियों ने कहा कि सुरंग के नीचे बिजली की व्यवस्था कर दी गई है और वॉकी-टॉकी के माध्यम से कार्यकर्ताओं से संपर्क स्थापित किया गया है। उन्होंने (फंसे हुए श्रमिकों ने) कहा कि वे ठीक हैं मगर उन्हें भोजन की आवश्यकता है। हम उन्हें ड्राई फ्रूट्स की आपूर्ति करने के लिए 4 इंच व्यास का एक प्रेशर पाइप डालने में सक्षम है।
श्रमिक सुरक्षित, पाइप से पहुंचाई सहायता
सुरंग में फंसे सभी श्रमिक सुरक्षित बताए जा रहे हैं जिन्हें पाइप के जरिए लगातार ऑक्सीजन, पानी, सूखे मेवे सहित अन्य खाद्य सामग्री, बिजली, दवाइयां आदि पहुंचाई जा रही हैं। एक श्रमिक को उल्टी आने की समस्या है इसलिए उन तक दवाइयां भी पहुंचा दी गयी हैं।
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