“खुद को हिंदू मत कहो, नागरिक कहो” — बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार मुहम्मद यूनुस का अल्पसंख्यक समुदाय को संदेश
बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार (Chief Adviser) और नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने हाल ही में हिंदू समुदाय के लोगों से अपील की कि वे खुद को पहले बांग्लादेश का नागरिक समझें, न कि केवल एक धार्मिक अल्पसंख्यक के रूप में पहचानें..
ढाका। बांग्लादेश के मुख्य सलाहकार (Chief Adviser) और नोबेल पुरस्कार विजेता मुहम्मद यूनुस ने हाल ही में हिंदू समुदाय के लोगों से अपील की कि वे खुद को पहले बांग्लादेश का नागरिक समझें, न कि केवल एक धार्मिक अल्पसंख्यक के रूप में पहचानें। यूनुस का कहना है कि ऐसा करने से समाज में समावेशिता और एकता को बढ़ावा मिलेगा।
अमेरिकी पत्रकार मेहदी हसन को दिए एक इंटरव्यू में यूनुस ने कहा, “मेरा संदेश यह है कि जब आप समुदाय के नेताओं से मिलें तो यह मत कहें, ‘मैं हिंदू हूं, मेरी रक्षा करो।’ बल्कि यह कहें — ‘मैं इस देश का नागरिक हूं और मुझे वही सुरक्षा मिलनी चाहिए जो राज्य अपने हर नागरिक को देता है।’ इस तरह आपको व्यापक संरक्षण मिलेगा।”
“खुद को अलग-थलग महसूस न करें” — यूनुस
यूनुस ने कहा कि बांग्लादेश के हिंदुओं को खुद को “अलग-थलग महसूस नहीं करना चाहिए” और उन्हें अपने अधिकारों को पूर्ण नागरिक के रूप में दावा करना चाहिए। उन्होंने दोहराया,
“हमेशा कहें, ‘मैं इस देश का नागरिक हूं, और मुझे वही सुरक्षा चाहिए जो राज्य अपने सभी नागरिकों को देता है।’”
भारत पर “फेक न्यूज फैलाने” का आरोप
यूनुस ने बांग्लादेश में हिंदुओं के खिलाफ हिंसा की खबरों को “फेक न्यूज” बताते हुए खारिज किया और कहा कि यह खबरें भारत द्वारा फैलाए गए झूठे प्रचार का हिस्सा हैं।
उन्होंने कहा,“आज भारत की एक खासियत है, फेक न्यूज... झूठी खबरों की बौछार।”
यूनुस के मुताबिक, अधिकतर घटनाएं स्थानीय जमीन विवाद या पड़ोसी झगड़ों से जुड़ी थीं, जिन्हें साम्प्रदायिक हिंसा के रूप में प्रस्तुत किया गया। उन्होंने उन अंतरराष्ट्रीय रिपोर्टों को भी नकारा जिनमें शेख हसीना सरकार के पतन के बाद हिंदू समुदाय और मंदिरों पर हमलों का दावा किया गया था।
उन्होंने कहा, “सरकार इस मामले में बहुत सतर्क है, क्योंकि भारत हमेशा इस मुद्दे पर दबाव बनाता है।” जब मेहदी हसन ने उनसे भीड़ द्वारा हमले और एक हिंदू साधु की गिरफ्तारी जैसे दस्तावेज़ी मामलों का जिक्र किया, तो यूनुस ने दोहराया कि यह सब एक ग़लत सूचना अभियान (misinformation campaign) का हिस्सा है।
शेख हसीना के बाद बढ़ा असंतोष और विरोध
यह विवाद ऐसे समय में उठा है जब अगस्त 2024 में शेख हसीना की सरकार हटाए जाने के बाद यूनुस को अंतरिम सरकार का प्रमुख सलाहकार बनाया गया था। उनका मुख्य कार्य बांग्लादेश की कमजोर अर्थव्यवस्था को पुनर्जीवित करना और अंतरराष्ट्रीय निवेशकों का भरोसा लौटाना था।
हालांकि, उनकी सरकार पर भारत-विरोधी भावना बढ़ाने और इस्लामी संगठनों को बढ़ावा देने के आरोप लग रहे हैं।
ढाका और विदेशों में विरोध प्रदर्शन
पिछले नवंबर में लगभग 30,000 हिंदुओं ने ढाका में रैली निकालकर सुरक्षा और न्याय की मांग की। उन्होंने साधु चिन्मय कृष्ण दास समेत कई हिंदू नेताओं पर लगे देशद्रोह के मुकदमों को रद्द करने की भी अपील की।
विदेशों में भी यूनुस सरकार के खिलाफ प्रवासी बांग्लादेशियों ने प्रदर्शन किए। सितंबर में संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय (न्यूयॉर्क) के बाहर शेख हसीना समर्थकों ने प्रदर्शन किया, जिनमें नारे लगे, “यूनुस पाकिस्तानी है, पाकिस्तान वापस जाओ!”
प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि हसीना के सत्ता से हटने के बाद हिंदू और अन्य अल्पसंख्यक समुदायों पर खतरे बढ़ गए हैं।
कट्टरपंथी गुटों पर लगी पाबंदियां हटाई गईं
अंतरिम सरकार ने कई इस्लामी संगठनों पर लगी रोकों में ढील दी है, जिन्हें हसीना सरकार ने सख्ती से नियंत्रित किया था। कई कट्टरपंथी नेताओं को जेल से रिहा किया गया है, और जमात-ए-इस्लामी, जो बांग्लादेश की सबसे बड़ी और विवादित इस्लामी पार्टी है, अब सरकार में भूमिका चाह रही है।
भारत से तुलना — “हम सस्ते हैं, निवेश यहां आएगा”
इसी इंटरव्यू में यूनुस ने कहा कि बांग्लादेश भारत से सस्ता और अधिक प्रतिस्पर्धी विनिर्माण केंद्र (manufacturing hub) बन सकता है।
उन्होंने कहा, “भारत पर अमेरिका के आयात शुल्क (tariffs) बहुत ज्यादा हैं। जल्द ही भारतीय उद्योग हमारे यहां आकर काम करेंगे, क्योंकि यहां उत्पादन बहुत सस्ता है।”
उनका यह बयान ऐसे समय आया है जब
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