4,500 साल पुरानी सभ्यता का राजस्थान में खुलासा: खुदाई में महाभारतकालीन मूर्तियां, हथियार और बर्तन मिले

राजस्थान में 4,500 साल पुरानी एक प्राचीन सभ्यता के अवशेष मिले हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा की गई खुदाई में मूर्तियां, बर्तन और धातु के हथियार मिले हैं, जिनका संबंध महाभारत काल, मौर्य ..

4,500 साल पुरानी सभ्यता का राजस्थान में खुलासा: खुदाई में महाभारतकालीन मूर्तियां, हथियार और बर्तन मिले
30-06-2025 - 07:56 PM
22-04-2026 - 05:53 PM

जयपुर। राजस्थान में 4,500 साल पुरानी एक प्राचीन सभ्यता के अवशेष मिले हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) द्वारा की गई खुदाई में मूर्तियां, बर्तन और धातु के हथियार मिले हैं, जिनका संबंध महाभारत काल, मौर्य व शुंग वंशों से जोड़ा जा रहा है।

यह ऐतिहासिक खोज भरतपुर जिले के डीग उपखंड के बहज गांव में हुई है, जो कि मथुरा सहित ब्रज क्षेत्र का हिस्सा है। खुदाई स्थल को महत्त्वपूर्ण इसलिए भी माना जा रहा है क्योंकि यह क्षेत्र प्राचीन सांस्कृतिक और धार्मिक विरासत से जुड़ा हुआ है।

खुदाई की प्रमुख बातें:

  • स्थान: बहज गांव, डीग ज़िला, राजस्थान (भरतपुर से लगभग 40 किमी दूर)
  • शुरुआत: जनवरी 2024 में सरकार की अनुमति मिलने के बाद ASI ने खुदाई शुरू की
  • अवधि: करीब 6 महीने तक चली खुदाई
  • उल्लेखनीय खोजें:
    • 2500 ईसा पूर्व (यानी करीब 4,500 साल पुरानी) मूर्तियां, धातु के हथियार, बर्तन
    • मानव कंकाल, जिसे परीक्षण के लिए इज़राइल भेजा गया है, ताकि उसकी सही आयु का पता लगाया जा सके
  • प्रदर्शन:
    • कुछ मूर्तियों को जयपुर पुरातत्व विभाग भेजा गया है
    • अन्य मूर्तियों को डीग जल महल संग्रहालय में रखा गया है

विशेषज्ञों का कहना

डॉ. विनय गुप्ता, निदेशक, पुरातत्व विभाग, जयपुर ने कहा, जनवरी 10 को सर्वेक्षण के बाद खुदाई का काम शुरू हुआ। हमें उल्लेखनीय सफलता मिली है और खुदाई आगे भी जारी रहेगी। हमें उम्मीद है कि आने वाले समय में और भी प्रमाण इस क्षेत्र की प्राचीन सभ्यता के मिल सकते हैं।”

ऐतिहासिक संदर्भ

  • इस क्षेत्र में पहले भी प्राचीन सभ्यता के प्रमाण मिल चुके हैं।
  • 1961 से 1963 के बीच, ASI ने भरतपुर तहसील के नौह गांव में खुदाई की थी, जिसमें भी प्राचीन अवशेष मिले थे।

महत्व

यह खोज न सिर्फ राजस्थान की प्राचीनता को उजागर करती है, बल्कि यह भी संकेत देती है कि ब्रज क्षेत्र (जिसमें मथुरा, डीग, बहज आदि आते हैं) में सभ्यता का क्रमिक विकास हजारों साल पहले ही शुरू हो गया था।
महाभारतकाल से मौर्य और शुंग काल तक की निरंतरता इस क्षेत्र को भारत की सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहर के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण बनाती है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।