‘मेहनत करो, शॉर्टकट मत लो’: घोटाले में दोषी पाई गई चंदा कोचर की बेटी को लिखी ईमानदारी की चिट्ठी वायरल
देश की जानी-मानी बैंकर और ICICI बैंक की पूर्व CEO चंदा कोचर को ₹64 करोड़ के घूसकांड में दोषी पाया गया है। लेकिन इसी बीच उनकी साल 2016 में अपनी बेटी आरती को लिखी एक चिट्ठी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें वह ईमानदारी, मेहनत और मूल्यों की सीख दे रही..
नयी दिल्ली। देश की जानी-मानी बैंकर और ICICI बैंक की पूर्व CEO चंदा कोचर को ₹64 करोड़ के घूसकांड में दोषी पाया गया है। लेकिन इसी बीच उनकी साल 2016 में अपनी बेटी आरती को लिखी एक चिट्ठी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है, जिसमें वह ईमानदारी, मेहनत और मूल्यों की सीख दे रही हैं। यह चिट्ठी अब ट्रिब्यूनल के फैसले के संदर्भ में कहीं अधिक तीव्र विरोधाभास पैदा कर रही है।
क्या है पूरा मामला?
चंदा कोचर पर आरोप है कि उन्होंने साल 2009 में वीडियोकॉन ग्रुप को ₹300 करोड़ का लोन मंजूर करवाया और इसके तुरंत बाद उनके पति दीपक कोचर की कंपनी नूपावर रिन्यूएबल्स को वीडियोकॉन से जुड़ी एक कंपनी सुप्रीम एनर्जी से ₹64 करोड़ ट्रांसफर किए गए।
प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने इस पैसे को “अपराध से प्राप्त संपत्ति” करार देते हुए उनकी संपत्तियां जब्त कर लीं।
PMLA अपीलीय प्राधिकरण ने ED के इस कदम को सही ठहराया और कहा कि यह एक स्पष्ट quid pro quo (लेन-देन का रिश्ता) था।
इससे पहले चंदा कोचर को क्लीन चिट दी गई थी, जिसे ट्रिब्यूनल ने “पक्षपातपूर्ण और तथ्यों की अनदेखी करने वाला” बताया।
चंदा कोचर की चिट्ठी: ईमानदारी और मेहनत की सीख
साल 2016 में चंदा कोचर ने अपनी बेटी को यह पत्र लिखा था, जो NDTV के माध्यम से प्रकाशित हुआ था और अब फिर से वायरल हो रहा है।
पत्र का अनुवादित सारांश..
प्रिय आरती,
जब मैं लंदन से मुंबई लौट रही थी, तो मुझे एहसास हुआ कि तुम जल्द ही अपनी मैनेजमेंट की पढ़ाई पूरी करने वाली हो और भारत वापस लौट रही हो।
मैं तुम्हें अपने जीवन से कुछ सीखें देना चाहती हूं:
1. आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनो।
2. अपने लिंग को अपनी सीमाएं न बनने दो।
3. शॉर्टकट मत लो, हमेशा सही रास्ता चुनो।
4. हमेशा दयालु बनो।
5. मेहनत करो — थकोगी, लेकिन पछतावा नहीं होगा।
6. जीवन में संतुलन बनाओ।
7. खुश रहना एक यात्रा है, मंज़िल नहीं।
मैं हमेशा तुम्हारे साथ हूं।
सिर्फ तुम्हारी,
मम्मा
यह पत्र तब प्रेरणादायक माना गया था, लेकिन अब इसे एक विडंबनात्मक दस्तावेज़ के रूप में देखा जा रहा है।
ED और CBI के आरोप क्या हैं?