वक्फ बिल मतदान के दौरान मुस्लिम संगठनों ने प्रियंका गांधी की अनुपस्थिति को बताया 'काला धब्बा..!'
लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर हुए मतदान के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा की अनुपस्थिति को लेकर केरल के प्रमुख मुस्लिम संगठन 'समसथा केरल जेम-इय्यतुल उलेमा' ने कड़ी नाराज़गी जताई है। संगठन के मुखपत्र ‘सुप्रभातम’ में प्रकाशित एक संपादकीय में प्रियंका गांधी की गैरहाज़िरी को उनके राजनीतिक जीवन पर ‘काला धब्बा’ बताया गया है।
तिरुवनंतपुरम। लोकसभा में वक्फ संशोधन विधेयक पर हुए मतदान के दौरान प्रियंका गांधी वाड्रा की अनुपस्थिति को लेकर केरल के प्रमुख मुस्लिम संगठन 'समसथा केरल जेम-इय्यतुल उलेमा' ने कड़ी नाराज़गी जताई है। संगठन के मुखपत्र ‘सुप्रभातम’ में प्रकाशित एक संपादकीय में प्रियंका गांधी की गैरहाज़िरी को उनके राजनीतिक जीवन पर ‘काला धब्बा’ बताया गया है।
संपादकीय में कहा गया है, “विपक्ष के व्हिप का उल्लंघन कर संसद सत्र से अनुपस्थित रहकर प्रियंका ने खुद को कलंकित किया है।”
कर्तव्य के प्रति उदासीनता का आरोप
संपादकीय में यह भी आरोप लगाया गया कि प्रियंका गांधी ने सांसद होने के कर्तव्यों के प्रति गंभीरता नहीं दिखाई और यह सवाल भी उठाया गया कि क्या वह संसद में चल रहे मुद्दों को लेकर सजग हैं या नहीं। साथ ही यह संकेत भी दिए गए कि वे शायद संसदीय जिम्मेदारियों से ज़्यादा अन्य राजनीतिक प्राथमिकताओं को तवज्जो देती हैं।
संपादकीय की हेडलाइन: "The Era of Inaction"
सुप्रभातम की यह टिप्पणी केवल प्रियंका गांधी तक सीमित नहीं रही। इसका शीर्षक था — “The Era of Inaction” (निष्क्रियता का दौर) — जो व्यापक राजनीतिक व्यवस्था के प्रति असंतोष को दर्शाता है।
बीजेपी की प्रतिक्रिया
इससे पहले भाजपा सांसद दिनेश शर्मा ने भी गांधी परिवार पर निशाना साधते हुए कहा था, “संसद में एक ऐतिहासिक क्षण था… लेकिन राहुल गांधी, प्रियंका गांधी वाड्रा और सोनिया गांधी तीनों में से किसी ने भी चर्चा में हिस्सा नहीं लिया। यह तक पता नहीं चला कि वे बिल के पक्ष में हैं या विरोध में… जबकि यह स्पष्ट था कि यह विधेयक अल्पसंख्यकों के हित में है और विभिन्न दलों के नेताओं ने इसका समर्थन किया।”
केरल में ‘समसथा’ का प्रभाव
समसथा केरल जेम-इय्यतुल उलेमा का केरल के मुस्लिम समाज में गहरा प्रभाव है। यह संगठन वहां के मुस्लिम वोट बैंक को काफी हद तक प्रभावित करता है। ऐसे में प्रियंका गांधी के प्रति इस तरह की सार्वजनिक आलोचना राजनीतिक दृष्टि से कांग्रेस के लिए झटका मानी जा रही है, विशेष रूप से वायनाड लोकसभा क्षेत्र में, जहां से वे सांसद हैं और जहां मुस्लिम मतदाता निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
वक्फ संशोधन विधेयक पर मतदान का विवरण:
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सदन |
पक्ष में वोट |
विरोध में वोट |
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लोकसभा |
288 |
232 |
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राज्यसभा |
128 |
95 |
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