‘तो न होती पीओके वाली भूल...’ चीन-पाक को चिढ़ा देने वाले जयशंकर ने बताई नई कूटनीति
<p><em><strong>विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने पाकिस्तान और चीन के साथ भारत के संबंधों को लेकर विस्तार से बातें कहीं। विदेश मंत्री ने चीन के साथ संबंधों को लेकर दो टूक राय रखी। दोनों देशों के बीच संबंधों में टकराव के लिए उन्होंने साफ तौर पर चीन को जिम्मेदार ठहराया।</strong></em></p>
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने अपने बेलाग तेवर के लिए जाने जाते हैं। जयशंकर ने एक कार्यक्रम के दौरान पीओके को छोड़ने को लेकर भारत की गलती का जिक्र किया है। विदेश मंत्री पहले भी यूरोप समेत दुनिया के अन्य देशों के प्रति भारत का रवैये को स्पष्ट तौर पर सामने रख चुके हैं। जयशंकर का कहना है कि हमें पहले अपने रुख को साफ रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि इससे हमें क्या हासिल होगा या हम क्या कदम उठाएंगे, ये बाद की बात है। पहले हमें अपनी बात साफ तौर पर रखनी चाहिए। जयशंकर ने इस संदर्भ में भारत के बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव पर रुख का उदाहरण दिया।
चीन के बीआरआई का किया था विरोध
विदेश मंत्री ने कहा कि हमने बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव के खिलाफ सख्त रुख अपनाया था। उन्होंने कहा कि चीन पाकिस्तान आर्थिक गलियारे पर हमारा रुख कड़ा था। उन्होंने कहा कि मैं आपसे कह सकता हूं कि इस देश में कई वर्ग थे, जिन्होंने हम पर सवाल उठाया था। उन्होंने इस पर सार्वजनिक रूप से सवाल उठाया था। भले ही वे आज इससे इनकार करें लेकिन ये रिकॉर्ड में दर्ज है।
बुनियादी गलतियों को सुधार रहे हैं
उन्होंने कहा कि कहां हम सही हैं, कहां हमारे हित हैं इस बारे में स्पष्टता रखनी होगी। पिछले 75 सालों में ऐसी गड़बड़ी हुई है। विदेश मंत्री ने कहा कि हमने वास्तव में उन बुनियादी गलतियों को सुधार लिया है जो 1947 में हुई थीं। वो गलती जिसे सुधारने के लिए श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने जीवनभर पुरजोर लड़ाई लड़ी। सच तो यह है कि पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर को छोड़कर हमने दो विरोधी देशों के बीच निकटता विकसित होने दी, जिसकी कीमत हमें आज चुकानी पड़ रही है।
चीन से संबंधों में गिरावट हमारी तरफ से नहीं
विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने चीन के साथ संबंधों पर भी भारत का रुख साफ किया। विदेश मंत्री ने कहा कि संबंधों में गिरावट आना हमारी देन नहीं है। यह चीन की तरफ से ही 1993 और 1996 के समझौते का उल्लंघन करके पैदा की गई हैं। उन्होंने कहा कि यदि हमें एक सभ्य संबंध बनाना है तो उन्हें उन समझौतों का पालन करने की आवश्यकता है। जयशंकर ने कहा कि चीन को यह समझना होगा कि दो प्रमुख देशों के संबंध तभी काम करते हैं जब वे पारस्परिक हित, आपसी संवेदनशीलता और पारस्परिक सम्मान पर आधारित होते हैं।
तो समझौतों का पालन करे चीन
विदेश मंत्री से जब उनसे पूछा गया कि क्या दो एशियाई दिग्गजों के बीच कामकाजी संबंध हो सकते हैं, तो उन्होंने कहा, ‘अंततः ताली बजाने के लिए दो हाथों की जरूरत होती है और चीन को भी व्यावहारिक रिश्ते में विश्वास होना चाहिए। जयशंकर ने कहा कि अगर बेहतर कामकाजी संबंध बनाए रखना है तो चीन को वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर 1993 और 1996 में हुए समझौतों का पालन करना होगा।’
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