धरती पर 3110 करोड़ किमी दूरी से पहुंचा वीडियो 101 सेकेंड में रिसीव हुआ

<p><em>इस फुटेज में एक बिल्ली लेजर बीम को पकड़ने की कोशिश करती नजर आ रही है। इस वीडियो को अल्ट्रा एचडी क्वालिटी में साइक स्पेसक्राफ्ट से शेयर किया गया है।&nbsp;</em></p>

धरती पर 3110 करोड़ किमी दूरी से पहुंचा वीडियो 101 सेकेंड में रिसीव हुआ
20-12-2023 - 10:24 AM
21-04-2026 - 12:04 PM

नासा ने सोमवार को धरती से 3110 करोड़ किलोमीटर दूर एक स्पेसशिप से अल्ट्रा एचडी वीडियो शेयर किया है। ऐसा पहली बार हुआ है, जब डीप स्पेस यानी स्पेस में बहुत दूर से इतना हाई क्वालिटी वीडियो पृथ्वी पर भेजा गया हो।
15 सेकेंड के इस वीडियो में एक बिल्ली लेजर लाइट की बीम को पकड़ने की कोशिश करती नजर आ रही है। नासा के मुताबिक, इसे भेजने में करीब 101 सेकेंड का समय लगा। वीडियो 267 एमबीपीएस की स्पीड से भेजा गया। जब इसे शेयर किया गया तब स्पेसशिप धरती और चांद की दूरी से 80 गुना ज्यादा दूर था। नासा ने बताया कि ये कामयाबी इसलिए अहम है क्योंकि इस तकनीक का इस्तेमाल आगे चलकर हाई-डेटा को शेयर करने में किया जा सकेगा। यह इंसानों को मंगल ग्रह पर भेजने के मिशन में अहम भूमिका निभाएगा।
यह थ मिशन का मकसद
वीडियो को साइक स्पेसशिप से एक लेजर ट्रांसीवर के जरिए पृथ्वी पर भेजा गया था। ये स्पेसक्राफ्ट मार्स और जुपिटर के बीच एस्ट्रॉयड बेल्ट की यात्रा कर रहा है, जिससे ये एक रहस्यमय धातु का पता लगा सके। वीडियो सिग्नल को हेल टेलीस्कोप ने रिसीव किया। नासा ने बताया कि इसका एक मकसद लाखों मील की दूरी से ब्रॉडबैंड वीडियो शेयर करना है।
लेजर से बढ़ाई स्पीड
फिलहाल साइक स्पेसशिप में ऐसी कोई तकनीक नहीं है, जिसके जरिए वीडियो भेजा जा सके। नासा फिलहाल कम्युनिकेशन के लिए टेक्स्ट डेटा का इस्तेमाल करता है। स्पेस मिशन्स में आमतौर पर रेडियो वेव्स के जरिए डेटा भेजा और रिसीव किया जाता है। लेजर का इस्तेमाल करके डेटा शेयरिंग स्पीड को 10-100 गुना तक बढ़ाया जा सकता है।
वीडियो के लिए बिल्ली को ही क्यों चुना?
अमेरिका में 1920 के दशक में टेलीविजन में लोगों की रुचि तेजी से बढ़ने लगी थी। तब इमेज को टेस्ट करने के लिए एक बिल्ली के स्टैच्यू की तस्वीर शेयर की गई थी। वहीं बिल्ली से जुड़े कई वीडियोज और मीम अक्सर सोशल मीडिया पर वायरल होते रहते हैं। साइक स्पेसक्राफ्ट एक मेटल-रिच धातु का पता लगाने के लिए मंगल और बृहस्पति ग्रह के बीच एस्टॉयड बेल्ड की तरफ जा रहा है।
13 अक्टूबर को लॉन्च हुआ था साइक स्पेसक्राफ्ट
साइक स्पेसक्राफ्ट को 13 अक्टूबर को फ्लोरिडा स्थित केनेडी स्पेस सेंटर से लॉन्च किया गया था। इस एक्सपेरिमेंट के लिए डीप स्पेस ऑप्टिकल कम्युनिकेशंस सिस्टम का इस्तेमाल किया गया। यह सिस्टम स्पेसक्राफ्ट पर लगाया गया था। इस सिस्टम का इस्तेमाल लेजर-बीम मैसेज को पृथ्वी पर वापस भेजने के लिए किया जाता है।
14 नवंबर को रिसीव हुआ था मैसेज

नासा ने बताया कि 14 नवंबर को स्पेसक्राफ्ट ने कैलिफोर्निया में पालोमर ऑब्जर्वेटरी में हेल टेलिस्कोप के साथ एक कम्युनिकेशन लिंक स्थापित किया। इस कम्युनिकेशन लिंक के सफल प्रयोग को ‘फर्स्ट लाइट’ नाम दिया गया है।

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THE NEWS THIKANA, संपादकीय डेस्क यह द न्यूजठिकाना डॉट कॉम की संपादकीय डेस्क है। डेस्क के संपादकीय सदस्यों का प्रयास रहता है कि अपने पाठकों को निष्पक्षता और निर्भीकता के साथ विभिन्न विषयों के सच्चे, सटीक, विश्वसनीय व सामयिक समाचारों के अलावाआवश्यक उल्लेखनीय विचारों को भी सही समय पर अवगत कराएं।